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ब्रह्मलीन महंत सुखदेवानंद को संतों ने दी श्रद्घांजलि, अस्थियां गंगा में विसर्जित
Updated Mon, 21 May 2018 10:24 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
ब्रह्मलीन महंत सुखदेवानंद त्याग और तपस्या की प्रतिमूर्ति थे। यह बात श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन के मुखिया महंत भगतराम महाराज ने उदासीन अखाड़े की छावनी में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में कही।
उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन महंत सुखदेवानंद महाराज ने अपने जीवनकाल में कई गरीब, असहाय लोगों की मदद की व गरीब कन्याओं की शादियां करवाई। गरीब परिवारों का पोलन पोषण करना उनके जीवन का मुख्य उद्देश्य था। महंत भूमिदास महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत सुखदेवानंद महाराज का गंगा के प्रति विशेष लगाव था।
महंत जगतार मुनि, महंत योगेंद्रानंद महाराज सैकड़ों श्रद्धालु भक्तों के साथ ब्रह्मलीन महंत सुखदेवानंद महाराज का अस्थि कलश लेकर कनखल सती घाट पहुंचे। जहां उनकी अस्थियों पर फूलमाला चढ़ाकर 11 विद्वान पंडितों से पूजा पाठ कराने के साथ गंगा में प्रवाहित की। महंत त्रिवेणीदास महाराज ने ब्रह्मलीन महंत को महान संत बताया। महंत जगतार मुनि, महंत जोगेंद्रानंद महाराज ने भावुक होकर अपने गुरु सुखदेवानंद महाराज को श्रद्धांजलि देते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। श्रद्धांजलि देने वालों में डा.स्वामी श्याम सुंदरदास शास्त्री, स्वामी ऋषिश्वरानंद, महंत कपिल मुनि महाराज, महंत सूरज मुनि, डा.रामप्रकाश शास्त्री, निर्मल अखाड़े के सचिव महंत बलवंत सिंह, मुखिया महंत जगदीश सिंह, स्वामी चिदविलासानंद, महंत जगदीशानंद गिरी, महंत प्रेमदास आदि मौजूद थे।
हरिद्वार।
ब्रह्मलीन महंत सुखदेवानंद त्याग और तपस्या की प्रतिमूर्ति थे। यह बात श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन के मुखिया महंत भगतराम महाराज ने उदासीन अखाड़े की छावनी में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में कही।
उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन महंत सुखदेवानंद महाराज ने अपने जीवनकाल में कई गरीब, असहाय लोगों की मदद की व गरीब कन्याओं की शादियां करवाई। गरीब परिवारों का पोलन पोषण करना उनके जीवन का मुख्य उद्देश्य था। महंत भूमिदास महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत सुखदेवानंद महाराज का गंगा के प्रति विशेष लगाव था।
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महंत जगतार मुनि, महंत योगेंद्रानंद महाराज सैकड़ों श्रद्धालु भक्तों के साथ ब्रह्मलीन महंत सुखदेवानंद महाराज का अस्थि कलश लेकर कनखल सती घाट पहुंचे। जहां उनकी अस्थियों पर फूलमाला चढ़ाकर 11 विद्वान पंडितों से पूजा पाठ कराने के साथ गंगा में प्रवाहित की। महंत त्रिवेणीदास महाराज ने ब्रह्मलीन महंत को महान संत बताया। महंत जगतार मुनि, महंत जोगेंद्रानंद महाराज ने भावुक होकर अपने गुरु सुखदेवानंद महाराज को श्रद्धांजलि देते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। श्रद्धांजलि देने वालों में डा.स्वामी श्याम सुंदरदास शास्त्री, स्वामी ऋषिश्वरानंद, महंत कपिल मुनि महाराज, महंत सूरज मुनि, डा.रामप्रकाश शास्त्री, निर्मल अखाड़े के सचिव महंत बलवंत सिंह, मुखिया महंत जगदीश सिंह, स्वामी चिदविलासानंद, महंत जगदीशानंद गिरी, महंत प्रेमदास आदि मौजूद थे।
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