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केंद्र में जनमत की नहीं ईवीएम की सरकार
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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
गंगा की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाली संस्था मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने केंद्र में नई बनी मोदी सरकार को लेकर गंभीर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि जिसे प्रचंड बहुमत की सरकार बताया जा रहा है वह जनमत की नहीं बल्कि ईवीएम से चुनी गई सरकार है। इस सरकार की जीत पर संदेह है, ऐसे में मोदी सरकार को इस्तीफा देते हुए दोबारा जनमत हासिल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्पष्ट नीयत से सत्ता अगर हासिल नहीं की गई तो ऐसे में भविष्य में जनता को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं।
मातृसदन परिसर में ब्रह्मचारी निगमानंद सरस्वती के बलिदान दिवस पर बृहस्पतिवार को आयोजित श्रद्धांजलि समारोह के दौरान मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनी मौजूदा सरकार का जनमत स्पष्ट नहीं है। यह पूरी तरह ईवीएम के जरिये समर्थन हासिल की हुई सरकार है। उन्होंने कहा कि मतगणना वाले दिन तक भी कहीं से यह संकेत नहीं मिल रहा था कि मोदी सरकार वापस लौट रही है, जबकि इससे पहले मोदी लहर का असर 2014 में था फिर कैसे इतनी सीटें मिल गई। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनावों के एक सप्ताह बाद ही कर्नाटक के स्थानीय चुनाव हुए। इसमें बैलेट से वोट डाले गए और वहां बीजेपी का सफाया हो गया। एक सप्ताह में ही जनता का मन बदल नहीं सकता। उन्होंने कहा कि गंगा के लिए संघर्ष करते हुए मातृसदन की लड़ाई राज्य के मुख्यमंत्रियों से होती थी, लेकिन इस बार चूंकि 194 दिन तक लंबा अनशन करने वाले ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने अपना अनशन इस आश्वासन पर रोका था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद भी अनशन को समाप्त कराना चाहते हैं। लिखित आश्वासन देने के बाद भी मांग नहीं मानी गई। इसलिए उनकी लड़ाई इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ही सीधी होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनेता, अफसर और माफिया की त्रिकोण गंगा के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदायक है।
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गंगा की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाली संस्था मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने केंद्र में नई बनी मोदी सरकार को लेकर गंभीर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि जिसे प्रचंड बहुमत की सरकार बताया जा रहा है वह जनमत की नहीं बल्कि ईवीएम से चुनी गई सरकार है। इस सरकार की जीत पर संदेह है, ऐसे में मोदी सरकार को इस्तीफा देते हुए दोबारा जनमत हासिल करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्पष्ट नीयत से सत्ता अगर हासिल नहीं की गई तो ऐसे में भविष्य में जनता को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं।
मातृसदन परिसर में ब्रह्मचारी निगमानंद सरस्वती के बलिदान दिवस पर बृहस्पतिवार को आयोजित श्रद्धांजलि समारोह के दौरान मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनी मौजूदा सरकार का जनमत स्पष्ट नहीं है। यह पूरी तरह ईवीएम के जरिये समर्थन हासिल की हुई सरकार है। उन्होंने कहा कि मतगणना वाले दिन तक भी कहीं से यह संकेत नहीं मिल रहा था कि मोदी सरकार वापस लौट रही है, जबकि इससे पहले मोदी लहर का असर 2014 में था फिर कैसे इतनी सीटें मिल गई। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनावों के एक सप्ताह बाद ही कर्नाटक के स्थानीय चुनाव हुए। इसमें बैलेट से वोट डाले गए और वहां बीजेपी का सफाया हो गया। एक सप्ताह में ही जनता का मन बदल नहीं सकता। उन्होंने कहा कि गंगा के लिए संघर्ष करते हुए मातृसदन की लड़ाई राज्य के मुख्यमंत्रियों से होती थी, लेकिन इस बार चूंकि 194 दिन तक लंबा अनशन करने वाले ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने अपना अनशन इस आश्वासन पर रोका था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद भी अनशन को समाप्त कराना चाहते हैं। लिखित आश्वासन देने के बाद भी मांग नहीं मानी गई। इसलिए उनकी लड़ाई इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ही सीधी होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनेता, अफसर और माफिया की त्रिकोण गंगा के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदायक है।
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