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बैंकों की उदासीनता पर फूटा डीएम का गुस्सा
Updated Wed, 27 Jun 2018 11:49 PM IST
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हरिद्वार। विकास की योजनाओं में बैंकों की ओर से सकारात्मक सहयोग नहीं मिलने और बैठक में बैंकों के अधिकारियों के पूरी तैयारी से नहीं आने के कारण जिलाधिकारी दीपक रावत का गुस्सा बुधवार को जिला स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक में फूट पड़ा। उन्होंने बैंकों के रवैये के प्रति गहरी नाराजगी जताते हुए बैठक बीच में ही छोड़ दी। उन्होंने कहा कि अब वे तभी बैठक करेंगे जब सारे बैंक अधिकारी उपस्थित होंगे।
बुधवार की शाम पंजाब नेशनल बैंक भेल के सभागार में जिला स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक बुुलाई गई थी। समिति के अध्यक्ष होने के कारण जिलाधिकारी हर तीन महीने में समिति की बैठक लेते हैं। जिलाधिकारी दीपक रावत बैठक में पहुंचे तो कई बैंकों के अधिकारी मौजूद नहीं थे। इसपर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताई। इसके बाद प्रधानमंत्री जनधन योजना, मुद्रा लोन योजना जीवन ज्योति बीमा योजना आदि की समीक्षा शुरू की तो पाया गया कि एक भी योजना का लक्ष्य पूरा नहीं था। उन्होंने कहा कि बैंकों के माध्यम से केंद्र सरकार की योजनाओं से लाभार्थियों को समयबद्ध अवधि में लाभान्वित किया जाना हमारा लक्ष्य है, लेकिन बैंक इन सभी कार्यों में रुचि नहीं ले रहे हैं। पहली बैठकों में भी कई अधिकारी नदारद थे। उन्होंने पिछली बैठक में अनुपस्थित रहे अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी तो वह भी उपलब्ध नहीं कराई जा सकी।
जिलाधिकारी ने कहा कि तीन माह में एक बार होने वाली समीक्षा में बैंक की ओर से सहयोग नहीं मिलने से योजनाओं का लाभ पात्रों को नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि बैंकों की शिकायत उच्च स्तर पर की जाएगी। बैठक में एचडीएफसी, बैंक ऑफ इडिया, बंधन बैंक, अल्मोड़ा कॉओपरेटिव बैंक, एसयूजी, इंडियन ओवरसीज बैंक, सेंट्रल बैंक, कोटक महिंद्रा आदि बैंकों के प्रतिनिधि अनुपस्थित रहे। लीड बैंक मैनेजर अनिल कुमार झा ने बताया कि तिमाही बैठक में जनपद के 35 बैंकों के पदाधिकारियों में से 5 छोटे बैंकों के अधिकारी नहीं पहुंचे। आरबीआई के प्रतिनिधि भी शामिल हुए थे। बैठक में पांच बैंकों के अधिकारियों के न पहुंचने पर जिलाधिकारी चले गए। अब अन्य क्या कारण रहा, इस संदर्भ में कुछ नहीं कहा जा सकता। अगली बैठक की तिथि जिलाधिकारी से मिलकर और उनके निर्देशानुसार शीघ्र ही तय की जाएगी।
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चाय पिलाने की बैठक नहीं
डीएम की नाराजगी का अंदाज उनके इस बयान से लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बैंक डीएलआरसी बैठक को चाय पीने और पिलाने की न समझें। बैंकों के माध्यम से जन कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर क्रियान्वित करना है
बुधवार की शाम पंजाब नेशनल बैंक भेल के सभागार में जिला स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक बुुलाई गई थी। समिति के अध्यक्ष होने के कारण जिलाधिकारी हर तीन महीने में समिति की बैठक लेते हैं। जिलाधिकारी दीपक रावत बैठक में पहुंचे तो कई बैंकों के अधिकारी मौजूद नहीं थे। इसपर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताई। इसके बाद प्रधानमंत्री जनधन योजना, मुद्रा लोन योजना जीवन ज्योति बीमा योजना आदि की समीक्षा शुरू की तो पाया गया कि एक भी योजना का लक्ष्य पूरा नहीं था। उन्होंने कहा कि बैंकों के माध्यम से केंद्र सरकार की योजनाओं से लाभार्थियों को समयबद्ध अवधि में लाभान्वित किया जाना हमारा लक्ष्य है, लेकिन बैंक इन सभी कार्यों में रुचि नहीं ले रहे हैं। पहली बैठकों में भी कई अधिकारी नदारद थे। उन्होंने पिछली बैठक में अनुपस्थित रहे अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी तो वह भी उपलब्ध नहीं कराई जा सकी।
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जिलाधिकारी ने कहा कि तीन माह में एक बार होने वाली समीक्षा में बैंक की ओर से सहयोग नहीं मिलने से योजनाओं का लाभ पात्रों को नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि बैंकों की शिकायत उच्च स्तर पर की जाएगी। बैठक में एचडीएफसी, बैंक ऑफ इडिया, बंधन बैंक, अल्मोड़ा कॉओपरेटिव बैंक, एसयूजी, इंडियन ओवरसीज बैंक, सेंट्रल बैंक, कोटक महिंद्रा आदि बैंकों के प्रतिनिधि अनुपस्थित रहे। लीड बैंक मैनेजर अनिल कुमार झा ने बताया कि तिमाही बैठक में जनपद के 35 बैंकों के पदाधिकारियों में से 5 छोटे बैंकों के अधिकारी नहीं पहुंचे। आरबीआई के प्रतिनिधि भी शामिल हुए थे। बैठक में पांच बैंकों के अधिकारियों के न पहुंचने पर जिलाधिकारी चले गए। अब अन्य क्या कारण रहा, इस संदर्भ में कुछ नहीं कहा जा सकता। अगली बैठक की तिथि जिलाधिकारी से मिलकर और उनके निर्देशानुसार शीघ्र ही तय की जाएगी।
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चाय पिलाने की बैठक नहीं
डीएम की नाराजगी का अंदाज उनके इस बयान से लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बैंक डीएलआरसी बैठक को चाय पीने और पिलाने की न समझें। बैंकों के माध्यम से जन कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर क्रियान्वित करना है