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शंकराचार्य के दर्शन पर दीनदयाल का दर्शन थोपने की कोशिश
Updated Sun, 28 Jan 2018 11:49 PM IST
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हरिद्वार। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि आदि शंकराचार्य भगवान के स्वरूप हैं। उनके दर्शन पर दीनदयाल उपाध्याय का दर्शन थोपने की कोशिशों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। धर्म से छेड़छाड़ करने का कोई प्रयास सरकारों को नहीं करना चाहिए।
कनखल के शंकराचार्य मठ से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्वामी स्वरूपानंद का बयान जारी किया। प्रेस का जारी बयान में उन्होंने कहा कि ऐसा प्रयास मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार की ओर से किया गया है। यह शंकराचार्य के नाम पर छल है। मध्य प्रदेश सरकार की विशाल प्रतिमा स्थापना का शोर तो मचा रही है, लेकिन दर्शन दीनदयाल का बखान कर रही है। शंकराचार्य के गुरु की उपेक्षा करने की कोशिश भी नहीं की जानी चाहिए। आदि शंकराचार्य के गुरु गोविंद पादाचार्य को सामान्य गुरु नहीं थे। वे तो शेषनाग के अवतार भगवान पतंजलि का संन्यासी स्वरूप थे। भगवान पतंजलि ने पातंजल योग दर्शन की रचना और व्याकरण महाभाष्य की रचना द्वारा पूरे विश्व पर महान उपकार किया है। शंकर दिग्विजय ग्रंथ के अनुसार भवगान शंकराचार्य ने गोविंद पादाचार्य की वंदना मध्य प्रदेश में ही की थी। उनके सिद्धांतों को किसी दूसरे के सिद्धांतों के साथ परोसना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानववाद बौद्धिक छल है। इसे आदि शंकराचार्य के सिद्धांतों से मिलाया नहीं जा सकता। यदि मध्य प्रदेश जैसी सरकारों से देश में अन्यत्र भी ऐसी कोशिश की तो धर्म जगत उसका विरोध करेगा।
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कनखल के शंकराचार्य मठ से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्वामी स्वरूपानंद का बयान जारी किया। प्रेस का जारी बयान में उन्होंने कहा कि ऐसा प्रयास मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार की ओर से किया गया है। यह शंकराचार्य के नाम पर छल है। मध्य प्रदेश सरकार की विशाल प्रतिमा स्थापना का शोर तो मचा रही है, लेकिन दर्शन दीनदयाल का बखान कर रही है। शंकराचार्य के गुरु की उपेक्षा करने की कोशिश भी नहीं की जानी चाहिए। आदि शंकराचार्य के गुरु गोविंद पादाचार्य को सामान्य गुरु नहीं थे। वे तो शेषनाग के अवतार भगवान पतंजलि का संन्यासी स्वरूप थे। भगवान पतंजलि ने पातंजल योग दर्शन की रचना और व्याकरण महाभाष्य की रचना द्वारा पूरे विश्व पर महान उपकार किया है। शंकर दिग्विजय ग्रंथ के अनुसार भवगान शंकराचार्य ने गोविंद पादाचार्य की वंदना मध्य प्रदेश में ही की थी। उनके सिद्धांतों को किसी दूसरे के सिद्धांतों के साथ परोसना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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जगद्गुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानववाद बौद्धिक छल है। इसे आदि शंकराचार्य के सिद्धांतों से मिलाया नहीं जा सकता। यदि मध्य प्रदेश जैसी सरकारों से देश में अन्यत्र भी ऐसी कोशिश की तो धर्म जगत उसका विरोध करेगा।
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