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आसाराम पर लगे आरोपों के बाद युवतियों की सुरक्षा!

Wed, 04 Sep 2013 01:26 AM IST
अमर उजाला, नलिनी गुसाईं, देहरादून
अमर उजाला, नलिनी गुसाईं, देहरादून Updated Wed, 04 Sep 2013 01:26 AM IST
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elderly women protect girls in shelters

आसाराम पर लगे आरोपों के बाद तमाम आश्रमों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। लेकिन कई आश्रम ऐसे हैं, जो पहले ही इस तरह की घटनाओं पर चेते हैं और बच्चियों, युवतियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं।

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उन्होंने इसके लिए बुजुर्ग महिलाओं का सहारा लिया है। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के आश्रम को ही लें। यहां के पदाधिकारी दावा करते हैं कि पुरुषों से बात-चीत के वक्त बुजुर्ग महिलाओं की आस-पास मौजूदगी भयमुक्त वातावरण देती है।
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युवतियों के साथ बुजुर्ग

इनकी मानें तो बाहर से अगर आश्रम में युवतियां रुकती हैं तो भी बुजुर्ग महिलाएं साथ सोती हैं। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम समन्वय समिति के सदस्य नरेश कुमार चोपड़ा के मुताबिक एक-दूसरे को भाई-बहन दृष्टि से देखा जाना अनैतिक भावना को दूर रखता है।
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हालांकि वह एहतियात को जरूरी मानते हैं। इसीलिए बच्चियां, युवतियों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करने पर जोर है। उधर, आसाराम प्रकरण पर भक्त बोले कि भक्ति का मतलब अंधविश्वास नहीं। किसी को गुरु मानना, भक्ति करना गलत नहीं है, लेकिन सही-गलत का आंकलन जरूरी है।

इनका है कहना
हरिद्वार रोड, राजेश्वरीपुरम निवासी सुबुद्धि रौथाण बारह सालों से दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान से जुड़ी हैं। सुबुद्धि का कहना है कि आसाराम का प्रकरण सुनने के बाद लोग सभी साधु-संतों पर सवाल उठाने लगे हैं। जब मैं लोगों से ज्ञान की बातें करती हूं तो वे कहते हैं कि भला किसी पर कैसे भरोसा किया जाए? आसाराम पर अंधविश्वास और लड़की के दर्द ने हमें पीड़ा पहुंचाई है।

बल्लूपुर रोड निवासी किरण बिष्ट दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान से नौ सालों से जुड़ी हैं। वह कहती हैं कि आसाराम प्रकरण सुनने के बाद मन में तरह-तरह के सवाल उठने लगे हैं। एक मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती है। यदि आसाराम दोषी पाए गए तो लोग साधु-संतों पर भरोसा करना ही छोड़ देंगे, जो सभी के लिए पीड़ादायक होगा।

आश्रम में कोई पुरुष भी नहीं
प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के साथ चालीस सालों से जुड़ी बीके मंजू बहन ने कहा कि हमें अपने आश्रम में कोई डर नहीं। हम किसी गुरु को मानते ही नहीं है। सीधे शिव की पूजा करते हैं। व्यक्ति तो आखिर व्यक्ति है, गलती कर ही बैठता है। आश्रम में कोई पुरुष भी नहीं रहता। केवल हम बहनें ही यहां निवास करती हैं।

प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के साथ 40 सालों से जुड़ी बीके मीना बहन का कहना है कि यह कलिकाल चल रहा है। इस समय तो ये सब घटनाएं होंगी हीं। लोगों को खुद ही अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए। गुरु चुनने से पहले कई बार विचार करना चाहिए।


विश्व जागृति मिशन से 11 सालों से जुड़ी अनुराधा शर्मा का कहना है कि जो भी सुना वह दुखदायी है। यदि ये सब सच निकलता है तो आसाराम को भी वही सजा मिलनी चाहिए, जो एक आम आदमी को मिलती है।

जुर्म साबित होने का इंतजार
पहले जुर्म साबित होने का इंतजार करना चाहिए। यदि जुर्म सही निकलते हैं तो दोषी को बख्शना नहीं चाहिए। यदि वे किसी षडयंत्र का शिकार हो रहे हैं तो इसकी भी जांच होनी चाहिए। सच तो सामने आ ही जाएगा।
-रिचा माटा

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