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भूत प्रेत का साया उतारने नारायणी शिला पहुंची मुस्लिम महिला
Updated Sun, 13 May 2018 11:36 PM IST
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हरिद्वार।
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर की रहने वाली एक महिला ने रविवार को अपने परिजनों के साथ हरिद्वार पहुंचकर नारायणी शिला पर भूत प्रेत उतारने के लिए कर्मकांड किया। इस दौरान पितृमुक्ति पूजा के साथ ही हवन यज्ञ भी कराया गया।
दोपहर बाद हरिद्वार पहुंची महिला के साथ उसके परिजन और बहनोई भी आए हुए थे। इस दौरान महिला ने अपना नाम परवीन खान बताया लेकिन अन्य पहचान छिपाए रखी। नारायणी शिला के पुरोहित मनोज त्रिपाठी और पुरोहित कैलाश पाठक ने पितृ मुक्ति की पूजा और अन्य कर्मकांड संपन्न कराए। इस दौरान परिजनों ने बताया कि महिला उत्तराखंड की ही रहने वाली है। वह जन्म से हिंदू है लेकिन उसने हिमाचल प्रदेश के सिरमौर में रहने वाले एक मुस्लिम युवक से निकाह किया है। निकाह के बाद से वह काफी परेशान और बीमार रहती है। ऐसे में उत्तराखंड मूल के ही रहने वाले उसके एक गुरु ने उसे सलाह दी थी कि वह हरिद्वार नारायणी शिला पर जाकर पितृ मुक्ति के कर्म संपन्न कराएं तभी उसकी समस्या का समाधान हो सकता है। गुरु की सलाह मानते हुए पूरा परिवार महिला को लेकर हरिद्वार पहुंचा। कई घंटों तक नारायणी शिला में कर्मकांड और पूजा संपन्न कराई गई। बार बार पूछने पर परिवार ने अपनी पहचान छिपाए रखी।
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर की रहने वाली एक महिला ने रविवार को अपने परिजनों के साथ हरिद्वार पहुंचकर नारायणी शिला पर भूत प्रेत उतारने के लिए कर्मकांड किया। इस दौरान पितृमुक्ति पूजा के साथ ही हवन यज्ञ भी कराया गया।
दोपहर बाद हरिद्वार पहुंची महिला के साथ उसके परिजन और बहनोई भी आए हुए थे। इस दौरान महिला ने अपना नाम परवीन खान बताया लेकिन अन्य पहचान छिपाए रखी। नारायणी शिला के पुरोहित मनोज त्रिपाठी और पुरोहित कैलाश पाठक ने पितृ मुक्ति की पूजा और अन्य कर्मकांड संपन्न कराए। इस दौरान परिजनों ने बताया कि महिला उत्तराखंड की ही रहने वाली है। वह जन्म से हिंदू है लेकिन उसने हिमाचल प्रदेश के सिरमौर में रहने वाले एक मुस्लिम युवक से निकाह किया है। निकाह के बाद से वह काफी परेशान और बीमार रहती है। ऐसे में उत्तराखंड मूल के ही रहने वाले उसके एक गुरु ने उसे सलाह दी थी कि वह हरिद्वार नारायणी शिला पर जाकर पितृ मुक्ति के कर्म संपन्न कराएं तभी उसकी समस्या का समाधान हो सकता है। गुरु की सलाह मानते हुए पूरा परिवार महिला को लेकर हरिद्वार पहुंचा। कई घंटों तक नारायणी शिला में कर्मकांड और पूजा संपन्न कराई गई। बार बार पूछने पर परिवार ने अपनी पहचान छिपाए रखी।
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