{"_id":"5b33d51f4f1c1bf16e8ba2e6","slug":"11530123551-haridwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"दरके पुल की मरम्मत नहीं, भारी वाहनों को मुजफ्फरनगर से निकाला जाएगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दरके पुल की मरम्मत नहीं, भारी वाहनों को मुजफ्फरनगर से निकाला जाएगा
Updated Wed, 27 Jun 2018 11:49 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
श्यामपुर। सरकारी मशीनरी की लापरवाही की वजह से बरसात में एक बार फिर गढ़वाल से कुमाऊं की दूरी बढ़ जाएगी। इतना ही नहीं हरिद्वार से नजीबाबाद और कोटद्वार भी दूर हो जाएगा। इसकी वजह हरिद्वार-नजीबाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर कोटावाली नदी पर बने पुल की मरम्मत नहीं होना। इस जगह पर पिछले साल से नदी पर रपटा बनाकर वाहनों को गुजारा जा रहा है। अब बरसात में नदी में पानी बढ़ने पर रपटे से भी वाहन की आवाजाही बंद हो जाएगी और ट्रैफिक को वाया रुड़की-मुजफ्फरनगर-नजीबाबाद डायवर्ट किया जाएगा।
पिछले साल अगस्त महीने में भारी बारिश के बाद कोटावाली नदी में बाढ़ आ गई थी। नदी में पानी बढ़ने पर नदी पर बना पुल दरक गया था। दुर्घटना की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने पुल से वाहनों की आवाजाही बंद कर दी थी। देहरादून और हरिद्वार से बिजनौर व कुमाऊं मंडल को जाने वाले वाहनों को हरिद्वार से रुड़की और मुजफ्फरनगर होते हुए भेजा गया। इससे वाहनों को करीब 135 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही थी। रोडवेज ने अपनी बसों का किराया बढ़ा दिया था। जिससे यात्रियों को अतिरिक्त किराया भी वहन करना पड़ रहा था। बरसात खत्म होने के बाद नदी का जलस्तर कम हुआ तो रपटा तैयार किया गया। तब से इसी रपटे से वाहनों का आवागमन हो रहा है। अब बरसात में एक बार फिर पानी बढ़ जाएगा। नदी में पानी बढ़ते ही वाहनों की आवाजाही ठप हो जाएगी। ग्रामीण नरेश सैनी, गंगाधर, अनिल चौहान, महेश कुमार, सुनील पाल, फकीरचंद, मामचंद, सोमपाल, सुंदर, देवेंद्र नेगी, अशोक रावत का कहना है कि पुल की मरम्मत नहीं होने से स्थानीय लोगों की भी मुश्किलें बढ़नी तय हैं।
-----------------------
डीएम के आदेश भी हवा में उड़ाए
चार अगस्त को ही जिलाधिकारी दीपक रावत ने मौका मुआयना करके हाईवे प्राधिकरण के अधिकारियों को पुल की मरम्मत करने के निर्देश दिए। प्राधिकरण के अधिकारियों के कान में जूं तक नहीं रेंगा और डीएम के आदेशों को भी ठेंगा दिखा दिया। --------------------
विज्ञापन
बेरोजगार हो जाते हैं ढाबे वाले
राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित चिड़ियापुर में 25 से 30 छोटे बड़े ढाबे हैं। इस रूट से गुजरने वाले अधिकांश वाहनों को यहां स्टापेज होता है। इससे यहां दिन-रात रौनक बनी रहती है। हाईवे पर ट्रैफिक नहीं चलने से यह सभी ढाबे भी बंद हो जाते हैं। पिछले साल दो महीने चिड़ियापुर में सन्नाटा पसरा रहा और ढाबा मालिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
पिछले साल अगस्त महीने में भारी बारिश के बाद कोटावाली नदी में बाढ़ आ गई थी। नदी में पानी बढ़ने पर नदी पर बना पुल दरक गया था। दुर्घटना की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने पुल से वाहनों की आवाजाही बंद कर दी थी। देहरादून और हरिद्वार से बिजनौर व कुमाऊं मंडल को जाने वाले वाहनों को हरिद्वार से रुड़की और मुजफ्फरनगर होते हुए भेजा गया। इससे वाहनों को करीब 135 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही थी। रोडवेज ने अपनी बसों का किराया बढ़ा दिया था। जिससे यात्रियों को अतिरिक्त किराया भी वहन करना पड़ रहा था। बरसात खत्म होने के बाद नदी का जलस्तर कम हुआ तो रपटा तैयार किया गया। तब से इसी रपटे से वाहनों का आवागमन हो रहा है। अब बरसात में एक बार फिर पानी बढ़ जाएगा। नदी में पानी बढ़ते ही वाहनों की आवाजाही ठप हो जाएगी। ग्रामीण नरेश सैनी, गंगाधर, अनिल चौहान, महेश कुमार, सुनील पाल, फकीरचंद, मामचंद, सोमपाल, सुंदर, देवेंद्र नेगी, अशोक रावत का कहना है कि पुल की मरम्मत नहीं होने से स्थानीय लोगों की भी मुश्किलें बढ़नी तय हैं।
विज्ञापन
-----------------------
डीएम के आदेश भी हवा में उड़ाए
चार अगस्त को ही जिलाधिकारी दीपक रावत ने मौका मुआयना करके हाईवे प्राधिकरण के अधिकारियों को पुल की मरम्मत करने के निर्देश दिए। प्राधिकरण के अधिकारियों के कान में जूं तक नहीं रेंगा और डीएम के आदेशों को भी ठेंगा दिखा दिया। --------------------
विज्ञापन
बेरोजगार हो जाते हैं ढाबे वाले
राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित चिड़ियापुर में 25 से 30 छोटे बड़े ढाबे हैं। इस रूट से गुजरने वाले अधिकांश वाहनों को यहां स्टापेज होता है। इससे यहां दिन-रात रौनक बनी रहती है। हाईवे पर ट्रैफिक नहीं चलने से यह सभी ढाबे भी बंद हो जाते हैं। पिछले साल दो महीने चिड़ियापुर में सन्नाटा पसरा रहा और ढाबा मालिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा।