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एस्टेबलिस्मेंट एक्ट लागू हुआ तो बहुत महंगा हो जाएगा इलाज

Tue, 19 Feb 2019 12:04 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 19 Feb 2019 12:04 AM IST
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एस्टेबलिस्मेंट एक्ट लागू हुआ तो बहुत महंगा हो जाएगा इलाज
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार। जबरन क्लीनिकल एस्टेबलिसमेंट एक्ट लागू किए जाने के विरोध में चार दिन से क्लीनिक बंद कर कार्य से विरत चल रहे निजी चिकित्सकों की प्रदेश एक्शन कमेटी की बैठक में सरकार के उपेक्षापूर्ण रवैये पर चर्चा की गई। चिकित्सकों ने कहा कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं की जाएंगी चिकित्सक काम पर नहीं लौटेंगे। इस दौरान राज्य सरकार से चिकित्सकों के साथ हुई वार्ता के अनुसार एक्ट में प्रस्तावित संशोधन लागू करने की मांग की गई। दावा किया कि अगर एक्ट को मूल रूप में ही लागू कर दिया गया तो आम आदमी के लिए इलाज कराना काफी महंगा हो जाएगा।
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मध्य हरिद्वार स्थित एक होटल में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन आईएमए हरिद्वार से जुड़े सभी चिकित्सकों के साथ हुई बैठक में प्रदेश कार्यसमिति के सदस्यों ने भी भाग लिया। इस दौरान कहा गया कि क्लीनिकल एस्टेबलिसमेंट एक्ट में अनेक खामियां हैं इसे उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में लागू किया जाना जनहित में नहीं है। क्योंकि जिस तरह की बाध्यताएं एक्ट में शामिल की गई हैं उन्हें लागू किया गया तो आम आदमी के लिए इलाज कराना काफी महंगा हो जाएगा। चिकित्सकों ने कहा कि इस एक्ट के लागू होने से निजी चिकित्सकों को अपने यहां कार्यरत सभी पुराने अनुभवी सहकर्मियों को हटाना पड़ेगा और उनके स्थान पर नए डिप्लोमा और अन्य कोर्स करने वाले कर्मियों को रखना पड़ेगा।
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आईएमए के अध्यक्ष डॉ. जसप्रीत सिंह ने बताया कि एक्ट के अनुसार सरकार मरीजों को जेनेरिक दवाएं खाने को मजबूर कर रही है। खुद अमीर लोग ब्रांडेड दवाओं का प्रयोग करते हैं, लेकिन आम आदमी को जेनेरिक दवाओं के प्रयोग के लिए मजबूर किया जा रहा है। मांग की गई कि सरकार को चाहिए कि वह ब्रांडेड दवाओं का उत्पादन कराकर उच्च गुणवत्ता युक्त जेनेरिक दवाएं ही बनवाए। मांग की गई कि पचास बेड से कम संख्या वाले क्लीनिकों को एक्ट से बाहर रखा जाए। इस दौरान इस बात पर भी चिंता जताई गई कि शासन के अधिकारियों ने 20 जनवरी तक संशोधित एक्ट को केबिनेट की मंजूरी दिलाने का भरोसा दिलाया था, लेकिन उसे मंजूरी दिलाने के बजाय अब प्रदेश के कई जिलों में क्लीनिकों को सील किया जाने लगा है। मांगे नहीं माने जाने तक कार्यबहिष्कार जारी रखने का निर्णय लिया गया।
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बैठक में स्थानीय इकाई के अध्यक्ष डॉ. जसप्रीत सिंह, सचिव डॉ. विकास सिंह, डॉ. अंजुल श्रीमाली, डॉ. विपिन मेहरा, डॉ. राजेश गुप्ता, प्रदेश एक्शन कमेटी के सदस्य डॉ. आरके सिंघल, काशीपुर से आए डॉ. अरविंद शर्मा, सीएस जोशी, खटीमा से आए डॉ. आनंद मोहन आदि के अलावा स्थानीय चिकित्सकों में डॉ. संजय शाह, डॉ. नीता मेहरा, डॉ. दिनेश सिंह, डॉ. मोहित चौहान, डॉ. संध्या शर्मा, डॉ. कैलाश पांडे, डॉ. यतींद्र नागयान, डॉ. एके जैन, डॉ. आलोक वशिष्ठ समेत बड़ी संख्या में चिकित्सक मौजूद रहे। इस हड़ताल को दंत चिकित्सक एसोसिएशन के साथ ही पैथोलॉजी लैब से जुड़े चिकित्सकों ने भी समर्थन दिया।
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