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गाड़ी लेकर निकले थे चारधाम...लौटे खाली हाथ
लव शर्मा
Updated Thu, 04 Jul 2013 06:07 PM IST
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उत्तराखंड में आई आपदा ने ट्रैवल व्यवसाय की कमर भी तोड़कर रख दी है। अकेले हरिद्वार के ट्रैवल व्यवसायियों की करीब 500 गाड़ियां पहाड़ों पर फंसी हैं। जैसे-तैसे कर ड्राइवर तो लौट आए लेकिन गाड़ियां कब और कैसे मिलेंगी, किसी को पता नहीं है।
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हरिद्वार में लगभग 200 ट्रैवल एजेंसियां हैं। चारधाम यात्रा सीजन में हरिद्वार से रोजाना लगभग 450 गाड़ियां पहाड़ पर जाती हैं। इस बार भी सीजन शुरु हुआ तो बड़ी संख्या में गाड़ियां चारधाम के लिए निकली, लेकिन आपदा ऐसी आई कि कई गाड़ियां तबाह हो गई और कई अभी भी चारधाम मार्ग पर फंसी हुई हैं।
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ट्रैवल व्यवसायी अरविंद खनेजा ने बताया कि उनकी दो इंडिका गाडी यात्रा में फंसी हुई हैं। इनमें एक गंगोत्री एवं दूसरी बदरीनाथ में है। बेहद मायूसी से वह बताते हैं कि जो गाड़ियां पहाडों पर फंसी हुई हैं, उनके वापस आने का कुछ पता नहीं नहीं है। उन्होंने बताया कि अभी भी शहर की लगभग 500 गाड़ियां फंसी हैं।
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राजस्थान ट्रैवल्स के नवरत्न भाई एवं अमित ने बताया कि उनकी दो सूमो गाड़ी गंगोत्री एवं दो बदरीनाथ में खड़ी हैं। उन्होंने बताया कि यात्रा पूर्णरूप से ठप है। न तो गाड़ियों की किश्त दी जा रही है और न ही कर्मचारियों को वेतन ही दे पा रहे हैं। कमोबेश ऐसी ही स्थिति हरिद्वार के अधिकत्तर ट्रैवल एजेंसी संचालकों की बनी हुई है।
काम न होने के चलते वाहन स्वामियों के सम्मुख बैंक की किस्तें भरने का संकट तो है ही साथ ही रोजी-रोटी का संकट भी खड़ा हो गया है।
गाडियां लावारिस छोड, जान बचाने को भागे ड्राइवर
सभी ट्रेवल व्यवसाय करने वालों ने बताया कि जहां पर गाड़ियां फंसी हुई हैं वहां पर कोई भी अधिकारी या कर्मचारी उसकी जिम्मेवारी लेने वाला नहीं है। प्रशासन के अधिकारियों व पुलिसकर्मियों ने किसी भी प्रकार की जिम्मेवारी लेने से मना कर दिया है और न ही उनको कुछ लिखित में दिया है।
अधिकरियों का कहना है कि वह गाड़ियां अपनी जिम्मेवारी पर खड़ी करके जाएं। हरिद्वार का स्थानीय प्रशासन भी वहीं की रिपोर्ट मांग रहा है। बिना रिपोर्ट के अगर गाड़ियों को कोई नुकसान होता है तो उसके बीमे का भी कुछ नहीं मिलेगा। सरकार भी टैक्स माफ नहीं कर रही।
बाहरी राज्यों की गाड़ियां भी लापता
फगवाड़ा पंजाब निवासी कुलविंदर सिंह ने बताया कि वह अंबाला से दो टैम्पो ट्रेवलर यात्रा में लेकर गए थे। दोनों गाडियों को बदरीनाथ छोड़कर भागना पड़ा। वह और उनका चालक साथी किसी तरह अपनी जान बचाकर निकल आए और उनके यात्री भी वहां से निकल गए। लेकिन गाड़ी वहीं पर फंस गई। दोनों गाड़ियों की कीमत तीस लाख है। उनके पास कोई और काम भी नहीं है। कई सालों से वह यात्रा का काम कर रहे हैं। दोनों गाड़ियों फंसने से उन्हें बहुत नुकसान हो रहा है।