हरक को लगेगा अब एक और झटका
- सैनिक स्कूल का निर्माण शिक्षा विभाग को देने की तैयारी
- मंत्री रहते हुए हरक ने अपने महकमे को दिलवाया था जिम्मा
- स्कूल निर्माण के लिए हरक और मंत्री प्रसाद में हुआ था टकराव
- हरक के विधानसभा क्षेत्र रुद्रप्रयाग में बनना है सैनिक स्कूल
विस्तार
बगावत कर सरकार को खतरे में डालने वाले बागी मंत्री हरक सिंह को सरकार झटका देने जा रही है। हरक के विधानसभा क्षेत्र रुद्रप्रयाग में सैनिक स्कूल के निर्माण का जिम्मा सैनिक कल्याण एवं पुनर्वास की जगह अब शिक्षा विभाग को दिया जाएगा।
स्कूल की अनुमति के लिए सैनिक कल्याण मंत्री रहते हुए हरक सिंह ने शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी की एक नहीं चलने दी थी। हरक के दबाव में सरकार ने केंद्र की गाइडलाइन को साइडलाइन कर सैनिक कल्याण को जिम्मा सौंप दिया था। सूत्रों के अनुसार सोमवार को नए सिरे से करार के लिएशासन ने फाइल सीएम हरीश रावत को भेज दी है।
पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत ने 6 माह पहले स्कूल निर्माण का जिम्मा सैनिक कल्याण विभाग को दिये जाने के लिए सीएम हरीश रावत से अनुमोदन करवाया था। नियमों के तहत यह शिक्षा विभाग को दिया जाना चाहिए था। हरक की हनक के चलते किसी ने आपत्ति भी दर्ज नहीं करवाई।
बागी बनते ही हरक के फैसलों पर चली कैंची
अब उनके बागी होते ही नियम कायदों का हवाला देकर त्रुटी को दुरुस्त किया जा रहा है। सैनिक कल्याण विभाग ने निर्माण का जिम्मा शिक्षा विभाग को देने के लिए फाइल सीएम कार्यालय को भेजी गई है। इससे पहले मुख्यसचिव के स्तर पर हुई बैठक में यह मामला उठा, जिसके बाद अब सुधार किया जा रहा है। सीएम के अनुमोदन के बाद नए सिरे से सैनिक स्कूल सोसाइटी से एमओयू में बदलाव होगा।
मंत्री का फैसला पलटने का आधार
पूर्व सैनिक कल्याण मंत्री हरक सिंह की हनक का अंदाजा इसी बात से लगता है कि देश के 24 सैनिक स्कूल जिस राज्य में हैं उनके शिक्षा विभाग उसे संचालित कर रहे हैं। उत्तराखंड का एकमात्र घोड़ाखाल स्थित सैनिक स्कूल भी शिक्षा विभाग के अधीन है। अब केंद्र की गाइडलाइन को आधार बनाकर फैसला पलटा जाएगा।
संस्था को वापस मिल सकते हैं पांच करोड़
पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों की कल्याणकारी योजनाओं संचालित करने वाली सैनिक कल्याण कि जिस संस्था से पांच करोड़ सैनिक स्कूल के निर्माण के लिए दिए थे। फंड के अभाव से जूझ रही संस्था को पांच करोड़ वापस दिए जाने के लिए पत्राचार भी शुरू हो गया है। इसके अलावा उपनल से भी पांच करोड़ स्कूल निर्माण के लिए दिए गए थे।