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अनेक द्रव्यों से स्नान के बाद हेमाद्री संकल्प संपन्न
Updated Sun, 26 Aug 2018 11:12 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। पंचपुरी में हरकी पैडी सहित गंगा के अनेक घाटों पर श्रावणी उपाकर्म पर्व श्रद्धार्पूवक मनाया गया। करीब छह घंटे चले हेमाद्री संकल्प स्नान और ऋषि तर्पण के बाद संधानित रक्षासूत्र कलाइयों पर बांधे गए। पुरोहितों ने नए यज्ञोपवीत धारण किए तथा एक- दूसरे को श्रावणी पर्व की शुभकामनाएं दी।
भद्रा रहित श्रावणी पर्व बड़े धूमधाम से मना। हरकी पैडी पर गंगा सभा के संयोजन में पं. संजीव शास्त्री के नेतृत्व में हेमाद्री संकल्प स्नान पूरा हुआ। पुरोहितों ने दूध, घी, दही तथा पंचगव्य आदि से लंबा स्नान किया। पवित्र कुशाओं से छींटे देते हुए पुरोहितों ने धरा और आकाश दोनों को पवित्र कर दिया। कुशावर्त घाट पं. हरिओम जयवाल शास्त्री के आचार्यत्व में श्रावणी पर्व धूमधाम से मनाया गया। सैकड़ों पुरोहितों ने हेमाद्री स्नान के बाद देव, ऋषि एवं पितृ तर्पण करते हुए रक्षासूत्र संधानित किए। रामघाट पर पं. वासु मिश्रा के नेतृत्व में श्रावणी उपाकर्म हुआ। कनखल के राजघाट पर धर्म रक्षा मिशन के संयोजन तथा नितिन शुक्ला के आचार्यत्व में उपाकर्म मनाया गया। गंगा की मृतिका, गोबर, भस्म आदि शरीर पर मल कर बार-बार स्नान हुआ। वर्ष भर के पापों के प्रायश्चित करते हुए तर्पण किया गया। अपामार्ग, कुशोदक, दूर्बा आदि से मारजन अभिषेक हुआ। पुरोहितों ने सप्तऋषियों का आह्वान किया। इस आयोजन में तीर्थ-पुरोहितों के अलावा अन्य ब्राह्मणों ने भी भाग लिया। इस प्रकार के उपाकर्म संस्कृत विद्यालयों के छात्रों ने गंगा घाटों पर किए। उत्तरी हरिद्वार के परमार्थ घाट, भूमा घाट, अग्रसेन घाट आदि पर श्रावणी उपाकर्म पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया गया। शांतिकुंज में समूहिक रूप से श्रावणी पर्व मना।
हरिद्वार। पंचपुरी में हरकी पैडी सहित गंगा के अनेक घाटों पर श्रावणी उपाकर्म पर्व श्रद्धार्पूवक मनाया गया। करीब छह घंटे चले हेमाद्री संकल्प स्नान और ऋषि तर्पण के बाद संधानित रक्षासूत्र कलाइयों पर बांधे गए। पुरोहितों ने नए यज्ञोपवीत धारण किए तथा एक- दूसरे को श्रावणी पर्व की शुभकामनाएं दी।
भद्रा रहित श्रावणी पर्व बड़े धूमधाम से मना। हरकी पैडी पर गंगा सभा के संयोजन में पं. संजीव शास्त्री के नेतृत्व में हेमाद्री संकल्प स्नान पूरा हुआ। पुरोहितों ने दूध, घी, दही तथा पंचगव्य आदि से लंबा स्नान किया। पवित्र कुशाओं से छींटे देते हुए पुरोहितों ने धरा और आकाश दोनों को पवित्र कर दिया। कुशावर्त घाट पं. हरिओम जयवाल शास्त्री के आचार्यत्व में श्रावणी पर्व धूमधाम से मनाया गया। सैकड़ों पुरोहितों ने हेमाद्री स्नान के बाद देव, ऋषि एवं पितृ तर्पण करते हुए रक्षासूत्र संधानित किए। रामघाट पर पं. वासु मिश्रा के नेतृत्व में श्रावणी उपाकर्म हुआ। कनखल के राजघाट पर धर्म रक्षा मिशन के संयोजन तथा नितिन शुक्ला के आचार्यत्व में उपाकर्म मनाया गया। गंगा की मृतिका, गोबर, भस्म आदि शरीर पर मल कर बार-बार स्नान हुआ। वर्ष भर के पापों के प्रायश्चित करते हुए तर्पण किया गया। अपामार्ग, कुशोदक, दूर्बा आदि से मारजन अभिषेक हुआ। पुरोहितों ने सप्तऋषियों का आह्वान किया। इस आयोजन में तीर्थ-पुरोहितों के अलावा अन्य ब्राह्मणों ने भी भाग लिया। इस प्रकार के उपाकर्म संस्कृत विद्यालयों के छात्रों ने गंगा घाटों पर किए। उत्तरी हरिद्वार के परमार्थ घाट, भूमा घाट, अग्रसेन घाट आदि पर श्रावणी उपाकर्म पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया गया। शांतिकुंज में समूहिक रूप से श्रावणी पर्व मना।
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