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यहां महाशिवरात्रि पर शिव देते हैं संतान प्राप्ति का वरदान

Mon, 07 Mar 2016 12:45 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, मुक्तेश्वर (नैनीताल)
ब्यूरो / अमर उजाला, मुक्तेश्वर (नैनीताल) Updated Mon, 07 Mar 2016 12:45 PM IST
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chauli ki jali in mukteshwar
चौली की जाली - फोटो : file photo

नैनीताल जिले में मुक्तेश्वर के चौली की जाली नामक पर्यटक स्थल शिवरात्रि पर सैकड़ों की तादाद में संतान सुख के लिए महिलाएं पहुंचती है। यहां महिलाएं चौली की जाली नामक पत्थर पर बने छिद्र को पार करती हैं।

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सुरक्षा के कोई इंतजाम न होते हुए भी महिलाएं आस्था से इसे पार कर जाती हैं। यही नहीं शिवरात्रि के मौके पर आसपास के गांव सहित कई क्षेत्रों से तमाम लोग इस स्थान के दर्शन करना नहीं भूलते।
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मान्यता है कि यदि शिवरात्रि के दिन संतान सुख की कामना के साथ कोई महिला इस पत्थर पर बने छेद को पार करती है तो उसे अवश्य की संतान सुख मिलता है। नाम न छापने की शर्त पर एक स्थानीय महिला ने बताया की विवाह के आठ साल बीतने के बाद भी उसे संतान सुख नहीं मिला।
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गांव की ही एक अन्य महिला के कहने पर उसने शिवरात्रि के एक दिन पूर्व मुक्तेश्वर महादेव के मंदिर में पूजा अर्चना कराई और शिवरात्रि के दिन चौली की जाली में पहुंचकर सच्चे मन से संतान प्राप्ति की कामना करते हुए पत्थर पर बने छेद को पार किया। आज वह दो संतानों का सुख भोग रही हैं। उन्होंने कहा कि भोले बाबा की कृपा ने जिंदगी में एक नहीं दो-दो संतानों का सुख दिया।

चौली की जाली की महिमा अपरंपार

chauli ki jali in mukteshwar
चौली की जाली - फोटो : file photo

ऐसी ही आस-पास के तमाम महिलाएं हैं जो आज भी चौली की जाली की इस महिमा का वर्णन करना नहीं भूलती। स्थानीय बुजुर्ग गणेश बोरा ने बताया की अतीत की कहानियों पर जाएं तो एक कहानी के मुताबिक जब सैम देवता अपने गणों के साथ हिमालय जा रहे थे, मार्ग मे चौली की जाली की चट्टानें आ गई।

उधर, शिवजी भी उस वक्त चट्टान में धूनी रमाये बैठे थे। यह देख सैम देवता ने भोलेनाथ से मार्ग देने का आग्रह किया परंतु भोलेनाथ तपस्या में लीन होने के कारण सैम देवता का आग्रह नहीं सुन सके। यह देख सैम देवता को क्रोध आ गया और अपने अस्त्र से चट्टान में प्रहार कर दिया। जिससे एक बड़ा छेद हो गया।

बाद में सैम देवता इसी छेद से अपने गंतव्य को रवाना हुए। फिलहाल  हानी जो भी हो पर क्षेत्र में चौली की जाली का प्राचीन नाम चौथा जाली बताया जाता है और लोगों की आस्था से जुड़ा है। शायद यही वजह है की इस दिन पुलिस को भी इस जगह पर कड़ी चौकसी करनी पड़ती है और लोगों की इस छिद्र को पार करवाने मे मदद भी।

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