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पीपीपी मोड पर आधारित देश के पहले एसटीपी का निर्माण शुरू
Updated Thu, 29 Mar 2018 10:51 PM IST
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रतनमणी डोभाल
हरिद्वार।
गंगा को प्रदूषण मुक्त, स्वच्छ तथा निर्मल बनाने के लिए नमामि गंगे योजना का हरिद्वार में देश का पहला पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी मोड) पर आधारित दो सीवर शोधन संयंत्र (एसटीपी) निर्माण का काम शुरू हो गया है।
जगजीतपुर में 68 एमएलडी और सराय ज्वालापुर में 14 एमएलडी के एसटीपी का निर्माण एक साथ शुरू कराया गया है। दोनों संयंत्रों की निर्माण अवधि 21 महीने निर्धारित है। हालांकि पेयजल निर्माण निगम की निर्माण एवं अनुरक्षण शाखा (गंगा) के अधिकारी तय अवधि से पहले ही इसका निर्माण कराकर रिकार्ड बनाने की जीतोड़ कोशिश कर रहे हैं। दोनों सीवर शोधन संयंत्रों की निर्माण लागत 171.53 करोड़ है। पीपीपी मोड पर आधारित देश की यह पहली ऐसी एसटीपी योजना है जिसको बनाने वाली कंपनी को 15 साल तक उसका अनुरक्षण (मरम्मत) भी करना होगा। पेयजल निगम की अनुबंधित फर्म ने दोनों ही स्थानों पर सीवर शोधन संयंत्र बनाने के लिए खुदाई का काम शुरू कर दिया है। इन दोनों संयंत्रों के निर्माण तथा वर्तमान 27 तथा 18 एमएलडी के सीवर शोधन संयंत्रों के उच्चीकरण के बाद 2040 तक की जरूरत पूरी हो जाएगी। दोनों योजनाओं के काम दिसंबर 2019 तक पूरे होने हैं। इसके बाद सीवर की गंदगी से गंगा को मुक्ति मिल जाएगी।
नमामि गंगे मिशन की देश की पहली ऐसी योजना है, जिसको हाई ब्रिड एनयूटी मोड पर बनाया जा रहा है। सीवर शोधन की गुणवत्ता को प्राथमिकता में रखा गया है। अनुबंधित फर्म को एसटीपी निर्माण के लिए 40 प्रतिशत राशि देने का प्रावधान किया गया है। एसटीपी चालू होने के बाद अनुरक्षण कार्य गुणवत्ता के साथ हो इसके लिए 60 प्रतिशत राशि का भुगतान 15 साल में किश्तवार करने की शर्त लगाई गई है।
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- आरके जैन परियोजना प्रबंधक निर्माण एवं अनुरक्षण (गंगा) पेयजल निगम हरिद्वार।
हरिद्वार।
गंगा को प्रदूषण मुक्त, स्वच्छ तथा निर्मल बनाने के लिए नमामि गंगे योजना का हरिद्वार में देश का पहला पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी मोड) पर आधारित दो सीवर शोधन संयंत्र (एसटीपी) निर्माण का काम शुरू हो गया है।
जगजीतपुर में 68 एमएलडी और सराय ज्वालापुर में 14 एमएलडी के एसटीपी का निर्माण एक साथ शुरू कराया गया है। दोनों संयंत्रों की निर्माण अवधि 21 महीने निर्धारित है। हालांकि पेयजल निर्माण निगम की निर्माण एवं अनुरक्षण शाखा (गंगा) के अधिकारी तय अवधि से पहले ही इसका निर्माण कराकर रिकार्ड बनाने की जीतोड़ कोशिश कर रहे हैं। दोनों सीवर शोधन संयंत्रों की निर्माण लागत 171.53 करोड़ है। पीपीपी मोड पर आधारित देश की यह पहली ऐसी एसटीपी योजना है जिसको बनाने वाली कंपनी को 15 साल तक उसका अनुरक्षण (मरम्मत) भी करना होगा। पेयजल निगम की अनुबंधित फर्म ने दोनों ही स्थानों पर सीवर शोधन संयंत्र बनाने के लिए खुदाई का काम शुरू कर दिया है। इन दोनों संयंत्रों के निर्माण तथा वर्तमान 27 तथा 18 एमएलडी के सीवर शोधन संयंत्रों के उच्चीकरण के बाद 2040 तक की जरूरत पूरी हो जाएगी। दोनों योजनाओं के काम दिसंबर 2019 तक पूरे होने हैं। इसके बाद सीवर की गंदगी से गंगा को मुक्ति मिल जाएगी।
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नमामि गंगे मिशन की देश की पहली ऐसी योजना है, जिसको हाई ब्रिड एनयूटी मोड पर बनाया जा रहा है। सीवर शोधन की गुणवत्ता को प्राथमिकता में रखा गया है। अनुबंधित फर्म को एसटीपी निर्माण के लिए 40 प्रतिशत राशि देने का प्रावधान किया गया है। एसटीपी चालू होने के बाद अनुरक्षण कार्य गुणवत्ता के साथ हो इसके लिए 60 प्रतिशत राशि का भुगतान 15 साल में किश्तवार करने की शर्त लगाई गई है।
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- आरके जैन परियोजना प्रबंधक निर्माण एवं अनुरक्षण (गंगा) पेयजल निगम हरिद्वार।