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उतराखंड सरकार की धीमी गति से संत नाराज
Updated Thu, 17 May 2018 12:05 AM IST
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हरिद्वार।
धर्मनगरी का संत समाज प्रदेश सरकार के कामकाज से नाराज है। करीब एक वर्ष पहले मंदिर जीर्णोद्वार की दो फाइल अभी तक आगे नहीं सरक पाई हैं। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण ने अभी तक भी उसे शासन को नहीं भेजा है। संतों ने साफ किया है कि यदि इसी गति से कार्य चलता रहा तो हरिद्वार कुंभ के कार्य समय पर पूरे नहीं हो पाएंगे।
अखाड़े इस बात प्रसन्न हैं कि यूपी की योगी सरकार ने इस वर्ष के अंत में शुरू होने वाले प्रयाग अर्द्धकुंभ के सभी कार्य मार्च तक पूरे कर दिए। प्रयाग कुंभ क्षेत्र में स्थायी निर्माण का कोई कार्य भी विशेष कार्य अब तक शेष नहीं बचा है। परिणाम यह कि संतों ने अपने आवंटित क्षेत्रों में आवश्यक संसाधन जुटाने शुरू कर दिए हैं। अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि ने बताया कि जूना अखाड़े गत वर्ष हरिद्वार के विश्व प्रसिद्ध पौराणिक मंदिर मायादेवी के नवीनीकरण का प्रस्ताव प्रशासन को भेजा था। यह प्रस्ताव स्वयं शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने बैठक तैयार कराया था। योजना यह है कि मायादेवी मंदिर को अगले हरिद्वार कुंभ तक अत्यंत भव्य मना दिया जाए। परिणाम स्वरूप 251 फिट ऊंचे प्रस्तावित मंदिर का मानचित्र भी गुजरात में उसी से तैयार कराया गया, जिसने अयोध्या में संभावित राम मंदिर, दिल्ली के अक्षर धाम आदि के मानचित्र बनाए हैं। इसके बावजूद वह फाइल अभी तक प्राधिकरण में पड़ी हुई है। इस मंदिर के निर्माण में कम से कम दो वर्ष लगने हैं। जबकि हरिद्वार कुंभ 2021 के आरंभ में होना है। इसी प्रकार गंगा के खाली पड़े विस्तार में आरंभिक निशानदेही भी नहीं की गई। जबकि इस क्षेत्र में पूरा कुंभ मेला लगना है। इस बारे में हाल ही में मुख्यमंत्री से वार्ता के दौरान संतों ने नाराजगी भी प्रगट कर दी है।
उधर, अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता बाबा हठयोगी दिगंबर ने एक बयान जारी कर सरकार की ढुलमुल नीति की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि संत जगत के हित में कोई कार्य यह सरकार नहीं कर रही।
धर्मनगरी का संत समाज प्रदेश सरकार के कामकाज से नाराज है। करीब एक वर्ष पहले मंदिर जीर्णोद्वार की दो फाइल अभी तक आगे नहीं सरक पाई हैं। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण ने अभी तक भी उसे शासन को नहीं भेजा है। संतों ने साफ किया है कि यदि इसी गति से कार्य चलता रहा तो हरिद्वार कुंभ के कार्य समय पर पूरे नहीं हो पाएंगे।
अखाड़े इस बात प्रसन्न हैं कि यूपी की योगी सरकार ने इस वर्ष के अंत में शुरू होने वाले प्रयाग अर्द्धकुंभ के सभी कार्य मार्च तक पूरे कर दिए। प्रयाग कुंभ क्षेत्र में स्थायी निर्माण का कोई कार्य भी विशेष कार्य अब तक शेष नहीं बचा है। परिणाम यह कि संतों ने अपने आवंटित क्षेत्रों में आवश्यक संसाधन जुटाने शुरू कर दिए हैं। अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि ने बताया कि जूना अखाड़े गत वर्ष हरिद्वार के विश्व प्रसिद्ध पौराणिक मंदिर मायादेवी के नवीनीकरण का प्रस्ताव प्रशासन को भेजा था। यह प्रस्ताव स्वयं शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने बैठक तैयार कराया था। योजना यह है कि मायादेवी मंदिर को अगले हरिद्वार कुंभ तक अत्यंत भव्य मना दिया जाए। परिणाम स्वरूप 251 फिट ऊंचे प्रस्तावित मंदिर का मानचित्र भी गुजरात में उसी से तैयार कराया गया, जिसने अयोध्या में संभावित राम मंदिर, दिल्ली के अक्षर धाम आदि के मानचित्र बनाए हैं। इसके बावजूद वह फाइल अभी तक प्राधिकरण में पड़ी हुई है। इस मंदिर के निर्माण में कम से कम दो वर्ष लगने हैं। जबकि हरिद्वार कुंभ 2021 के आरंभ में होना है। इसी प्रकार गंगा के खाली पड़े विस्तार में आरंभिक निशानदेही भी नहीं की गई। जबकि इस क्षेत्र में पूरा कुंभ मेला लगना है। इस बारे में हाल ही में मुख्यमंत्री से वार्ता के दौरान संतों ने नाराजगी भी प्रगट कर दी है।
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उधर, अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता बाबा हठयोगी दिगंबर ने एक बयान जारी कर सरकार की ढुलमुल नीति की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि संत जगत के हित में कोई कार्य यह सरकार नहीं कर रही।
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