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उत्तराखंडः मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना में लाखों का घपला

Fri, 06 May 2016 11:11 AM IST
अनिल चन्दोला/ अमर उजाला, देहरादून
अनिल चन्दोला/ अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 06 May 2016 11:11 AM IST
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forgery in chief minister health insurance policy in uttarakhand

पूर्व सीएम हरीश रावत की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना में लाखों की हेरा-फेरी सामने आई है।

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योजना के कार्ड बनाने के नाम पर लाखों परिवारों से शुल्क तो वसूल लिया गया, लेकिन जमा नहीं किया गया। यह पैसा
किसके पास है और जमा क्यों नहीं हुआ, इसको लेकर अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं। प्रदेश में पिछले साल मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना लागू की गई थी।

योजना के तहत करीब 10 लाख 74 हज़ार परिवारों का चयन हुआ था, जिन्हें सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में कैशलैस उपचार की सुविधा दी गई थी। योजना के तहत प्रत्येक परिवार का एक कार्ड बनना था। इसके लिए फॉर्म भरते समय स्वास्थ्य विभाग ने सभी परिवारों से 30-30 रुपये शुल्क लिया था।

कार्ड बनाने की जिम्मेदारी यूनाइटेड इंश्योरेंस कंपनी को सौंपी गई थी। कार्ड बनने के बाद धनराशि जमा कर कार्ड बांटने थे। आठ लाख परिवारों कार्ड बांटे गए, लेकिन बाद में बिना कार्ड भी उपचार की सुविधा दी गई।
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इसका फायदा उठाते हुए ही बाकी दो लाख 74 हजार परिवारों को कार्ड नहीं बांटे गए। क्योंकि, कार्ड बांटे जाते तो इसकी धनराशि भी जमा करानी होती। इन परिवारों से वसूले गए करीब 82 लाख रुपये कहां गए, किसी को पता नहीं।

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सरकारी पैसे को करीब एक साल तक किसके पास और क्यों रखा गया

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स्वास्थ्य केंद्रों से रिलीव हो चुके कई एमबीबीएस डॉक्टरों को दोबारा वहीं सेवाएं देने के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि यह पैसा कार्ड बनाने वाली कंपनी के पास है, लेकिन कंपनी इस दावे को गलत बता रही है। विभाग का कहना है कि कार्डों में गड़बड़ियों के चलते इन्हें बांटा नहीं गया। यही कारण है कि इनका पैसा भी जमा नहीं किया गया है।

अगर यह सच है तब भी सवाल उठता है कि सरकारी पैसे को करीब एक साल तक किसके पास और क्यों रखा गया है। बीमा कंपनी के अधिकारियों का दावा है कि उन्हें केवल आठ लाख कार्डों का पैसा मिला है। कहा जा रहा है कि करीब दो लाख 74 हजार कार्ड गलत बने हैं। लेकिन न तो इन कार्डों को वापस किया जा रहा है और न ही सही करने के लिए भेजा जा रहा है।

मामला संज्ञान में आया है। स्वास्थ्य महानिदेशक से इस संबंध में जानकारी ली जाएगी। गड़बड़ी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
- ओमप्रकाश, प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य

हमने करीब 10 लाख 74 हजार कार्ड बनाकर दिए। आज तक हमें करीब आठ लाख कार्डों का ही भुगतान किया गया। विभागीय अधिकारियों के साथ हुई बैठक में इस पर जल्द फैसला लेने का आश्वासन मिला है।
- विजय कुंवर, सीनियर डिविजनल मैनेजर, यूनाइटेड इंश्योरेंस

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