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केदारनाथ घाटी में नहीं हो पाए सुधार कार्य
अमर उजाला, गुप्तकाशी
Updated Thu, 14 Nov 2013 05:24 PM IST
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बीते पांच नवंबर को केदारनाथ मंदिर के कपाट भी बंद हो चुके हैं। हालांकि जून माह में आए जल प्रलय ने यात्रा को ठप कर दिया था। आपदा ने केदारघाटी के जन जीवन को पूरी तरह बदल कर रख दिया। स्थानीय लोगों की आर्थिकी भी चौपट हो चुकी है। अगले वर्ष केदारनाथ की यात्रा पूर्ववत चलेगी, इसके आसार नहीं दिखाई दे रहे हैं।
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सरकार केदारघाटी को भूली
केदारनाथ मंदिर में पूजा अर्चना शुरू कराने के बाद सरकार केदारघाटी को लगभग भूल चुकी है। आपदा के बाद सरकार और शासन के प्रतिनिधियों ने आपदा से उबरने के लिए तमाम घोषणाएं की। गुप्तकाशी में उप तहसील, बीएससी नर्सिंग कॉलेज, विद्यापीठ में सामान्य विषयों में स्नातक और गुप्तकाशी स्वास्थ्य केंद्र को उच्चीकृत करने की घोषणा की गई। 24 अगस्त को कृषि मंत्री हरक सिंह रावत ने भी गुप्तकाशी में पीड़ित लोगों के सम्मुख यहीं बाते कही।
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घोषणाएं धरातल पर नहीँ उतरी
11 सितंबर को केदारनाथ में दोबारा पूजा शुरू कराने के मौके पर मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा द्वारा अगस्त्यमुनि में उक्त योजनाओं (उप तहसील और स्वास्थ्य केंद्र को छोड़कर) का शिलान्यास भी किया गया। लेकिन यह घोषणाएं अभी धरातल पर नहीं दिखाई दे रही हैं। पूर्व ब्लाक प्रमुख ममता नौटियाल, डा. आशुतोष किमोठी और काशी जनसेवा एवं सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष पीएन पांडेय बताते हैं कि सरकार ने आपदा प्रभावितों को कोरी घोषणाओं में उलझाए रखा।
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धाम में सुधार कार्य नहीं
केदारनाथ तीर्थ पुरोहितों के संगठन केदारसभा के अध्यक्ष शंकर बगवाड़ी का आरोप है कि जलप्रलय के बाद सरकार ने हक हकूकधारियों को केदारनाथ नहीं जाने दिया और ना ही स्वयं धाम में सुधार कार्य कर पाए। भवनों में मलबा पड़ा हुआ है। सरकार ने केदारघाटीवासियों को अपने हाल पर छोड़ दिया है।