{"_id":"5c573107bdec227390331a75","slug":"101549218055-haridwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान आज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मौनी अमावस्या पर गंगा स्नान आज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
माघ मास में पड़ने वाली मौनी सोमवती अमावस्या पर देश के विभिन्न राज्यों से आए लाखों श्रद्धालु आज गंगा में स्नान करेंगे। इसके बाद महिलाएं पीपल के वृक्षों पर सूत के धागे लपेटते हुए 108 परिक्रमा करेंगी। स्नान के लिए एक दिन पहले ही श्रद्धालुओं का हरिद्वार पहुंचना शुरू हो गया था।
हरकी पैड़ी सहित विभिन्न घाटों पर गंगा स्नान सूर्योदय से पूर्व शुरू हो जाएगा और सायंकाल सूर्यास्त तक चलता रहेगा। तीर्थ यात्री दिनभर मौन साधना भी करेंगे। तिल पर्वों का यह आखिरी दिन है। तिल पर्व मकर संक्रांति से प्रारंभ होते हैं और मौनी अमावस्या पर विराम लेते हैं। 27 वर्षों के बाद मौनी अमावस्या पर सोमवती और अर्द्धकुंभ का स्नान एकसाथ पड़ रहे हैं। तीन फरवरी 1992 को ऐसा संयोग हुआ था। मौनी अमावस्या पर सिद्धि और महोदय योग बन रहे हैं। इन योगों का प्रभाव इस लिए भी बढ़ गया हैं, चूंकि सोमवार को चंद्रमा का श्रवण नक्षत्र विद्यमान है। सोमवार चंद्रमा का दिन है। इस दिन भगवान भास्कर भी चंद्रमा के नक्षत्र श्रवण में ही विराजमान रहेंगे। मौनी अमावस्या के दिन चूंकि सिद्धि योग है, अत: स्नान का कोई विशेष मुहूर्त नहीं है। सिद्धि योग में सूर्योदय से सूर्यास्त से संपूर्ण मुहूर्त और पर्वकाल बने रहेंगे। गंगा स्नान के लिए देर रात तक आने वाले श्रद्धालुओं में जम्मू के श्रद्धालुओं की संख्या सर्वाधिक है। पंजाब और दिल्ली से भी श्रद्घालु पहुंचे हैं।
विज्ञापन
माघ मास में पड़ने वाली मौनी सोमवती अमावस्या पर देश के विभिन्न राज्यों से आए लाखों श्रद्धालु आज गंगा में स्नान करेंगे। इसके बाद महिलाएं पीपल के वृक्षों पर सूत के धागे लपेटते हुए 108 परिक्रमा करेंगी। स्नान के लिए एक दिन पहले ही श्रद्धालुओं का हरिद्वार पहुंचना शुरू हो गया था।
हरकी पैड़ी सहित विभिन्न घाटों पर गंगा स्नान सूर्योदय से पूर्व शुरू हो जाएगा और सायंकाल सूर्यास्त तक चलता रहेगा। तीर्थ यात्री दिनभर मौन साधना भी करेंगे। तिल पर्वों का यह आखिरी दिन है। तिल पर्व मकर संक्रांति से प्रारंभ होते हैं और मौनी अमावस्या पर विराम लेते हैं। 27 वर्षों के बाद मौनी अमावस्या पर सोमवती और अर्द्धकुंभ का स्नान एकसाथ पड़ रहे हैं। तीन फरवरी 1992 को ऐसा संयोग हुआ था। मौनी अमावस्या पर सिद्धि और महोदय योग बन रहे हैं। इन योगों का प्रभाव इस लिए भी बढ़ गया हैं, चूंकि सोमवार को चंद्रमा का श्रवण नक्षत्र विद्यमान है। सोमवार चंद्रमा का दिन है। इस दिन भगवान भास्कर भी चंद्रमा के नक्षत्र श्रवण में ही विराजमान रहेंगे। मौनी अमावस्या के दिन चूंकि सिद्धि योग है, अत: स्नान का कोई विशेष मुहूर्त नहीं है। सिद्धि योग में सूर्योदय से सूर्यास्त से संपूर्ण मुहूर्त और पर्वकाल बने रहेंगे। गंगा स्नान के लिए देर रात तक आने वाले श्रद्धालुओं में जम्मू के श्रद्धालुओं की संख्या सर्वाधिक है। पंजाब और दिल्ली से भी श्रद्घालु पहुंचे हैं।
विज्ञापन