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सरस्वती पूजा के साथ श्रद्धापूर्वक मनी वसंत पंचमी
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सरस्वती पूजा
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ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
वसंत पंचमी का पर्व धर्मनगरी और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धापूर्वक मनाया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई और विभिन्न घाटों पर कई संस्कार कराए। युवाओं ने जमकर पतंगबाजी की।
रविवार को हर जगह वसंत पंचमी का उल्लास नजर आया। लोगों ने घरों में मां सरस्वती की पूजा का सामूहिक आयोजन किया। वसंत का स्वागत करते हुए पीले वस्त्र पहने और घरों में पीले दाल-चावल श्रीखंड के साथ बनाए गए। कई घरों में पीले पकवान भी तैयार किए गए। पर्वतीय अंचलों से आए श्रद्धालुओं ने कुशावर्त घाट पर गंगा स्नान कर अनेक प्रकार के देव संस्कार संपंन कराए। उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल से आए श्रद्धालुओं ने कुशावर्त घाट पर यज्ञोपवीत, मुंडन, कर्णछेदन संस्कार संपन्न कराए। इस संस्कारों को शुभारंभ उत्तरायणी आने पर मकर संक्रांति से होता है। वसंत पंचमी के दिन संस्कार कर्म संपन्न हो जाते हैं। कर्मकांड पर भी प्रयाग अर्द्धकुंभ का भारी असर दिखाई दिया। काफी कम संख्या में श्रद्धालु संस्कार और गंगा स्नान के लिए पहुंचे। वसंत पंचमी पर पंचपुरी में परंपरागत रूप से विद्या और संगीत की देवी वीणा वादिनी की पूजा अर्चना हुई। मंदिरों में भी सरस्वती की मूर्ति के आगे भोज लगाए गए। यह दिन विद्या आरंभ का भी दिन है, अत: परम्परा की निर्वहन करते हएु प्रतीकात्मक रूप से विद्याध्ययन किया गया।
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वसंत पंचमी का पर्व धर्मनगरी और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धापूर्वक मनाया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाई और विभिन्न घाटों पर कई संस्कार कराए। युवाओं ने जमकर पतंगबाजी की।
रविवार को हर जगह वसंत पंचमी का उल्लास नजर आया। लोगों ने घरों में मां सरस्वती की पूजा का सामूहिक आयोजन किया। वसंत का स्वागत करते हुए पीले वस्त्र पहने और घरों में पीले दाल-चावल श्रीखंड के साथ बनाए गए। कई घरों में पीले पकवान भी तैयार किए गए। पर्वतीय अंचलों से आए श्रद्धालुओं ने कुशावर्त घाट पर गंगा स्नान कर अनेक प्रकार के देव संस्कार संपंन कराए। उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल से आए श्रद्धालुओं ने कुशावर्त घाट पर यज्ञोपवीत, मुंडन, कर्णछेदन संस्कार संपन्न कराए। इस संस्कारों को शुभारंभ उत्तरायणी आने पर मकर संक्रांति से होता है। वसंत पंचमी के दिन संस्कार कर्म संपन्न हो जाते हैं। कर्मकांड पर भी प्रयाग अर्द्धकुंभ का भारी असर दिखाई दिया। काफी कम संख्या में श्रद्धालु संस्कार और गंगा स्नान के लिए पहुंचे। वसंत पंचमी पर पंचपुरी में परंपरागत रूप से विद्या और संगीत की देवी वीणा वादिनी की पूजा अर्चना हुई। मंदिरों में भी सरस्वती की मूर्ति के आगे भोज लगाए गए। यह दिन विद्या आरंभ का भी दिन है, अत: परम्परा की निर्वहन करते हएु प्रतीकात्मक रूप से विद्याध्ययन किया गया।
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