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अष्टांग योग ही पूर्ण योग: डॉ. शा
Updated Mon, 26 Mar 2018 10:28 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
दिल्ली विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष डा. योगानंद शास्त्री ने कहा कि योग एवं आयुर्वेद भारत की प्राचीन खोज के रूप में अमूल्य धरोहर है। योग केवल आसन, प्राणायाम नहीं है, बल्कि पतंजलि का बताया हुआ अष्टांग योग ही पूर्ण योग है।
राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ आयुष मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग और योग विज्ञान विभाग गुरुकुल कांगड़ी विवि में योग शिक्षकों की छह दिवसीय कार्यशाला के शुभारंभ पर मुख्य अतिथि डा. योगानंद शास्त्री ने कहा कि भारत की प्राचीन विद्या योग आज दुनिया भर में पहुंच चुका है। इस प्रयास में गुरुकुल कांगड़ी विवि का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. सुरेंद्र कुमार ने कहा कि योग के आसन, प्राणायाम, मुद्रा, ध्यान अदि का चिकित्सीय उपयोग के लिए इसका प्रयोग किया जा रहा है, किंतु उसकी पूर्णता पतंजलि की ओर से निर्देशित योग के अभ्यास से ही प्राप्त होती है। मर्म चिकित्सा विशेषज्ञ प्रो. सुनील कुमार जोशी ने कहा कि योग एवं मर्म दुनिया की सबसे सस्ती और सुलभ चिकित्सा पद्धति के रूप में तेजी से स्थान बना रही हैं। कार्यक्रम में शारीरिक शिक्षा एवं खेल विज्ञान विश्वविद्यालय चेन्नई के प्रो. आर एलंगोवन, आयुर्विज्ञान एवं स्वास्थ्य संकाय के संकायाध्यक्ष एवं कार्यक्रम समन्वयक प्रो. ईश्वर भरद्वाज ने भी विचार रखे। संचालन योग विभाग के विभागाध्यक्ष डा. राकेश गिरी ने किया। डा. सुरेंद्र कुमार ने अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में डा. उधम सिंह, डा. योगेश्वर दत्त, डा. राजीव शर्मा, डा. निष्कर्ष शर्मा, धर्मेंद्र, मोहन, योगेंद्र, अमित धीमान, अरविंद एवं नवीन आदि उपस्थित रहे।
हरिद्वार।
दिल्ली विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष डा. योगानंद शास्त्री ने कहा कि योग एवं आयुर्वेद भारत की प्राचीन खोज के रूप में अमूल्य धरोहर है। योग केवल आसन, प्राणायाम नहीं है, बल्कि पतंजलि का बताया हुआ अष्टांग योग ही पूर्ण योग है।
राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ आयुष मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग और योग विज्ञान विभाग गुरुकुल कांगड़ी विवि में योग शिक्षकों की छह दिवसीय कार्यशाला के शुभारंभ पर मुख्य अतिथि डा. योगानंद शास्त्री ने कहा कि भारत की प्राचीन विद्या योग आज दुनिया भर में पहुंच चुका है। इस प्रयास में गुरुकुल कांगड़ी विवि का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. सुरेंद्र कुमार ने कहा कि योग के आसन, प्राणायाम, मुद्रा, ध्यान अदि का चिकित्सीय उपयोग के लिए इसका प्रयोग किया जा रहा है, किंतु उसकी पूर्णता पतंजलि की ओर से निर्देशित योग के अभ्यास से ही प्राप्त होती है। मर्म चिकित्सा विशेषज्ञ प्रो. सुनील कुमार जोशी ने कहा कि योग एवं मर्म दुनिया की सबसे सस्ती और सुलभ चिकित्सा पद्धति के रूप में तेजी से स्थान बना रही हैं। कार्यक्रम में शारीरिक शिक्षा एवं खेल विज्ञान विश्वविद्यालय चेन्नई के प्रो. आर एलंगोवन, आयुर्विज्ञान एवं स्वास्थ्य संकाय के संकायाध्यक्ष एवं कार्यक्रम समन्वयक प्रो. ईश्वर भरद्वाज ने भी विचार रखे। संचालन योग विभाग के विभागाध्यक्ष डा. राकेश गिरी ने किया। डा. सुरेंद्र कुमार ने अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में डा. उधम सिंह, डा. योगेश्वर दत्त, डा. राजीव शर्मा, डा. निष्कर्ष शर्मा, धर्मेंद्र, मोहन, योगेंद्र, अमित धीमान, अरविंद एवं नवीन आदि उपस्थित रहे।
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