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वीआईपी नंबरों से सात साल में कमाए 175 लाख
ब्यूरो, अमर उजाला/हरिद्वार
Updated Wed, 08 Jul 2015 02:48 AM IST
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विभिन्न विभागों में सुख-सुविधाओं पर मोटी धनराशि खर्च करने के किस्से तो खूब सुनने को मिलते रहते हैं लेकिन हरिद्वार जिले में अपनी गाड़ी का वीआईपी रजिस्ट्रेशन नंबर लेने के लिए वाहन स्वामियों ने सात साल में 175 लाख रुपये खर्च कर दिए। परिवहन विभाग को वीआईपी नंबर से सालाना 25 लाख रुपये की आय हो रही है।
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25 वाहन मालिक तो ऐसे हैं जिन्होंने मनपसंद नंबर के लिए एक-एक लाख रुपये तक खर्च कर डाले। पहले मोटर गाड़ी का परिवहन विभाग के उप संभागीय कार्यालय से मनमाफिक पंजीकरण नंबर हासिल करने के लिए सिफारिशों का दबाव अधिकारियों को झेलना पड़ता था।
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लेकिन शासन ने दिसंबर 2007 में इसका तोड़ निकालते हुए ऐसे नंबरों की सार्वजनिक सूची तैयार कर कीमत तय कर दी। उसके बाद सभी उपसंभागीय कार्यालयों को नंबरों की सूची थमा दी। फरवरी-2013 में ऐसे नंबरों का शुल्क दोगुना कर दिया गया। निर्धारित सूची के अनुसार इसके लिए अधिक से अधिक एक लाख रुपये और कम से कम पांच हजार रुपये शुल्क रखा गया है।
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786 सबसे महंगा नंबर
सभी नंबरों को छह कैटेगरी में बांटा गया है। सबसे मंहगी कैटेगरी में 0001 और 0786 नंबरों को रखा गया है। इनके लिए एक-एक लाख रुपये कीमत देनी पड़ती है। दूसरी कैटेगरी में 0002 से लेकर 0009 नंबर तक आते हैं। इनके लिए वाहन स्वामी को 60 हजार रुपये देने होते हैं।
तीसरी कैटेगरी में 0010, 0011, 0022 से 0099 नंबर रखे गए हैं। इनकी कीमत 50 हजार रुपये रखी गई है। चौथी सूची में 0100, 0101, 0111, 0222 और 0777 आदि नंबर शामिल हैं। इनके लिए 20 हजार शुल्क तय है। पांचवीं कैटेगरी में 1000, 1111, 2222 और 4141 सहित कुल 105 तरह के नंबरों को शामिल किया गया है।
इनके लिए भी 20 हजार रुपये देने होते हैं। छठी कैटेगरी में इनके अलावा अन्य इच्छित नंबर लिए जा सकते हैं। इस सूची के नंबर हासिल करने के लिए पांच हजार अदा कराए जाते हैं।
सबसे अधिक बिके यह नंबर
छठी कैटेगरी में शामिल पांच हजार की कीमत वाले पंजीकरण नंबरों की कुल संख्या अभी तक 1277 हैं। दूसरे नंबर पर 20 हजार रुपये जमा कर खरीदे गए पंजीकरण नंबर 348 हैं। 50 हजार रुपये खर्च करके मनचाहा नंबर लेने वाले जिले में 29 वाहन मालिक हैं।