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विधानसभा की जांच समिति ने अधिकारियों से जुटाए तथ्य
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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
जहरीली कच्ची शराब कांड की जांच के लिए गठित विधानसभा की जांच समिति ने सोमवार को मेला नियंत्रण कक्ष में प्रशासन, पुलिस और आबकारी विभाग के अधिकारियों से प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई की जानकारी ली। समिति 21 फरवरी तक अपनी जांच रिपोर्ट विधानसभा में पेश करेगी। हालांकि समिति के सदस्यों ने इस दौरान सामने आए तथ्यों के बारे में तो कुछ नहीं बताया कि अलबत्ता सूत्रों जानकारी दी कि समिति जिला प्रशासन की ओर से उठाए गए कदमों से असंतुष्ट दिखी। खासतौर पर जिला प्रशासन और आबकारी विभाग के अधिकारी समिति के सदस्यों के निशाने पर रहे।
विधायक खजान दास की अध्यक्षता में गठित सात सदस्यीय समिति ने रविवार को जहरीली शराब कांड के प्रभावित गांवों का दौरा कर लोगों से घटना के संबंध में जानकारी जुटाई थी। इस दौरान लोगों ने प्रशासन की ओर से समय से समुचित कार्रवाई न करने, इलाज में लापरवाही और आमजन के हताहत होने से पहले कच्ची शराब की बिक्री की रोकथाम करने के बारे में समुचित कदम न उठाने के आरोप लगाए थे। जांच कार्रवाई के दूसरे चरण में सोमवार को समिति के सदस्य सुबह दस बजे ही मेला नियंत्रण कक्ष में पहुंचे, जहां उन्होंने जिला प्रशासन, पुलिस, आबकारी और स्वास्थ्य विभाग समेत अन्य अधिकारियों से सवाल जवाब किए। इस दौरान आबकारी विभाग की ओर से पिछले तीन सालों में कच्ची शराब के खिलाफ की गई कार्रवाई के आंकड़े प्रस्तुत किए, साथ ही जहरीली शराब कांड सामने आने पर उठाए गए कदमों की भी जानकारी दी। लेकिन समिति के अधिकतर सदस्य उनके तर्कों से सहमत नहीं थे। दो सदस्यों ने तो आबकारी विभाग के क्रियाकलाप और सुस्ती को लेकर कड़ी नाराजगी भी जताई। समिति के सदस्यों ने जानना चाहा कि जिला प्रशासन के अधिकारी घटना सामने आने के बाद किस समय मौके पर पहुंचे और कितने समय तक वहां रहे। अस्पताल में कितने मरीजों का हाल जाना और क्या क्या कदम उठाए गए। गांवों में जांच के दौरान ग्रामीणों की ओर से लगाए गए इलाज में लापरवाही बरतने के संबंध में लगाए गए आरोपों के बारे में सीएमओ से भी सवाल जवाब किए गए। सभी अधिकारियों का पक्ष जानने के बाद समिति के सदस्य देहरादून रवाना हो गए।
समिति के अध्यक्ष खजान दास ने बताया कि 21 फरवरी को समिति अपनी जांच रिपोर्ट विधानसभा में प्रस्तुत करेगी। उन्होंने बताया कि पूरी जांच की वीडियोग्राफी कराई गई है। सभी तथ्यों का अध्ययन किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने स्वीकारा कि प्रशासन के विभिन्न विभागों की ओर से इतना बड़ा मामला सामने नहीं आने के बाद भी प्रभावी कदम नहीं उठाए। इस दौरान समिति के सदस्य देशराज कर्णवाल, सुरेश राठौर, ममता राकेश, शक्ति लाल शाह, राजकुमार और मुकेश कोली आदि विधायक शामिल रहे जबकि एसएसपी जन्मेजय प्रभाकर खंडूड़ी, एसपी देहात नवनीत सिंह, सीओ मंगलौर डीएस रावत, जिला प्रशासन की ओर से सीडीओ विनीत तोमर, एडीएम ललित नारायण मिश्रा, सीएमओ प्रेमलाल, आबकारी आयुक्त बीएस चौहान, निलंबित किए गए हरिद्वार के तत्कालीन आबकारी अधिकारी प्रशांत कुमार, नवागत जिला आबकारी अधिकारी एके मिश्रा आदि अधिकारी मौजूद रहे। जबकि डीएम दीपक रावत नई दिल्ली में सोमवार को मंडी समिति के ई नेम चैप्टर की कार्यशाला में शामिल होने के चलते बैठक में मौजूद नहीं हो सके।
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जहरीली कच्ची शराब कांड की जांच के लिए गठित विधानसभा की जांच समिति ने सोमवार को मेला नियंत्रण कक्ष में प्रशासन, पुलिस और आबकारी विभाग के अधिकारियों से प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई की जानकारी ली। समिति 21 फरवरी तक अपनी जांच रिपोर्ट विधानसभा में पेश करेगी। हालांकि समिति के सदस्यों ने इस दौरान सामने आए तथ्यों के बारे में तो कुछ नहीं बताया कि अलबत्ता सूत्रों जानकारी दी कि समिति जिला प्रशासन की ओर से उठाए गए कदमों से असंतुष्ट दिखी। खासतौर पर जिला प्रशासन और आबकारी विभाग के अधिकारी समिति के सदस्यों के निशाने पर रहे।
विधायक खजान दास की अध्यक्षता में गठित सात सदस्यीय समिति ने रविवार को जहरीली शराब कांड के प्रभावित गांवों का दौरा कर लोगों से घटना के संबंध में जानकारी जुटाई थी। इस दौरान लोगों ने प्रशासन की ओर से समय से समुचित कार्रवाई न करने, इलाज में लापरवाही और आमजन के हताहत होने से पहले कच्ची शराब की बिक्री की रोकथाम करने के बारे में समुचित कदम न उठाने के आरोप लगाए थे। जांच कार्रवाई के दूसरे चरण में सोमवार को समिति के सदस्य सुबह दस बजे ही मेला नियंत्रण कक्ष में पहुंचे, जहां उन्होंने जिला प्रशासन, पुलिस, आबकारी और स्वास्थ्य विभाग समेत अन्य अधिकारियों से सवाल जवाब किए। इस दौरान आबकारी विभाग की ओर से पिछले तीन सालों में कच्ची शराब के खिलाफ की गई कार्रवाई के आंकड़े प्रस्तुत किए, साथ ही जहरीली शराब कांड सामने आने पर उठाए गए कदमों की भी जानकारी दी। लेकिन समिति के अधिकतर सदस्य उनके तर्कों से सहमत नहीं थे। दो सदस्यों ने तो आबकारी विभाग के क्रियाकलाप और सुस्ती को लेकर कड़ी नाराजगी भी जताई। समिति के सदस्यों ने जानना चाहा कि जिला प्रशासन के अधिकारी घटना सामने आने के बाद किस समय मौके पर पहुंचे और कितने समय तक वहां रहे। अस्पताल में कितने मरीजों का हाल जाना और क्या क्या कदम उठाए गए। गांवों में जांच के दौरान ग्रामीणों की ओर से लगाए गए इलाज में लापरवाही बरतने के संबंध में लगाए गए आरोपों के बारे में सीएमओ से भी सवाल जवाब किए गए। सभी अधिकारियों का पक्ष जानने के बाद समिति के सदस्य देहरादून रवाना हो गए।
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समिति के अध्यक्ष खजान दास ने बताया कि 21 फरवरी को समिति अपनी जांच रिपोर्ट विधानसभा में प्रस्तुत करेगी। उन्होंने बताया कि पूरी जांच की वीडियोग्राफी कराई गई है। सभी तथ्यों का अध्ययन किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने स्वीकारा कि प्रशासन के विभिन्न विभागों की ओर से इतना बड़ा मामला सामने नहीं आने के बाद भी प्रभावी कदम नहीं उठाए। इस दौरान समिति के सदस्य देशराज कर्णवाल, सुरेश राठौर, ममता राकेश, शक्ति लाल शाह, राजकुमार और मुकेश कोली आदि विधायक शामिल रहे जबकि एसएसपी जन्मेजय प्रभाकर खंडूड़ी, एसपी देहात नवनीत सिंह, सीओ मंगलौर डीएस रावत, जिला प्रशासन की ओर से सीडीओ विनीत तोमर, एडीएम ललित नारायण मिश्रा, सीएमओ प्रेमलाल, आबकारी आयुक्त बीएस चौहान, निलंबित किए गए हरिद्वार के तत्कालीन आबकारी अधिकारी प्रशांत कुमार, नवागत जिला आबकारी अधिकारी एके मिश्रा आदि अधिकारी मौजूद रहे। जबकि डीएम दीपक रावत नई दिल्ली में सोमवार को मंडी समिति के ई नेम चैप्टर की कार्यशाला में शामिल होने के चलते बैठक में मौजूद नहीं हो सके।
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