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292 खाद्य पदार्थों की सैंपल रिपोर्ट पेंडिंग
Updated Fri, 17 Aug 2018 01:13 AM IST
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हरिद्वार। खाद्य सुरक्षा विभाग को 292 खाद्य पदार्थों के सैंपल रिपोर्ट आने का इंतजार है। प्रदेश में केवल रुद्रपुर में ही खाद्य पदार्थों की जांच की प्रयोगशाला है। वहां भी स्टाफ की कमी होने से रिपोर्ट आने में छह माह तक का समय लग रहा है। हरिद्वार जिले के वित्तीय वर्ष 2017-18 की ही बात करें तो यहां से भेजे गए 178 सैंपल में से अब तक केवल 52 की ही रिपोर्ट आई है।
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जानने और जनता को गुणवत्तापरक खाद्य पदार्थ महैया कराने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग खाद्य पदार्थों के सैंपल लेता है। सभी सैंपल जांच के लिए रुद्रपुर स्थित लैब में भेजी जाती है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में 178 खाद्य पदार्थों के सैंपल लैब भेजे गए थे, लेकिन अब तक केवल 52 की ही रिपोर्ट आई है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में अब तक 165 सैंपल लैब भेजे जा चुके हैं। इनमें एक की भी रिपोर्ट नहीं आई है। जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजेंद्र पाल ने बताया कि रुद्रपुर लैब में एक ही खाद्य विशेषज्ञ तैनात होने से दिक्कतें आ रही हैं।
स्टॉक बिकने के बाद आती है रिपोर्ट
सैंपल लेकर लैब भेजने का मुख्य उद्देश्य लोगों को स्वास्थ्यपरक खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना है, लेकिन रिपोर्ट आने में देरी के चलते उसका कोई औचित्य नहीं रह जाता। विभाग सैंपल लेने के बाद उस खाद्य पदार्थ को बेचने पर रोक नहीं लगाता। ऐसे में रिपोर्ट आने तक पदार्थ निरंतर बिकता रहता है। जब तक रिपोर्ट में गुणवत्ता की कमी या मिलावट का पता चलता है, तब तक हजारों लोग उस खाद्य पदार्थ का सेवन कर चुके होते हैं।
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खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जानने और जनता को गुणवत्तापरक खाद्य पदार्थ महैया कराने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग खाद्य पदार्थों के सैंपल लेता है। सभी सैंपल जांच के लिए रुद्रपुर स्थित लैब में भेजी जाती है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में 178 खाद्य पदार्थों के सैंपल लैब भेजे गए थे, लेकिन अब तक केवल 52 की ही रिपोर्ट आई है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में अब तक 165 सैंपल लैब भेजे जा चुके हैं। इनमें एक की भी रिपोर्ट नहीं आई है। जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजेंद्र पाल ने बताया कि रुद्रपुर लैब में एक ही खाद्य विशेषज्ञ तैनात होने से दिक्कतें आ रही हैं।
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स्टॉक बिकने के बाद आती है रिपोर्ट
सैंपल लेकर लैब भेजने का मुख्य उद्देश्य लोगों को स्वास्थ्यपरक खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना है, लेकिन रिपोर्ट आने में देरी के चलते उसका कोई औचित्य नहीं रह जाता। विभाग सैंपल लेने के बाद उस खाद्य पदार्थ को बेचने पर रोक नहीं लगाता। ऐसे में रिपोर्ट आने तक पदार्थ निरंतर बिकता रहता है। जब तक रिपोर्ट में गुणवत्ता की कमी या मिलावट का पता चलता है, तब तक हजारों लोग उस खाद्य पदार्थ का सेवन कर चुके होते हैं।
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