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श्रावण के आखिरी सोमवार को शिवालयों में जलाभिषेक

Mon, 20 Aug 2018 11:04 PM IST
Updated Mon, 20 Aug 2018 11:04 PM IST
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श्रावण के आखिरी सोमवार को शिवालयों में जलाभिषेक

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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार। पवित्र श्रावण मास के आखिरी सोमवार को देशभर से आए हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान शंकर का जलाभिषेक किया। आने वालों में कांवड़िए भी काफी संख्या में थे, जो शुक्ल पक्ष में जल चढ़ाने आए हैं। सभी पौराणिक शिवालयों में अनुष्ठानों का आयोजन भी किया गया।
कनखल दक्षेश्वर मंदिर में जल चढ़ाने वालों का लंबा जमावड़ा था। आखिरी सोमवार को दक्ष परिसर में विशाल मेला लगाया गया। गंगा जल चढ़ाने के लिए श्रद्धालुओं का आगमन सवेरे से शुरू हो गया था। सायंकाल भोलेनाथ की भव्य आरती उतारी गई। अनेक भक्तों ने मंदिर परिसर में रुद्राभिषेक और महारुद्राभिषेक कराए। शिव शंकर का अभिषेक भांग, धतूरा, आखा, गंगा जल, दूध, दही, धृत और शहद से किया गया। समीपवर्ती मां शीतला के मंदिर में भी भक्तों ने पूजा की। अनेक श्रद्धालुओं ने सतीकुंड जाकर दीप प्रज्ज्वलित किया। कनखल के दरिद्र भंजन मंदिर में महाभिषेक का आयोजन किया गया। दुख भंजन और तिलभांडेश्वर मंदिरों में भी जलाभिषेक तथा अनुष्ठान हुए। हरिद्वार के बिल्वकेश्वर मंदिर में पंड़ित अधीर कौशिक के संयोजन में अनुष्ठान और शिव पुराण कथा का आयोजन किया गया। गौरीकुंड पर अनेक भक्तों के स्नान के बाद पार्वती का अभिषेक किया। नीलेश्वर और गौरीशंकर मंदिरों में भक्तों की भीड़ रात तक लगी रही। इन स्थलों पर सावन के भंडारे भी शुरू हो चुके हैं। पौराणिक मंदिरों के अलावा समुद्रेश्वर, गुप्तेश्वर, जालेश्वर, जटिलेश्वर, उदयेश्वर आदि मंदिरों में भी जलाभिषेक हुआ। छांगेश्वर मंदिर में बेलपत्र द्वारा अनुष्ठान का आयोजन किया गया। पंचपुरी के अन्य मंदिरों में भी भक्तों ने जलाभिषेक किया।
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कांवड़ यात्रा का कृष्ण पक्ष बीत जाने के बावजूद कांवड़ियों का आगमन जारी है। ये कांवड़िए गंगाजली में गंगा जल भर ले जा रहे हैं अथवा यहीं के पौराणिक मंदिरों में जल चढ़ा रहे हैं। डाक वाहनों में जल ले जाने वाले कांवड़ियों की संख्या भी खासी है। इन दिनों में केशरिया वेशधारी कांवड़िए जल भरने आ रहे हैं। इन कांवड़ियों कहना है कि वे भीड़ से बचकर शुक्ल पक्ष में आते हैं। यह सिलसिला भादो मास तक भी जारी रहेगा। श्रावण का अंतिम सोमवार बीत गया। रविवार के दिन श्रावण का समापन हो जाएगा।
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