{"_id":"5ac26a874f1c1bc2618b5222","slug":"41522690695-haridwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"राजकीय सम्मान के साथ किया स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रघुनंदन प्रसाद गुप्ता का अंतिम संस्कार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राजकीय सम्मान के साथ किया स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रघुनंदन प्रसाद गुप्ता का अंतिम संस्कार
Updated Mon, 02 Apr 2018 11:08 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रघुनंदन प्रसाद गुप्ता का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया। उनके पार्थिव शव को मुखाग्नि उनके पौत्र रवि गुप्ता ने दी। इस दौरान जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ शहर के गणमान्य लोग शामिल हुए। ऋषिकुल कालोनी निवासी रघुनंदन प्रसाद को अंग्रेजी शासन काल में पांच अप्रैल 1943 में 22 साल की सजा सुनाई गई और वह आगरा की जेल में रहे।
ऋषिकुल कालोनी निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रघुनंदन प्रसाद गुप्ता (101) का देहावसान रविवार दोपहर को दो बजे हुआ था। देहांत होने पर परिवार को श्रद्धाजंलि देने को भारी संख्या में लोग पहुंचते रहे। सोमवार अपराह्न 11.30 बजे कनखल श्मशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। जिलाधिकारी दीपक रावत ने दिवंगत स्वतंत्रता सेनानी के पार्थिव शारीर पर पुष्प चक्र समर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उत्तराखंड पुलिस के जवानों ने शस्त्र उल्टा कर सलामी दी। इस दौरान उपस्थित लोगों ने मृत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा। दिवंगत को मुखाग्नि उनके पौत्र रवि गुप्ता ने दी। जिलाधिकारी ने स्वतंत्रता सेनानी के पुत्र जगदीश गुप्ता व अन्य परिजनों को सांत्वना दी। श्रद्धांजलि देने वालों में पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी, सिटी मजिस्ट्रेट मनीष सिंह, पुलिस अधिकारी राजेंद्र सिंह खाती, स्वतंत्रता संग्राम उत्तराधिकारी समिति के अध्यक्ष सुभाष घई, सचिव श्याम सुंदर सचदेवा, भारत भूषण, दीपक मिश्रा, मुकुल जोशी, अशोक गुप्ता आदि शामिल रहे।
22 साल की हुई थी सजा
आजादी की अलख जगाने में अहम भूमिका निभाने वाले बदायूं से आकर हरिद्वार की ऋषिकुल कालोनी निवासी रघुनंदन प्रसाद गुप्ता को अंग्रेजों की मुखालफत करने पर गिरफ्तार कर लिया गया। सहारनपुर में उनके खिलाफ मुकदमा चलाया गया और पांच अप्रैल 1943 को उन्हें 22 साल की सजा सुनाई गई। हालांकि इन्हें आगरा की जेल में कैद करके रखा गया। देश की आजादी के बाद फिर से ऋषिकुल कालोनी में आकर बस गए। देश की आजादी के योगदान में अहम भूमिका निभाने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सम्मान के रूप में ताम्र पत्र भेंट किया था। वह अपने पीछे पत्नी विमला देवी के साथ दो पुत्र जगदीश प्रसाद एवं रमेश चंद के अलावा पौत्र रवि गुप्ता आदि छोड़ गए है।
विज्ञापन
हरिद्वार।
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रघुनंदन प्रसाद गुप्ता का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया। उनके पार्थिव शव को मुखाग्नि उनके पौत्र रवि गुप्ता ने दी। इस दौरान जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ शहर के गणमान्य लोग शामिल हुए। ऋषिकुल कालोनी निवासी रघुनंदन प्रसाद को अंग्रेजी शासन काल में पांच अप्रैल 1943 में 22 साल की सजा सुनाई गई और वह आगरा की जेल में रहे।
ऋषिकुल कालोनी निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रघुनंदन प्रसाद गुप्ता (101) का देहावसान रविवार दोपहर को दो बजे हुआ था। देहांत होने पर परिवार को श्रद्धाजंलि देने को भारी संख्या में लोग पहुंचते रहे। सोमवार अपराह्न 11.30 बजे कनखल श्मशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। जिलाधिकारी दीपक रावत ने दिवंगत स्वतंत्रता सेनानी के पार्थिव शारीर पर पुष्प चक्र समर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उत्तराखंड पुलिस के जवानों ने शस्त्र उल्टा कर सलामी दी। इस दौरान उपस्थित लोगों ने मृत आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा। दिवंगत को मुखाग्नि उनके पौत्र रवि गुप्ता ने दी। जिलाधिकारी ने स्वतंत्रता सेनानी के पुत्र जगदीश गुप्ता व अन्य परिजनों को सांत्वना दी। श्रद्धांजलि देने वालों में पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी, सिटी मजिस्ट्रेट मनीष सिंह, पुलिस अधिकारी राजेंद्र सिंह खाती, स्वतंत्रता संग्राम उत्तराधिकारी समिति के अध्यक्ष सुभाष घई, सचिव श्याम सुंदर सचदेवा, भारत भूषण, दीपक मिश्रा, मुकुल जोशी, अशोक गुप्ता आदि शामिल रहे।
विज्ञापन
22 साल की हुई थी सजा
आजादी की अलख जगाने में अहम भूमिका निभाने वाले बदायूं से आकर हरिद्वार की ऋषिकुल कालोनी निवासी रघुनंदन प्रसाद गुप्ता को अंग्रेजों की मुखालफत करने पर गिरफ्तार कर लिया गया। सहारनपुर में उनके खिलाफ मुकदमा चलाया गया और पांच अप्रैल 1943 को उन्हें 22 साल की सजा सुनाई गई। हालांकि इन्हें आगरा की जेल में कैद करके रखा गया। देश की आजादी के बाद फिर से ऋषिकुल कालोनी में आकर बस गए। देश की आजादी के योगदान में अहम भूमिका निभाने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सम्मान के रूप में ताम्र पत्र भेंट किया था। वह अपने पीछे पत्नी विमला देवी के साथ दो पुत्र जगदीश प्रसाद एवं रमेश चंद के अलावा पौत्र रवि गुप्ता आदि छोड़ गए है।
विज्ञापन