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दिमागी बुखार से भाई-बहन की मौत

Mon, 26 Aug 2013 10:52 PM IST
अमर उजाला, रामनगर
अमर उजाला, रामनगर Updated Mon, 26 Aug 2013 10:52 PM IST
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From meningitis brother - sister's death

कुमाऊं में दिमागी बुखार पैर पसारने लगा है। रामनगर के दो सगे भाई-बहनों की इससे मौत हो गई है। 23 अगस्त को भाई ने और 24 को बहन ने दम तोड़ा।

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दिमागी बुखार से पीड़ित रुद्रपुर निवासी एक किशोर का अभी सुशीला तिवारी अस्पताल में इलाज चल रहा है। डाक्टरों के मुताबिक फिलहाल यह किशोर खतरे से बाहर है।

ग्राम धनपुर बेलपोखरा निवासी जयप्रकाश कांबोज खेतीबाड़ी करते हैं। उनके चार बच्चे हैं। कुछ दिन पहले उनके बेटे रवि (10) और बेटी चांदनी (5) को तेज बुखार आ गया।
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लाभ नहीं हुआ
जयप्रकाश बच्चों को इलाज के लिए रामनगर के रामदत्त जोशी संयुक्त चिकित्सालय में लेकर आए। यहां इलाज के बावजूद कोई लाभ नहीं हुआ तो उन्होंने बच्चों को सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती कराया।
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कांबोज ने बताया कि यहां उन्हें पता चला कि रवि और चांदनी को दिमागी बुखार है। इसके बाद 23 अगस्त को रवि और और 24 अगस्त को चांदनी ने दम तोड़ दिया। दो बच्चों की मौत से परिवार में मातम छाया हुआ है।


रवि और चांदनी की मौत
रवि और चांदनी की मौत के बाद ग्रामीणों ने बैठक कर सरकार से तेजी से फैल रहे दिमागी बुखार की रोकथाम करने के लिए उपाय करने की मांग की है।

इस बाबत डीएम अरविंद हयांकी का कहना है कि वह चिकित्सकों से सलाह मशविरा कर तुरंत गांव स्वास्थ्य विभाग की टीम को भेजेंगे। उधर, दिमागी बुखार से पीड़ित रुद्रपुर के मलशी गांव निवासी तेजपाल की हालत में कुछ सुधार है। तेजपाल (15) 15 दिनों से एसटीएच में भर्ती है।

एसटीएच के सीएमएस फोन नहीं उठाते
कहावत है की रोम जल रहा था और नीरो बंसी बजा रहा था। अपने यहां भी जिम्मेदार अधिकारियों के यही हाल हैं। स्वास्थ्य महकमे में यह स्थिति और भी चिंताजनक है।

दिमागी बुखार के बाबत पुष्टि करने के लिए सोमवार शाम करीब 7.30 पर जब हमने सुशीला तिवारी अस्पताल के सीएमएस रिटायर्ड कर्नल डा. एके तिवारी को फोन लगाया तो उन्होंने दोनों बार फोन काट दिया। यह स्थिति पहली बार नहीं आई, पहले भी शाम को सूरज अस्त होने के बाद वह फोन नहीं उठाते।

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