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शांति और सदभावना को बढ़ाएं: महाराज
Updated Thu, 12 Apr 2018 11:48 PM IST
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हरिद्वार।
आध्यात्मिक गुरु सतपाल महाराज ने कहा कि संकीर्णताओं का त्याग कर सबको समाज मेें शांति और सद्भावना बनाने के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मानवता सबसे बड़ा धर्म है, हम सभी को मानवता के विकास और प्रचार प्रसार के लिए काम करने की जरूरत है।
मानव उत्थान समिति की ओर से ऋषिकुल के मैदान में शुरू हुए तीन दिवसीय सद्भावना सम्मेलन में देश भर से आए हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने यह उद्गार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि धरती सभी के लिए बनी है। आकाश भी सभी का है। सूर्य की किरणों पर सभी का समान अधिकार है। अग्नि, जल और वायु ईश्वर की बनाई हुई चीजें किसी के साथ भेदभाव नहीं करती। भाईचारे और शांति का संदेश देते हुए सतपाल महाराज ने कहा कि हम सभी को एक दूसरे के काम आना चाहिए। यही मानवता का संदेश है। स्वार्थ का किनारे रख जब समरसता के लिए काम किया जाएगा। तभी मानवता का विस्तार हो सकेगा।
उन्होंने समाज में फैली विकृतियों पर चोट करते हुए कहा कि आज समाज में हर तरफ वैमनस्यता, आतंकवाद, हिंसा, भ्रष्टाचार और सांप्रदायिकता बड़ी तेजी से बढ़ रही है। कुछ लोग निजी स्वार्थ के चलते मानव को मानव से लड़ा रहे हैं। यह विसंगतियां मानव के दिमाग की ही उपज है। केवल कानून बनाकर या बाहरी संसाधनों से ही इन्हें दूर नहीं किया जा सकता। बल्कि इनका समन अध्यात्म के ज्ञान से किया जा सकता है। सतपाल महाराज ने कहा कि जब व्यक्ति के मन में शांति होगी तभी उसके परिवार, गांव, समाज और देश में भी शांति का माहौल बनेगा। उन्होंने कहा कि अध्यात्म की शक्ति हर व्यक्ति के अंदर छिपी है। जरूरत इस बात की है कि हम सब इसे पहचाने और आत्मबल को मजबूत करें। आत्मबल से ही सद्भावना का विकास होता है। दुर्भावना से आज तक किसी का भला नहीं हुआ। सम्मेलन में ं मानव सेवा उत्थान समिति के स्वंयसेवकों ने भजन कीर्तन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से भी शांति तथा सद्भावना का संदेश दिया। इस दौरान अमृता रावत, श्रद्धेय रावत, सुयश रावत, आराधय रावत समेत कई आध्यात्म गुरु और उत्तराखंड, यूपी, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली समेत विभिन्न राज्यों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु इस सम्मेलन में भाग ले रहे हैं।
आध्यात्मिक गुरु सतपाल महाराज ने कहा कि संकीर्णताओं का त्याग कर सबको समाज मेें शांति और सद्भावना बनाने के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मानवता सबसे बड़ा धर्म है, हम सभी को मानवता के विकास और प्रचार प्रसार के लिए काम करने की जरूरत है।
मानव उत्थान समिति की ओर से ऋषिकुल के मैदान में शुरू हुए तीन दिवसीय सद्भावना सम्मेलन में देश भर से आए हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने यह उद्गार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि धरती सभी के लिए बनी है। आकाश भी सभी का है। सूर्य की किरणों पर सभी का समान अधिकार है। अग्नि, जल और वायु ईश्वर की बनाई हुई चीजें किसी के साथ भेदभाव नहीं करती। भाईचारे और शांति का संदेश देते हुए सतपाल महाराज ने कहा कि हम सभी को एक दूसरे के काम आना चाहिए। यही मानवता का संदेश है। स्वार्थ का किनारे रख जब समरसता के लिए काम किया जाएगा। तभी मानवता का विस्तार हो सकेगा।
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उन्होंने समाज में फैली विकृतियों पर चोट करते हुए कहा कि आज समाज में हर तरफ वैमनस्यता, आतंकवाद, हिंसा, भ्रष्टाचार और सांप्रदायिकता बड़ी तेजी से बढ़ रही है। कुछ लोग निजी स्वार्थ के चलते मानव को मानव से लड़ा रहे हैं। यह विसंगतियां मानव के दिमाग की ही उपज है। केवल कानून बनाकर या बाहरी संसाधनों से ही इन्हें दूर नहीं किया जा सकता। बल्कि इनका समन अध्यात्म के ज्ञान से किया जा सकता है। सतपाल महाराज ने कहा कि जब व्यक्ति के मन में शांति होगी तभी उसके परिवार, गांव, समाज और देश में भी शांति का माहौल बनेगा। उन्होंने कहा कि अध्यात्म की शक्ति हर व्यक्ति के अंदर छिपी है। जरूरत इस बात की है कि हम सब इसे पहचाने और आत्मबल को मजबूत करें। आत्मबल से ही सद्भावना का विकास होता है। दुर्भावना से आज तक किसी का भला नहीं हुआ। सम्मेलन में ं मानव सेवा उत्थान समिति के स्वंयसेवकों ने भजन कीर्तन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से भी शांति तथा सद्भावना का संदेश दिया। इस दौरान अमृता रावत, श्रद्धेय रावत, सुयश रावत, आराधय रावत समेत कई आध्यात्म गुरु और उत्तराखंड, यूपी, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली समेत विभिन्न राज्यों से लाखों की संख्या में श्रद्धालु इस सम्मेलन में भाग ले रहे हैं।
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