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ंधी के बाद शहरवासियों को बिजली-पानी ने तड़फाया
Updated Fri, 04 May 2018 12:04 AM IST
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हरिद्वार।
बुधवार शाम को आए अंधड़ ने ऐसा कहर बरपाया कि बृहस्पतिवार को भी लोगों की दुश्वारियां कम नहीं हो सकी। शहर के कई इलाकों के लोगों ने पूरी रात बिना बिजली के काटी। बिजली की आपूर्ति तो बृहस्पतिवार सुबह सुचारु हो गई लेकिन पानी नसीब नहीं हो सका। जलसंस्थान के भीमगोडा और विष्णुघाट नलकूप की लाइनें टूटने से कई इलाकों में बृहस्पतिवार सुबह को भी पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी। लोगों को दिनभर पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसना पड़ा। विभागों को लाइनों की मरम्मत करने में घंटों लग गए। शाम को चार बजे पानी की आपूर्ति सुचारु होने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली।
बुधवार शाम को चार बजे आए अंधड़ ने भारी तबाही मचाई थी। बिजली की लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई थी। लाइनें टूटने से शहर के कई इलाकों की बिजली गुल हो गई थी। ऊर्जा निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों ने बृहस्पतिवार सुबह ही आपूर्ति सुचारु करने के लिए काम शुरू कर दिया था। सुबह करीब दस बजे तक अधिकांश इलाकों में बिजली की आपूर्ति सुचारु हो गई लेकिन इसके बाद भी बीच-बीच में बिजली गुल होती रही। कनखल, मध्य हरिद्वार, ज्वालापुर में आम लोगों के साथ व्यापारियों को दिक्कत उठानी पड़ी। संत बाहुल्य सप्तरोवर क्षेत्र में सप्तसरोवर, परमार्थ आश्रम, भूपतवाला चार नंबर बंधे के पास स्थित, भीमगोडा और विष्णुघाट का नलकूप भी बिजली बहाल नहीं होने से बंद रहा। मुख्य धार्मिक स्थान हरकी पैड़ी के सीसीआर क्षेत्र में भी पेयजल का संकट बना रहा। 24 घंटे बाद ही इन नलकूपों को चालू किया जा सका।
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विद्युत आपूर्ति बहाल करने का प्राथमिकता दी गई
विद्युत वितरण मंडल मायापुर हरिद्वार के अधिशासी अधिकारी वीएस पंवार ने बताया कि बुधवार की शाम लाइनें टूटने से बिजली की सप्लाई बंद हो गई थी। इसके आंधी के थमने के बाद ही बारिश में ही अधिकारी और कर्मचारी फील्ड में उतर गए थे। सभी लाइनों को चेक करने बाद टूटी तारों को जोड़ने का काम शुरू किया गया। उन्होंने दावा किया कि रात में 11.30 बजे तक 33 केवीए की लाइन को बहाल कर दिया गया था। नलकूपों और अन्य जो फाल्ट थे उनको बृहस्पतिवार को ठीक किया गया।
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दिनभर सफाई में लगे रहे व्यापारी
बुधवार को अंधड़ ऐसी धूल धकड़ लाया कि व्यापारियों के प्रतिष्ठानों के अंदर तक भर गया। शाम को व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों को बंद करके चले गए। बृहस्पतिवार सुबह दुकानें खुलने के साथ ही सफाई का काम शुरू किया। दिनभर व्यापारी सफाई में जुट रहे। तेज आंधी से कई दुकानों के बोर्ड और केबिन के सामने लगे शीशे टूट गए थे।
बुधवार शाम को आए अंधड़ ने ऐसा कहर बरपाया कि बृहस्पतिवार को भी लोगों की दुश्वारियां कम नहीं हो सकी। शहर के कई इलाकों के लोगों ने पूरी रात बिना बिजली के काटी। बिजली की आपूर्ति तो बृहस्पतिवार सुबह सुचारु हो गई लेकिन पानी नसीब नहीं हो सका। जलसंस्थान के भीमगोडा और विष्णुघाट नलकूप की लाइनें टूटने से कई इलाकों में बृहस्पतिवार सुबह को भी पानी की आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी। लोगों को दिनभर पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसना पड़ा। विभागों को लाइनों की मरम्मत करने में घंटों लग गए। शाम को चार बजे पानी की आपूर्ति सुचारु होने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली।
बुधवार शाम को चार बजे आए अंधड़ ने भारी तबाही मचाई थी। बिजली की लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई थी। लाइनें टूटने से शहर के कई इलाकों की बिजली गुल हो गई थी। ऊर्जा निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों ने बृहस्पतिवार सुबह ही आपूर्ति सुचारु करने के लिए काम शुरू कर दिया था। सुबह करीब दस बजे तक अधिकांश इलाकों में बिजली की आपूर्ति सुचारु हो गई लेकिन इसके बाद भी बीच-बीच में बिजली गुल होती रही। कनखल, मध्य हरिद्वार, ज्वालापुर में आम लोगों के साथ व्यापारियों को दिक्कत उठानी पड़ी। संत बाहुल्य सप्तरोवर क्षेत्र में सप्तसरोवर, परमार्थ आश्रम, भूपतवाला चार नंबर बंधे के पास स्थित, भीमगोडा और विष्णुघाट का नलकूप भी बिजली बहाल नहीं होने से बंद रहा। मुख्य धार्मिक स्थान हरकी पैड़ी के सीसीआर क्षेत्र में भी पेयजल का संकट बना रहा। 24 घंटे बाद ही इन नलकूपों को चालू किया जा सका।
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विद्युत आपूर्ति बहाल करने का प्राथमिकता दी गई
विद्युत वितरण मंडल मायापुर हरिद्वार के अधिशासी अधिकारी वीएस पंवार ने बताया कि बुधवार की शाम लाइनें टूटने से बिजली की सप्लाई बंद हो गई थी। इसके आंधी के थमने के बाद ही बारिश में ही अधिकारी और कर्मचारी फील्ड में उतर गए थे। सभी लाइनों को चेक करने बाद टूटी तारों को जोड़ने का काम शुरू किया गया। उन्होंने दावा किया कि रात में 11.30 बजे तक 33 केवीए की लाइन को बहाल कर दिया गया था। नलकूपों और अन्य जो फाल्ट थे उनको बृहस्पतिवार को ठीक किया गया।
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दिनभर सफाई में लगे रहे व्यापारी
बुधवार को अंधड़ ऐसी धूल धकड़ लाया कि व्यापारियों के प्रतिष्ठानों के अंदर तक भर गया। शाम को व्यापारी अपने प्रतिष्ठानों को बंद करके चले गए। बृहस्पतिवार सुबह दुकानें खुलने के साथ ही सफाई का काम शुरू किया। दिनभर व्यापारी सफाई में जुट रहे। तेज आंधी से कई दुकानों के बोर्ड और केबिन के सामने लगे शीशे टूट गए थे।