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पैदल ही कैसे तस्करों को काबू करे आबकारी विभाग

Mon, 11 Feb 2019 11:49 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 11 Feb 2019 11:49 PM IST
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पैदल ही कैसे तस्करों को काबू करे आबकारी विभाग
हरिद्वार। भगवानपुर तहसील के गांवों में जहरीली शराब पीने से हुई कई लोगों की मौत के बाद शासन के निशाने पर आए आबकारी विभाग के अधिकारी अब संसाधनों के अभावों को रोना रो रहे हैं। शासन की ओर से तलब की गई रिपोर्ट में विभाग ने संसाधनों की भारी कमी का भी उल्लेख किया है। खास बात यह है कि जिला आबकारी अधिकारी और तीनों निरीक्षकों में से किसी के पास सरकारी वाहन तक नहीं।
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जिले में आबकारी विभाग का रोशनाबाद स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में जिला आबकारी अधिकारी का कार्यालय है। हरिद्वार, लक्सर और रुड़की में आबकारी निरीक्षकों के कार्यालय हैं। साथ ही चिड़ियापुर, नारसन और भगवानपुर क्षेत्र में चेक पोस्ट बनाए गए हैं, लेकिन राज्य सरकार के लिए सबसे ज्यादा राजस्व जुटाने वाले इस विभाग के पास संसाधनों की भारी कमी है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि न तो जिला आबकारी अधिकारी के पास सरकारी वाहन है और न ही तीनों सर्किलों के कार्यालय में इंस्पेक्टरों के पास। शराब के खिलाफ चलने वाले अभियान के दौरान इन अधिकारियों को अपने निजी वाहनों से काम चलाना पडता है। जिला आबकारी अधिकारी प्रशांत कुमार ने बताया कि कई बार उच्च अधिकारियों को इस बारे में रिपोर्ट भेजी गई। साथ ही सभी सर्किलों में कर्मचारियों की भी भारी कमी को देखते हुए उनके स्थान पर अतिरिक्त तैनाती करने की भी मांग की गई है, लेकिन अभी तक इस बारे में कार्यवाही नहीं हो सकी है। इस घटना के बाद भी शासन को स्मरण पत्र भेजे गए हैं। जिलाधिकारी दीपक रावत ने बताया कि आबकारी अधिकारी कार्यालय से भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर शासन को पत्र भेजा गया है जिसमें विभाग को संसाधन उपलब्ध कराने की संस्तुति की गई है।
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अधिकारी हैं पर हरिद्वार में नहीं बैठते
जहरीली शराब कांड के बाद पता किया जाता रहा कि हरिद्वार में उप आबकारी आयुक्त के पद पर भी तैनाती है, लेकिन वे हैं कहां। पता चला कि उप आबकारी आयुक्त के पास देहरादून का भी चार्ज है। इसलिए वे देहरादून ही बैठते हैं। इस संबंध में जब जिलाधिकारी दीपक रावत से जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले उन्हें इस बारे में जानकारी मिली थी। तब उन्होंने पता कराया था तो बताया गया था कि उप आयुक्त मेडिकल लीव पर चल रहे हैं। अब शासन को पत्र लिखा गया है कि विभाग की कार्य प्रणाली को दुरुस्त करने के लिए उप आबकारी आयुक्त को हरिद्वार में ही नियमित रूप से बैठाने की व्यवस्था की जाए।
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