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जनवादी कवि समीर वरण नंदी नहीं रहे

Sun, 25 Mar 2018 11:52 PM IST
Updated Sun, 25 Mar 2018 11:52 PM IST
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जनवादी कवि समीर वरण नंदी नहीं रहे
हरिद्वार। प्रसिद्ध जनवादी कवि समीर वरण नंदी का आज सवेरे हृदय गति रुक जाने से कोलकाता में निधन हो गया। वे 70 वर्ष के थे।
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समीर वरण नंदी हरिद्वार के भेल में शिक्षक कवि के रूप में प्रसिद्ध हुए थे। जेएनयू में शिक्षा ग्रहण करने के कारण उनका रुझान आरंभ से ही वामपंथी साहित्य की ओर था। विख्यात कवि त्रिलोचन शास्त्री के साथ उन्होंने वर्षों काम किया। समीर वरण नंदी का गहरा नाता कविता से रहा। हाल ही में उन्होंने अपनी ताजा पुस्तक का विमोचन कराया था। नंदी ने दर्जनों काव्य पुस्तकों की रचना की। हरिद्वार के ही नहीं पूरे उत्तर भारत के काव्य जगत में उनका नाम था। उन्होंने अनेक बौद्धिकों पर दशकों काम किया। करीब छह माह पूर्व उनकी शिक्षाविद् पत्नी ज्योति नंदी का निधन होने के बाद वे टूट गए थे। इन दिनों वे कोलकता में अपनी बहन के पास गए हुए थे। एक सप्ताह पहले उन्हें ब्रेन स्ट्रोक का सामना करना पड़ा। रविवार सुबह सात बजे हृदय गति रुक जाने से दम तोड़ दिया। दिल्ली में कार्यरत उनके एक मात्र पुत्र सोनी पाखी ने कोलकाता पहुंचकर अंतिम कर्म संपन्न कराया। हरिद्वार में साहित्यकार डॉ. अजित, कुमार बृजेंद्र हर्ष, कवि रमेश रमन आदि ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
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