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केदारनाथः पूजा शुरु कराने को लेकर घमासान

Sun, 30 Jun 2013 08:13 PM IST
गोपेश्वर/ब्यूरो
गोपेश्वर/ब्यूरो Updated Sun, 30 Jun 2013 08:13 PM IST
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Do not worry Shankaracharya Swami Swarupanand about worship

उत्तराखंड में आई जलप्रलय से भले ही कई घरों पर ताले लटक गए हो लेकिन इससे राजनीतिज्ञों की सेहत पर कुछ खास असर नहीं पड़ा, उल्टा आपदा राजनीति का नया मुद्दा बनकर उभर गई है। ताजा मामला गढवाल सांसद सतपाल महाराज का है। महाराज ने कहा कि केदारनाथ धाम की पूजा को लेकर शंकराचार्य स्वरूपानंद विवाद की स्थिति पैदा कर रहे हैं।

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साथ ही कहा कि शंकराचार्य को धामों की पूजा-पाठ की चिंता और इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए, क्योंकि हमारी प्राचीन धार्मिक परंपरा के अनुसार रावल बदरीनाथ और केदारनाथ की पूजाओं का दायित्व संभालते आ रहे हैं।
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पत्रकार वार्ता में सांसद महाराज ने कहा कि केदारनाथ तक सड़क मार्ग पहुंचाने को लेकर वह शीघ्र सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर करेंगे। जिससे भविष्य में सुरक्षित यात्रा हो सके। उन्होंने कहा कि केदारनाथ तक सड़क निर्माण हुआ होता तो इतनी जानें नहीं जाती।
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क्यूं नहीं दिया तब ध्यान
महाराज ने कहा कि जब वर्ष 2004 में पर्यावरण विद ने गांधी सरोवर के भ्रष्ट होने की बात कही थी तो हमारी गुप्तचर एजेंसियों ने क्यों इस पर ध्यान नहीं दिया, इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केदारनाथ मंदिर में शीघ्र शुद्धि यज्ञ के साथ नित्य पूजाएं शुरू होनी चाहिए।

ढर्रे पर आने में लगेंगे वर्षों : महाराज
सांसद सतपाल महाराज ने माना कि आपदा से प्रदेश की स्थिति दयनीय हो चुकी है, जिसे सुधारने में वर्षों लगेंगे। उन्होंने बांध परियोजनाओं के निर्माण को भी सही ठहराया है और केदारनाथ तक सड़क पहुंचाने की भी वकालत की।

प्रेस वार्ता में सांसद सतपाल महाराज ने कहा कि क्षतिग्रस्त सड़कों और पुलों को जल्द सुधारने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। फिलहाल पुलों की जगह पर ट्रॉली की वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी, ताकि प्रभावित गांवों में राशन और अन्य जरूरी वस्तुएं पहुंचाई जा सकें।


इसके लिए हिमाचल प्रदेश के तकनीशियनों की मदद ली जाएगी। उन्होंने कहा कि लापता लोगों के डेथ सर्टिफिकेट जल्द जारी हों। सरकार तीन डाई पोलर रडार लगाने के बारे में विचार कर रही है, जिससे उच्च क्षेत्रों में बनने वाली झीलों या बादल फटने की सूचना समय पर मिल पाएगी।

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