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पुरुषोतम मास में संयोगों की भरमार
Updated Sun, 06 May 2018 10:52 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
16 मई को शुरू हो रहे पुरुषोत्तम मास में अनेक संयोग पड़ रहे हैं। इस मास में भले ही पर्व केवल एक हो पर योग-संयोग अधिक हैं। इस महीने देश भर से श्रद्धालु धर्मनगरी पहुंचेंगे। यात्रियों ने अपनी बुकिंग कराने की शुरुआत कर दी है। यह महीना 13 जून को समाप्त होगा।
बड़ी बात यह है कि यह पुरुषोत्तम मास सिद्धि योग और कृति नक्षत्र में शुरू हो रहा है। मास का समापन शुभ योग तथा रोहिणी नक्षत्र में होगा। ये योग और नक्षत्र ज्योतिष में पवित्रतम माने गए हैं। इस महीने की विशेषता यह है कि कोई भी तिथि घट अथवा बढ़ नहीं रही है। इस महीने 25 मई को अमृत योग भी बनेगा। सात जून को मानस योग और 11 जून को आनंद योग आ रहे हैं। ये योग स्नानार्थियों को विशेष फल देते हैं। इन योगों में गंगा आदि पवित्र नदियों के तट पर निवास करने एवं स्नान करने का विशेष फल प्राप्त होता है। यही कारण है कि हरिद्वार नगरी में 16 मई के बाद लगातार भीड़ बढ़ती चली जाएगी। यह ऐसा अकेला महीना होगा, जब शुक्ल पक्ष पहले आता है और कृष्ण पक्ष बाद में। यद्यपि नव संवत्सर भी शुक्ल पक्ष से प्रारंभ होता है, लेकिन उसके अंत में कृष्ण पक्ष नहीं आता। इसका कारण यह है कि आधा चैत्र बीतने के बाद संवत वर्ष का प्रारंभ होता है। इस पुरुषोत्तम मास में अनेक दुर्लभ योग पड़ने और साथ-साथ सीजन चलने के कारण लाखों की भीड़ आने की संभावना है।
हरिद्वार।
16 मई को शुरू हो रहे पुरुषोत्तम मास में अनेक संयोग पड़ रहे हैं। इस मास में भले ही पर्व केवल एक हो पर योग-संयोग अधिक हैं। इस महीने देश भर से श्रद्धालु धर्मनगरी पहुंचेंगे। यात्रियों ने अपनी बुकिंग कराने की शुरुआत कर दी है। यह महीना 13 जून को समाप्त होगा।
बड़ी बात यह है कि यह पुरुषोत्तम मास सिद्धि योग और कृति नक्षत्र में शुरू हो रहा है। मास का समापन शुभ योग तथा रोहिणी नक्षत्र में होगा। ये योग और नक्षत्र ज्योतिष में पवित्रतम माने गए हैं। इस महीने की विशेषता यह है कि कोई भी तिथि घट अथवा बढ़ नहीं रही है। इस महीने 25 मई को अमृत योग भी बनेगा। सात जून को मानस योग और 11 जून को आनंद योग आ रहे हैं। ये योग स्नानार्थियों को विशेष फल देते हैं। इन योगों में गंगा आदि पवित्र नदियों के तट पर निवास करने एवं स्नान करने का विशेष फल प्राप्त होता है। यही कारण है कि हरिद्वार नगरी में 16 मई के बाद लगातार भीड़ बढ़ती चली जाएगी। यह ऐसा अकेला महीना होगा, जब शुक्ल पक्ष पहले आता है और कृष्ण पक्ष बाद में। यद्यपि नव संवत्सर भी शुक्ल पक्ष से प्रारंभ होता है, लेकिन उसके अंत में कृष्ण पक्ष नहीं आता। इसका कारण यह है कि आधा चैत्र बीतने के बाद संवत वर्ष का प्रारंभ होता है। इस पुरुषोत्तम मास में अनेक दुर्लभ योग पड़ने और साथ-साथ सीजन चलने के कारण लाखों की भीड़ आने की संभावना है।
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