{"_id":"5b82e58842c792465533699a","slug":"41535305096-haridwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हरिद्वार में बह रही अनाधिकृत होटलों की बयार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हरिद्वार में बह रही अनाधिकृत होटलों की बयार
Updated Sun, 26 Aug 2018 11:08 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। जनपद में अनाधिकृत होटलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2016 उत्तराखंड पर्यटन एवं यात्रा व्यवसाय नियमावली के लागू होने के बाद केवल 17 होटलों ने ही पंजीकरण कराया है। जबकि जनपद में एक हजार से अधिक होटल संचालित किए जा रहे हैं। हरिद्वार नगर निगम में ही 526 होटलों से टैक्स वसूल रहा है। कई लोग अपने घरों को ही होटल के रूप में उपयोग में ला रहे हैं। पर्यटन विभाग भी अवैध होटलों के खिलाफ कोई कार्रवाई करता नजर नहीं आ रहा।
होटलों के पंजीकरण के लिए पहले सराय एक्ट था। इस एक्ट के अंतर्गत जनपद हरिद्वार में 383 होटल पंजीकृत हैं। अब सरकार ने सराय एक्ट खत्म कर उत्तराखंड पर्यटन एवं यात्रा व्यवसाय नियमावली 2016 के अंतर्गत होटलों का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया। नियमावली लागू होने के 180 दिनों के भीतर होटलों का पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। नियमावली लागू होने के करीब दो वर्ष बाद भी अब तक नियमावली के अंतर्गत 17 होटलों ने ही पंजीकरण कराया है। हालांकि सराय एक्ट में पंजीकृत होटलों को भी वैध ही माना जाएगा, लेकिन उत्तराखंड पर्यटन एवं यात्रा व्यवसाय नियमावली 2016 में पंजीकरण कराना भी आवश्यक है।
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पर्यटन विभाग से ज्यादा होटल नगर निगम में दर्ज
पर्यटन विभाग के पास मौजूद आंकड़ों के अनुसार हरिद्वार में केवल चार सौ ही होटल हैं। जबकि हरिद्वार नगर निगम के आंकडे कुछ और ही बयां करते हैं। हरिद्वार नगर निगम अपने क्षेत्र में 526 होटलों से विविधत रूप से टैक्स वसूल रहा है। जबकि रुड़की नगर निगम, बहादराबाद, लक्सर, लालढांग और शिवालिक नगर क्षेत्र में काफी संख्या में होटल हैं।
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घरों को कर रहे होटल के रूप में उपयोग
होटलों के निर्माण के लिए नियमावली के अंतर्गत कई मानक निर्धारित किए गए हैं, लेकिन अधिकांश होटल मानकों को पूरा नहीं करते हैं। कई लोगों ने अपने घरों में ही होटल खोल लिए हैं। इन होटलों द्वारा यात्रियों के साथ धोखाधड़ी के मामले भी कई बार सामने आते हैं। जिनके बारे के विभाग के पास भी कोई जानकारी नहीं है। जबकि नियमावली के अनुसार यात्रियों के ठहरने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले आवास का पर्यटन विभाग में पंजीकरण अनिवार्य है।
वर्जन
नियमावली के अंतर्गत पंजीकरण नहीं कराने वाले होटलों को नोटिस भेजा जाएगा। नोटिस के बाद भी पंजीकरण न करवाने पर आगे की कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी को अगवत कराया जाएगा।
-सीमा नोटियाल, जिला पर्यटन अधिकारी
विभाग की ओर से अनाधिकृत रूप से संचालित होटलों के खिलाफ निश्चित रूप से कार्रवाई की जानी चाहिए। इस प्रकार के होटलों से अपराधों को भी बढ़ावा मिलता है। जिससे अन्य होटलों की छवि धूमिल होती है।
-आशुतोष शर्मा, अध्यक्ष होटल एसोसिएशन