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हरिद्वार से रहा बाल कवि बैरागी का गहरा रिश्ता
Updated Mon, 14 May 2018 10:44 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
विख्यात कवि और पूर्व सांसद बाल कवि बैरागी का धर्मनगरी से गहरा रिश्ता था। वह दर्जनों बार हरिद्वार आए। उन्होंने यहां अनेक काव्य संध्याओं, साहित्यिक सभाओं तथा शिक्षण संस्थानों के कार्यक्रमों में शिरकत की।
बाल कवि बैरागी जब भी हरिद्वार आते, वे वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार डा. कमलकांत बुधकर के निवास पर ठहरते थे। उनके निवास पर ही अनेक बार लघु गोष्ठियों का आयोजन किया गया। यद्यपि वैरागी देश के जाने-माने नेता और पूर्व मंत्री भी थे, लेकिन उन्होंने हरिद्वार के किसी भी राजनीतिक कार्यक्रमों में भाग नहीं लिया। जब उन्हें आमंत्रित किया जाता तो वे प्राय: कह देते कि वे हरिद्वार में राजनीति करने नहीं आते। वे तो गंगा दर्शन करने आते हैं और साहित्यिक लोगों के साथ बैठना चाहते हैं। बैरागी ने कईं बार कुंभ मेलों के विशाल सम्मेलनों में भाग लिया। जो रचनाएं वे हरिद्वार में सुनाते थे, उनका संबंध मां गंगा अधिक होता था। यद्यपि कभी-कभी वे व्यंग भी खूब सुनाते थे। बैरागी हर की पैडी के गंगा तट पर घंटों बैठे रहते। हरिद्वार में भारतीय संवाद परिषद द्वारा बड़े पैमाने पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय कार्टूनिस्ट स्व. काक की प्रदर्शिनी का उद्धाटन करने तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष डा. बलराम जाखड़ के साथ यहां पहुंचे थे। उन्होंने प्रेस क्लब और संवाद परिषद के अनेक कार्यक्रमों में भाग लिया। जर्मनी से आए सुप्रसिद्ध हिंदी विद्वान डा. इंदु प्रकाश पांडे के ग्रंथों के लोकार्पण में मुख्य अतिथि की भूमिका निभाई।
हरिद्वार में कोई भी ऐसा कवि सम्मेलन नहीं हुआ जो बैरागी के बगैर संभव हो गया हो। वे प्राय: कहते थे कि यदि हरिद्वार में कोई कवि सम्मेलन हुआ और वे अमेरिका में भी हुए तो भी यात्रा छोड़कर आ जाएंगे। गंगा तट का कोई भी साहित्यिक समारोह वे छोड़ना नहीं चाहते थे। भेल राजभाषा विभाग और हरिद्वार में कुंभ के अवसरों पर होने वाले आयोजनों में वे मुख्य अतिथि रहते थे। उनके निधन की सूचना मिलने पर वरिष्ठ साहित्यकार डा. विष्णुदत्त राकेश, डा. कमलकांत बुधकर, प्रेस क्लब अध्यक्ष डा. शिवशंकर जयसवाल, महामंत्री ललितनेंद्र नाथ, प्रो. पीएस चौहान, कवि रमेश रमन, कवि डॉ. मेनका त्रिपाठी आदि ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उनकी अस्थियां कुछ दिनों बाद हरिद्वार आएंगी।
हरिद्वार।
विख्यात कवि और पूर्व सांसद बाल कवि बैरागी का धर्मनगरी से गहरा रिश्ता था। वह दर्जनों बार हरिद्वार आए। उन्होंने यहां अनेक काव्य संध्याओं, साहित्यिक सभाओं तथा शिक्षण संस्थानों के कार्यक्रमों में शिरकत की।
बाल कवि बैरागी जब भी हरिद्वार आते, वे वरिष्ठ साहित्यकार और पत्रकार डा. कमलकांत बुधकर के निवास पर ठहरते थे। उनके निवास पर ही अनेक बार लघु गोष्ठियों का आयोजन किया गया। यद्यपि वैरागी देश के जाने-माने नेता और पूर्व मंत्री भी थे, लेकिन उन्होंने हरिद्वार के किसी भी राजनीतिक कार्यक्रमों में भाग नहीं लिया। जब उन्हें आमंत्रित किया जाता तो वे प्राय: कह देते कि वे हरिद्वार में राजनीति करने नहीं आते। वे तो गंगा दर्शन करने आते हैं और साहित्यिक लोगों के साथ बैठना चाहते हैं। बैरागी ने कईं बार कुंभ मेलों के विशाल सम्मेलनों में भाग लिया। जो रचनाएं वे हरिद्वार में सुनाते थे, उनका संबंध मां गंगा अधिक होता था। यद्यपि कभी-कभी वे व्यंग भी खूब सुनाते थे। बैरागी हर की पैडी के गंगा तट पर घंटों बैठे रहते। हरिद्वार में भारतीय संवाद परिषद द्वारा बड़े पैमाने पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय कार्टूनिस्ट स्व. काक की प्रदर्शिनी का उद्धाटन करने तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष डा. बलराम जाखड़ के साथ यहां पहुंचे थे। उन्होंने प्रेस क्लब और संवाद परिषद के अनेक कार्यक्रमों में भाग लिया। जर्मनी से आए सुप्रसिद्ध हिंदी विद्वान डा. इंदु प्रकाश पांडे के ग्रंथों के लोकार्पण में मुख्य अतिथि की भूमिका निभाई।
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हरिद्वार में कोई भी ऐसा कवि सम्मेलन नहीं हुआ जो बैरागी के बगैर संभव हो गया हो। वे प्राय: कहते थे कि यदि हरिद्वार में कोई कवि सम्मेलन हुआ और वे अमेरिका में भी हुए तो भी यात्रा छोड़कर आ जाएंगे। गंगा तट का कोई भी साहित्यिक समारोह वे छोड़ना नहीं चाहते थे। भेल राजभाषा विभाग और हरिद्वार में कुंभ के अवसरों पर होने वाले आयोजनों में वे मुख्य अतिथि रहते थे। उनके निधन की सूचना मिलने पर वरिष्ठ साहित्यकार डा. विष्णुदत्त राकेश, डा. कमलकांत बुधकर, प्रेस क्लब अध्यक्ष डा. शिवशंकर जयसवाल, महामंत्री ललितनेंद्र नाथ, प्रो. पीएस चौहान, कवि रमेश रमन, कवि डॉ. मेनका त्रिपाठी आदि ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उनकी अस्थियां कुछ दिनों बाद हरिद्वार आएंगी।
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