{"_id":"15568fe63d8f44f69d6cc95b74079373","slug":"confusion-on-date-of-raksha-bandhan","type":"story","status":"publish","title_hn":"20 अगस्त को क्यूं न बांधे राखी...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
20 अगस्त को क्यूं न बांधे राखी...
देहरादून/ब्यूरो
Updated Fri, 09 Aug 2013 10:12 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यदि आप ग्रह और नक्षत्रों में पक्का विश्वास रखते हैं तो फिर यह खबर आपके
विज्ञापन
लिए बेहद महत्वपूर्ण है। रक्षा बंधन के पर्व को लेकर आपके मन में चल रही
असमंजस की स्थिति का हल ज्योतिषियों ने दे दिया है।
ज्योतिषियों की राय
रक्षाबंधन पर्व को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कोई 20 तो कोई 21 अगस्त को पर्व को मनाने की तैयारी में है। ज्योतिषियों की मानें तो यह त्योहार 21 अगस्त को मनाना ही सही है।
धर्मसिंधु ग्रंथ के अनुसार रक्षाबंधन पूर्णिमा की उदयकालीन तिथि में मनाया जाना ही शास्त्र सम्मत है। 20 अगस्त को सुबह 10:12 बजे से पूर्णिमा की शुरुआत होगी, जो 21 को सुबह 07:05 बजे तक रहेगी।
भद्राकाल में त्योहार मनाना अशुभ
इस दिन भद्रा सुबह 10:12 बजे से शाम 08:38 बजे तक रहेगी। यानी 10 घंटे 26 मिनट तक भद्रा रहेगी। भद्राकाल में त्योहार मनाना अशुभ माना जाता है। साथ ही सूर्योदय के समय पूर्णिमा के होने पर ही यह पर्व मनाया जाता है। रात्रि में पर्व मनाना निषेध माना जाता है। ऐसे में यह पर्व 21 अगस्त को सुबह से शाम तक मनाया जा सकता है।
विज्ञापन
यह है मान्यता
राजा बलि को श्रावण पूर्णिमा के दिन लक्ष्मी जी ने राखी बांधी थी। भगवान श्रीकृष्ण के हाथ में चोट लगने पर द्रोपदी ने अपनी साड़ी फाड़कर बांधी थी। देवासुर संग्राम में इंद्र की पराजय हुई तो उस समय देवगुरु बृहस्पति ने इंद्र के हाथ पर रक्षा सूत्र बांधा था, जिसके प्रभाव से इंद्र की विजय हुई।
रक्षा की याद ताजा करने का दिन है रक्षाबंधन
शुभ संकल्प और रक्षा की याद ताजा करने का दिन है रक्षाबंधन। 21 अगस्त को श्रावणी उपाकर्म करना शुभ रहेगा। रक्षाबंधन के दिन एक रेशमी वस्त्र में केसर, सरसों, चंदन, चावल, दूर्बा रखकर रंगीन सूत की डोरी से बांधकर उसका पूजन करने के पश्चात दाहिने हाथ में बांधने से वर्षभर सुख-समृद्धि रहती है।
21 अगस्त को सूर्योदय के साथ ही पूर्णिमा का मिलन है। इसी दिन त्योहार मनाना उचित होगा। आचार्य भरत राम तिवारी, उपाध्यक्ष, उत्तराखंड विद्वत सभा
ज्योतिषियों की राय
रक्षाबंधन पर्व को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कोई 20 तो कोई 21 अगस्त को पर्व को मनाने की तैयारी में है। ज्योतिषियों की मानें तो यह त्योहार 21 अगस्त को मनाना ही सही है।
धर्मसिंधु ग्रंथ के अनुसार रक्षाबंधन पूर्णिमा की उदयकालीन तिथि में मनाया जाना ही शास्त्र सम्मत है। 20 अगस्त को सुबह 10:12 बजे से पूर्णिमा की शुरुआत होगी, जो 21 को सुबह 07:05 बजे तक रहेगी।
विज्ञापन
भद्राकाल में त्योहार मनाना अशुभ
इस दिन भद्रा सुबह 10:12 बजे से शाम 08:38 बजे तक रहेगी। यानी 10 घंटे 26 मिनट तक भद्रा रहेगी। भद्राकाल में त्योहार मनाना अशुभ माना जाता है। साथ ही सूर्योदय के समय पूर्णिमा के होने पर ही यह पर्व मनाया जाता है। रात्रि में पर्व मनाना निषेध माना जाता है। ऐसे में यह पर्व 21 अगस्त को सुबह से शाम तक मनाया जा सकता है।
विज्ञापन
यह है मान्यता
राजा बलि को श्रावण पूर्णिमा के दिन लक्ष्मी जी ने राखी बांधी थी। भगवान श्रीकृष्ण के हाथ में चोट लगने पर द्रोपदी ने अपनी साड़ी फाड़कर बांधी थी। देवासुर संग्राम में इंद्र की पराजय हुई तो उस समय देवगुरु बृहस्पति ने इंद्र के हाथ पर रक्षा सूत्र बांधा था, जिसके प्रभाव से इंद्र की विजय हुई।
रक्षा की याद ताजा करने का दिन है रक्षाबंधन
शुभ संकल्प और रक्षा की याद ताजा करने का दिन है रक्षाबंधन। 21 अगस्त को श्रावणी उपाकर्म करना शुभ रहेगा। रक्षाबंधन के दिन एक रेशमी वस्त्र में केसर, सरसों, चंदन, चावल, दूर्बा रखकर रंगीन सूत की डोरी से बांधकर उसका पूजन करने के पश्चात दाहिने हाथ में बांधने से वर्षभर सुख-समृद्धि रहती है।
21 अगस्त को सूर्योदय के साथ ही पूर्णिमा का मिलन है। इसी दिन त्योहार मनाना उचित होगा। आचार्य भरत राम तिवारी, उपाध्यक्ष, उत्तराखंड विद्वत सभा