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निर्धनों की सेवा ही सच्ची ईश्वर भक्ति : सुखबीर
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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
नानकपुरा आश्रम की परमाध्यक्ष मंहत सुखबीर कौर महाराज ने कहा है कि मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और गरीब असहाय व निर्धन लोगों की सेवा करना ही सच्ची ईश्वर भक्ति है।
नवरात्र के अवसर पर भूपतवाला स्थित नानकपुरा आश्रम में 101 कन्याओं का पूजन कर गरीब और असहायों को प्रसाद वितरित किया गया। इसके बाद मंहत सुखबीर कौर ने कहा कि दान-पुण्य करने से व्यक्ति के घर में सुख समृद्धि का वास होता है। इससे वह प्रभु भक्ति में लीन रहकर सदैव सफलता की ओर अग्रसर रहता है। उन्होनें कहा कि कन्याएं मां का स्वरूप होती है, हमें उन्हें शिक्षित कर आत्मनिर्भर बनाना चाहिए और समाज में एक समान दर्जा देना चाहिए। तभी समाज को एकता के सूत्र में बांधा जा सकेगा। बीबी जसवीर कौर व बाबा अमरजीत सिंह का कहना है कि योग्य गुरु को ही सुयोग्य शिष्य की प्राप्ति होती है। इस दौरान मंहत देवानंद सरस्वती, स्वामी ललितानंद गिरी, संत जसवीर सिंह, बाबा गुरुमीत सिंह, बाबा सुरेंद्र सिंह, बाबा गुरविंदर सिंह, बिमला शर्मा, बाबा काला सिंह, बाबा सुखदेव सिंह, बाबा छिंदा सिंह, संत ज्योत सिंह, सुनील मिश्रा, अनिल मिश्रा, महेंद्र सिंह आदि उपस्थित रहे।
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नानकपुरा आश्रम की परमाध्यक्ष मंहत सुखबीर कौर महाराज ने कहा है कि मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है और गरीब असहाय व निर्धन लोगों की सेवा करना ही सच्ची ईश्वर भक्ति है।
नवरात्र के अवसर पर भूपतवाला स्थित नानकपुरा आश्रम में 101 कन्याओं का पूजन कर गरीब और असहायों को प्रसाद वितरित किया गया। इसके बाद मंहत सुखबीर कौर ने कहा कि दान-पुण्य करने से व्यक्ति के घर में सुख समृद्धि का वास होता है। इससे वह प्रभु भक्ति में लीन रहकर सदैव सफलता की ओर अग्रसर रहता है। उन्होनें कहा कि कन्याएं मां का स्वरूप होती है, हमें उन्हें शिक्षित कर आत्मनिर्भर बनाना चाहिए और समाज में एक समान दर्जा देना चाहिए। तभी समाज को एकता के सूत्र में बांधा जा सकेगा। बीबी जसवीर कौर व बाबा अमरजीत सिंह का कहना है कि योग्य गुरु को ही सुयोग्य शिष्य की प्राप्ति होती है। इस दौरान मंहत देवानंद सरस्वती, स्वामी ललितानंद गिरी, संत जसवीर सिंह, बाबा गुरुमीत सिंह, बाबा सुरेंद्र सिंह, बाबा गुरविंदर सिंह, बिमला शर्मा, बाबा काला सिंह, बाबा सुखदेव सिंह, बाबा छिंदा सिंह, संत ज्योत सिंह, सुनील मिश्रा, अनिल मिश्रा, महेंद्र सिंह आदि उपस्थित रहे।
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