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वायुसेना के स्कवाड्रन लीडर सिद्घार्थ नेगी की अस्थियां गंगा में प्रवाहित
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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
तीन दिन पहले बंगलूरू में वायुसेना के मिराज विमान हादसे में शहीद हुए उत्तराखंड के युवा स्क्वाड्रन लीडर सिद्धार्थ नेगी की अस्थियां सोमवार की देर शाम कनखल स्थित सती घाट पर गंगा में प्रवाहित की गई। अस्थियों को सिद्धार्थ के पिता बलवीर सिंह नेगी ने विधि विधान से विसर्जित किया। इस दौरान पूरा माहौल गमगीन हो गया और सती घाट सिद्धार्थ नेगी अमर रहे के नारों से गूंज उठा।
सिद्धार्थ के पिता बलवीर सिंह नेगी कनखल में लंबे समय तक थानाध्यक्ष रहे। इसके अलावा भी वे जिले में कई स्थानों पर तैनात रहे। वे 2012 में पुलिस से सेवानिवृत्त होकर 2013 में ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के पद पर नियुक्त हुए। बीएस नेगी के बेटे सिद्धार्थ का बचपन के कुछ दिन कनखल हरिद्वार में बीते। बंगलूरू से सिद्धार्थ का अस्थि कलश उनके पिता और अन्य परिजन व सिद्धार्थ की पत्नी ध्रुविका राज हवाई जहाज से जौलीग्रांट एयरपोर्ट लेकर पहुंचे। उनका अस्थि कलश हरिद्वार के शांतिकुंज पहुंचा। जहां उनका अस्थि कलश श्रद्धांजलि के लिए रखा गया। इस दौरान लोंगों ने सिद्धार्थ के अस्थि कलश पर पुुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान राज्य सरकार की तरफ से कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने सिद्धार्थ नेगी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि सिद्धार्थ देवभूमि उत्तराखंड के गौरव थे। उत्तराखंड की जनता को उनपर फर्क है। कहा, देवभूमि वीरों की भूमि है। राज्य के वीर सपूतों ने अपनी कर्तव्यनिष्ठा से हमेशा देश का मान बढ़ाया है। सिद्धार्थ के अस्थि विसर्जन के कर्मकांड का कार्य उनके तीर्थ पुरोहित पंडित प्रतीक कौशिक ने संपन्न करवाया। इस दौरान सिद्धार्थ के ताऊ राजेन्द्र सिंह नेगी, चाचा सते सिंह नेगी, ग्राफिक ऐरा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ संजय जसोला, रजिस्ट्रार डीपी थपलियाल, निदेशक डॉ सुभाष गुप्ता, प्रशासनिक अधिकारी वीके चंद्रा समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
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तीन दिन पहले बंगलूरू में वायुसेना के मिराज विमान हादसे में शहीद हुए उत्तराखंड के युवा स्क्वाड्रन लीडर सिद्धार्थ नेगी की अस्थियां सोमवार की देर शाम कनखल स्थित सती घाट पर गंगा में प्रवाहित की गई। अस्थियों को सिद्धार्थ के पिता बलवीर सिंह नेगी ने विधि विधान से विसर्जित किया। इस दौरान पूरा माहौल गमगीन हो गया और सती घाट सिद्धार्थ नेगी अमर रहे के नारों से गूंज उठा।
सिद्धार्थ के पिता बलवीर सिंह नेगी कनखल में लंबे समय तक थानाध्यक्ष रहे। इसके अलावा भी वे जिले में कई स्थानों पर तैनात रहे। वे 2012 में पुलिस से सेवानिवृत्त होकर 2013 में ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी के पद पर नियुक्त हुए। बीएस नेगी के बेटे सिद्धार्थ का बचपन के कुछ दिन कनखल हरिद्वार में बीते। बंगलूरू से सिद्धार्थ का अस्थि कलश उनके पिता और अन्य परिजन व सिद्धार्थ की पत्नी ध्रुविका राज हवाई जहाज से जौलीग्रांट एयरपोर्ट लेकर पहुंचे। उनका अस्थि कलश हरिद्वार के शांतिकुंज पहुंचा। जहां उनका अस्थि कलश श्रद्धांजलि के लिए रखा गया। इस दौरान लोंगों ने सिद्धार्थ के अस्थि कलश पर पुुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान राज्य सरकार की तरफ से कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने सिद्धार्थ नेगी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि सिद्धार्थ देवभूमि उत्तराखंड के गौरव थे। उत्तराखंड की जनता को उनपर फर्क है। कहा, देवभूमि वीरों की भूमि है। राज्य के वीर सपूतों ने अपनी कर्तव्यनिष्ठा से हमेशा देश का मान बढ़ाया है। सिद्धार्थ के अस्थि विसर्जन के कर्मकांड का कार्य उनके तीर्थ पुरोहित पंडित प्रतीक कौशिक ने संपन्न करवाया। इस दौरान सिद्धार्थ के ताऊ राजेन्द्र सिंह नेगी, चाचा सते सिंह नेगी, ग्राफिक ऐरा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ संजय जसोला, रजिस्ट्रार डीपी थपलियाल, निदेशक डॉ सुभाष गुप्ता, प्रशासनिक अधिकारी वीके चंद्रा समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
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