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बाढ़ बहा ले गई उम्मीदें और सपने

Fri, 21 Jun 2013 01:01 PM IST
हरिद्वार, लक्सर/ब्यूरो
हरिद्वार, लक्सर/ब्यूरो Updated Fri, 21 Jun 2013 01:01 PM IST
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crop lost in fields through flood

अमर उजाला की टीम उस इलाके में आई हैं जहां शासन-प्रशासन, मंत्री-संत्री, हाकिम, हुक्काम नहीं पहुंचे। वे ऐसी जगहों पर पहुंचते भी नहीं। वे तो आसमान से अथवा किनारे खड़े होकर जायजा लेते हैं।

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मंजर दुखदायी है। गंगा की लपलपाती लहरें किसानों की फसलें ही नहीं, सपने और उम्मीदें भी लील गई हैं। नुकसान इतना ज्यादा है कि अनुमान भी नहीं लगाया जा सकता फिर भरपाई करने की बात कौन सोचे। किसानों की कमर टूट गई है।
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खेतों में खड़ी फसल नष्ट

बाढ़ की चपेट में आए लक्सर और खानपुर क्षेत्र के गांवों से पानी उतरना तो शुरू हुआ है, लेकिन पानी अपने पीछे जख्म छोड़कर जा रहा है। घरों में पानी भरने से अधिकतर सामान खराब हो चुका है। बाढ़ प्रभावित गांवों में चकरोड से लेकर संपर्क मार्ग तक टूट चुके हैं। खेतों में खड़ी फसल नष्ट होने लगी है। जून महीने में आई बाढ़ ने किसानों को दो सौ करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया है। अनुमान के मुताबिक क्षेत्र को करीब 500 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
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बाढ़ का पानी जमा

शेरपुर बेला, जोगावाला और दल्लेवाला गांव में अभी तक बाढ़ का पानी जमा है। इसके अलावा मखियाली, लादपुर, जैनपुर, मौहम्मदपुर बुजुर्ग, हुसैनपुर, ढाढेकी, मथाना, करणपुर, मोहम्मदपुर खादर, अवधिपुर, धर्मुपुर, प्रहलादपुर, शाहपुर, आलमपुरा, मदारपुर, हस्तमौली, ब्राह्मणवाला, मोहनावाला, डेरियो, कलसिया,  पौडीवाला, चंद्रपुरी, खानपुर, माडाबेला, डुगनीपुर, गिददावाला, बालावाली, पंडितपुरी, गंगदासपुर, बहादराबाद, महाराजपुर खुर्द, जसपुर और रणजीतपुर आदि गांव ऐसे हैं जहां बाढ़ का पानी तो उतर गया लेकिन अपने पीछे निशां छोड़ गया है।

हर ओर कीचड़ ही कीचड़
इन गांव में ग्रामीणों ने खाने-पीने का कुछ सामान तो बाढ़ के पानी से बचा लिया लेकिन बेड, चारपाई, बिस्तर, चारा आदि सामान पानी से खराब हो गया है। इन गांवों में दो दिन पहले तक पानी ही पानी नजर आता था और अब हर ओर कीचड़ ही कीचड़ है। संपर्क मार्ग और चकरोड आदि टूट चुके हैं। करीब 300 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।

किसानों पर तो दोहरी मार पड़ी है। एक तरफ घरों में नुकसान हुआ तो दूसरी ओर खेतों में खड़ी फसल नष्ट हो गई है। गन्ने और बरसीम(चारे) की फसल में करीब 200 करोड़ का नुकसान बताया जा रहा है।

सात हजार हेक्टेयर गन्ना खत्म
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक अभी तक सात हजार हेक्टेयर गन्ने की फसल पूरी तरह खत्म हो गई। दस हजार हेक्टेयर फसल 50 फीसदी बर्बाद हुई है। इस हिसाब से 12 हजार हेक्टेयर फसल खत्म हो चुकी है। एक हेक्टेयर गन्ने की फसल का मूल्य करीब डेढ लाख बैठता है, इस हिसाब से अभी तक 180 करोड़ रुपये की गन्ने की फसल खत्म हो गई। इसी तरह से करीब बीस करोड़ की चारे की फसल खत्म हो गई।

लक्सर तहसील क्षेत्र में पड़ने वाले गंगा के खादर में जहां भी नजर दौड़ाओ गन्ने की फसल ही नजर आती है। तहसील क्षेत्र के तीस से 35 गांवों में जहां तक भी नजर पहुंच सके वहां तक गन्ने की फसल पूरी तरह से तबाह हुई नजर आ रही है। नुकसान झेल रहे इन किसानों का कहना है कि बाढ़ सुरक्षा के स्थायी समाधान करके ही किसानों की क्षति होने से बचाया जा सकता है।


लक्सर और खानपुर विकासखंड में आरंभिक सर्वेक्षण के मुताबिक सात हजार हेक्टेयर गन्ने की फसल को शत प्रतिशत और दस हजार हेक्टेयर फसल पचास फीसदी खत्म हो चुकी है।
- जेपी तिवारी, जिला मुख्य कृषि अधिकारी

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