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नगर निगम और एचआरडीए में सहमति से बनी आईएसबीटी की योजना
Updated Mon, 12 Mar 2018 12:28 AM IST
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हरिद्वार। शहरवासियों को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए वर्तमान रोडवेज डिपो में वाहन पार्किंग व शॉपिंग कांपलेक्स और अंतरराज्यीय बस अड्डा (आईएसबीटी) शहर से बाहर ट्रांसपोर्ट नगर में बनाने के लिए ऊपर से नीचे तक अधिकारियों से सहमति ली गई। इस पर मेयर मनोज गर्ग का यह कहना किसी के गले नहीं उतर रहा है कि नगर निगम ने इसके लिए सहमति नहीं दी है।
नगर निगम और एचआरडीए में सहमति के बाद ही अंतरराज्यीय बस अड्डा (आईएसबीटी) ट्रांसपोर्ट नगर में बनाने की योजना बनाई गई है। सबकी सहमति पर दोनों योजनाओं की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का काम वाप्कोस लिमिटेड को सौंपा गया। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सीधे इससे सीधे जुड़े हुए हैं। पांच जुलाई को विभागीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने ही हरिद्वार में आईएसबीटी का निर्माण कार्य शहर से बाहर करने का निर्देश दिया था। इसके लिए शहर में आए दिन लगने वाले जाम और लक्खी स्नान पर स्थानीय लोगों के घरों में कैद होने के तर्क दिए गए थे। इसके बाद इसके लिए 27 जुलाई को प्राधिकरण की 63वीं बोर्ड बैठक हुई। इसमें ही आईएसबीटी का निर्माण ट्रांसपोर्ट नगर सराय ज्वालापुर कराने का प्रस्ताव पारित किया गया। जाहिर है कि प्राधिकरण बोर्ड में राज्य सरकार के कई विभागों के सचिव स्तर के अधिकारियों के साथ-साथ जिलाधिकारी और नगर निगम का एक अधिकारी सदस्य होते हैं। इस बैठक की अध्यक्षता कमिश्नर गढ़वाल करते हैं। इसलिए मेयर मनोज गर्ग का यह कहना सही नहीं है कि नगर निगम ने इन योजनाओं पर सहमति ही नहीं दी है। बताया जा रहा है कि मेयर के इस बयान के पीछे हित छिपा हुआ है। वर्तमान बस अड्डे को शिफ्ट करने के विरोध में कांग्रेस व व्यापार मंडलों के कुछ धड़े धरने-प्रदर्शन कर रहे हैं। बिखरी हुई कांग्रेस इन धरने प्रदर्शनों के सहारे खड़े होने की कोशिश कर रही है और निकाय चुनाव में इसका लाभ लेना उठानी चाहती है, लेकिन मेयर ऐसे बयान देकर इन धरने प्रदर्शनों की हवा निकालने चाहते हैं। हालांकि भाजपा की ओर से अधिकृत रूप में इस संबंध में कोई बयान नहीं आया है, लेकिन कांग्रेस के इन धरने व प्रदर्शनों की अनदेखी भाजपा, खासकर शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक नहीं कर सकते। इसीलिए हो सकता है मेयर को आगे कर इस प्रकार का बयान दिलाया गया कि निगम ने बस अड्डा शिफ्ट करने को सहमति ही नहीं दी है।
इनसेट
कांग्रेस कर रही योजनाओं का विरोध
इस संबंध में रविवार को मेयर मनोज गर्ग ने कांग्रेेस पर निशाना साधा। कहा कि कांग्रेस विकास योजनाओं का विरोध कर रही हैं। आरोपित किया कि वर्तमान बस अड्डे के पास जमीन पर एक कांग्रेस नेता का कब्जा है। वही नेता और उसके समर्थक इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विकास योजनाएं बनाना प्राधिकरण का काम है और वह अपना काम कर रहा है। जब रोडमैप तैयार हो जाएगा तब सरकार के स्तर से निर्णय लिया जाएगा। जो भी विकास योजनाएं बनेंगी उसमें एचआरडीए के साथ नगर निगम की भागीदारी (पार्टनरशिप) होगी।
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नगर निगम और एचआरडीए में सहमति के बाद ही अंतरराज्यीय बस अड्डा (आईएसबीटी) ट्रांसपोर्ट नगर में बनाने की योजना बनाई गई है। सबकी सहमति पर दोनों योजनाओं की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने का काम वाप्कोस लिमिटेड को सौंपा गया। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सीधे इससे सीधे जुड़े हुए हैं। पांच जुलाई को विभागीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने ही हरिद्वार में आईएसबीटी का निर्माण कार्य शहर से बाहर करने का निर्देश दिया था। इसके लिए शहर में आए दिन लगने वाले जाम और लक्खी स्नान पर स्थानीय लोगों के घरों में कैद होने के तर्क दिए गए थे। इसके बाद इसके लिए 27 जुलाई को प्राधिकरण की 63वीं बोर्ड बैठक हुई। इसमें ही आईएसबीटी का निर्माण ट्रांसपोर्ट नगर सराय ज्वालापुर कराने का प्रस्ताव पारित किया गया। जाहिर है कि प्राधिकरण बोर्ड में राज्य सरकार के कई विभागों के सचिव स्तर के अधिकारियों के साथ-साथ जिलाधिकारी और नगर निगम का एक अधिकारी सदस्य होते हैं। इस बैठक की अध्यक्षता कमिश्नर गढ़वाल करते हैं। इसलिए मेयर मनोज गर्ग का यह कहना सही नहीं है कि नगर निगम ने इन योजनाओं पर सहमति ही नहीं दी है। बताया जा रहा है कि मेयर के इस बयान के पीछे हित छिपा हुआ है। वर्तमान बस अड्डे को शिफ्ट करने के विरोध में कांग्रेस व व्यापार मंडलों के कुछ धड़े धरने-प्रदर्शन कर रहे हैं। बिखरी हुई कांग्रेस इन धरने प्रदर्शनों के सहारे खड़े होने की कोशिश कर रही है और निकाय चुनाव में इसका लाभ लेना उठानी चाहती है, लेकिन मेयर ऐसे बयान देकर इन धरने प्रदर्शनों की हवा निकालने चाहते हैं। हालांकि भाजपा की ओर से अधिकृत रूप में इस संबंध में कोई बयान नहीं आया है, लेकिन कांग्रेस के इन धरने व प्रदर्शनों की अनदेखी भाजपा, खासकर शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक नहीं कर सकते। इसीलिए हो सकता है मेयर को आगे कर इस प्रकार का बयान दिलाया गया कि निगम ने बस अड्डा शिफ्ट करने को सहमति ही नहीं दी है।
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कांग्रेस कर रही योजनाओं का विरोध
इस संबंध में रविवार को मेयर मनोज गर्ग ने कांग्रेेस पर निशाना साधा। कहा कि कांग्रेस विकास योजनाओं का विरोध कर रही हैं। आरोपित किया कि वर्तमान बस अड्डे के पास जमीन पर एक कांग्रेस नेता का कब्जा है। वही नेता और उसके समर्थक इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विकास योजनाएं बनाना प्राधिकरण का काम है और वह अपना काम कर रहा है। जब रोडमैप तैयार हो जाएगा तब सरकार के स्तर से निर्णय लिया जाएगा। जो भी विकास योजनाएं बनेंगी उसमें एचआरडीए के साथ नगर निगम की भागीदारी (पार्टनरशिप) होगी।
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