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मातृसदन ने विधायक यतीश्वरानंद पर साधा निशाना
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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि एनजीटी ने खनन पर लगाए स्टे को वापस नहीं लिया तो विधायक स्वामी यतीश्वरानंद को कैसे पता चला कि खनन का रास्ता साफ हो गया।
स्वामी शिवानंद सरस्वती शनिवार को मातृसदन में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि स्वामी सानंद ने गंगा की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व त्याग दिया था, लेकिन उससे विधायक को कोई लेना देना नहीं। जबकि गंगा में किसी भी प्रकार के खनन पर रोक लगाना भी स्वामी सानंद की प्रमुख मांगों में शामिल है। उन्होंने कहा कि गंगा मंत्रालय से गंगा के लिए अनशनरत ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद को एक पत्र आया था जिसमें संसद सत्र में गंगा के लिए बनाए गए ड्राफ्ट को पेश किए जाने की बात कही थी, लेकिन संसद सत्र समाप्त होने को है और ड्राफ्ट अभी तक पेश नहीं किया गया। हालांकि वह सरकार द्वारा बनाए गए इस ड्राफ्ट को पहले ही रिजेक्ट कर चुके हैं। स्वामी शिवानंद ने प्रशासन के खिलाफ कोर्ट जाने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि ब्रह्मचारी आत्बोधानंद को भी अस्पताल में जान से मारने का प्रयास किया गया था। इस पर भी वह केस दर्ज करेंगे। वहीं शनिवार को ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद का अनशन 74वें दिन भी जारी रहा।
मैं मातृ सदन और वहां के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती का पूरा सम्मान करता हूं। गंगा के प्रति उनकी भावनाएं अनुकरणीय हैं लेकिन स्वामी जी को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि जनहित और गंगा के हित में खनन कराया जाना भी बेहद जरूरी है। ऐसा नहीं हुआ तो नुकसान भी हो सकता है। हम अवैध खनन के पूरी तरह विरोध में हैं लेकिन सरकारी नियम बनाकर वैज्ञानिक तरीके से खनन कराया जाना चाहिए। स्वामी शिवानंद को भी लोगों की इस भावना को समझना चाहिए।
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- स्वामी यतीश्वरानंद, विधायक
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मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि एनजीटी ने खनन पर लगाए स्टे को वापस नहीं लिया तो विधायक स्वामी यतीश्वरानंद को कैसे पता चला कि खनन का रास्ता साफ हो गया।
स्वामी शिवानंद सरस्वती शनिवार को मातृसदन में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि स्वामी सानंद ने गंगा की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व त्याग दिया था, लेकिन उससे विधायक को कोई लेना देना नहीं। जबकि गंगा में किसी भी प्रकार के खनन पर रोक लगाना भी स्वामी सानंद की प्रमुख मांगों में शामिल है। उन्होंने कहा कि गंगा मंत्रालय से गंगा के लिए अनशनरत ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद को एक पत्र आया था जिसमें संसद सत्र में गंगा के लिए बनाए गए ड्राफ्ट को पेश किए जाने की बात कही थी, लेकिन संसद सत्र समाप्त होने को है और ड्राफ्ट अभी तक पेश नहीं किया गया। हालांकि वह सरकार द्वारा बनाए गए इस ड्राफ्ट को पहले ही रिजेक्ट कर चुके हैं। स्वामी शिवानंद ने प्रशासन के खिलाफ कोर्ट जाने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि ब्रह्मचारी आत्बोधानंद को भी अस्पताल में जान से मारने का प्रयास किया गया था। इस पर भी वह केस दर्ज करेंगे। वहीं शनिवार को ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद का अनशन 74वें दिन भी जारी रहा।
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मैं मातृ सदन और वहां के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती का पूरा सम्मान करता हूं। गंगा के प्रति उनकी भावनाएं अनुकरणीय हैं लेकिन स्वामी जी को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि जनहित और गंगा के हित में खनन कराया जाना भी बेहद जरूरी है। ऐसा नहीं हुआ तो नुकसान भी हो सकता है। हम अवैध खनन के पूरी तरह विरोध में हैं लेकिन सरकारी नियम बनाकर वैज्ञानिक तरीके से खनन कराया जाना चाहिए। स्वामी शिवानंद को भी लोगों की इस भावना को समझना चाहिए।
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- स्वामी यतीश्वरानंद, विधायक