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Champawat News: प्यास बुझाने के लिए भगवान भरोसे लोग...
Tue, 07 Mar 2023 11:43 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Tue, 07 Mar 2023 11:43 PM IST
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चंपावत का घटकू मंदिर। संवाद
पाटी (चंपावत)। जाड़ों में कम बारिश होने के कारण देवीधुरा क्षेत्र में पेयजल किल्लत बढ़ने लगी है। परेशान लोग पेयजल के लिए भगवान भरोसे हैं। इसीलिए बैरख गांव के लोगों ने मंगलवार को देवीधुरा के मां वाराही धाम में 108 कलश का जलाभिषेक किया। पुजारी दीपक जोशी, विपिन चंद्र जोशी, हर सिंह मेहरा ने जलाभिषेक करा मां वाराही देवी से बारिश कराने की प्रार्थना की।
जलाभिषेक करने वालों में नैन सिंह, प्रकाश मेहरा, जीत मेहरा, दिनेश मेहरा, पान सिंह, रोहित मेहरा, महेंद्र सिंह, चंदन मेहरा, चम्याल खाम के गंगा सिंह चम्याल, लमगड़िया खाम के मोहन सिंह लमगड़िया, जीवन लमगड़िया आदि शामिल थे। पाटी ब्लॉक में रोजाना औसतन 17,90,000 लीटर पानी की जरूरत है लेकिन अभी महज 9,87,000 लाख लीटर ही पानी मिल रहा है। नवंबर 2022 से चार माह में 21 मिमी से भी कम बारिश होने से जल स्रोतों में 25 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। जल संस्थान के ईई विलाल यूनुस का कहना है कि टैंकर भेजकर पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।
घटकू मंदिर से जुड़ी है बारिश की मान्यता
चंपावत। यहां से चार किमी दूर घटकू (घटोत्कच) मंदिर महाभारतकालीन है। कहा जाता है कि घटकू का मंदिर मौसम की खूबी से जाना जाता है। बारिश कराने और बारिश रोकने के लिए यहां पूजन होता है। मंदिर में बने जल कुंड में सात घड़े जल डालने से बारिश होती है।
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मंदिर के पुजारी नरेंद्र पुजारी, जगन्नाथ पुजारी, चंदन पुजारी बताते हैं कि इस कुंड से बारिश होने या न होने का पता चलता है। तीन दिन तक शुद्धता का पालन करने वाले सात व्यक्ति चौथे दिन सुबह त्यारकूड़ा में स्थित धर्मशिला से सात घड़े पानी इसमें डालते हैं। यदि इन घड़ों से यह कुंड पूरा भर जाता है, तो बारिश हो जाती है। अगर सात घड़ों से कुंड नहीं भरा तो बारिश नहीं होती।
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जलाभिषेक करने वालों में नैन सिंह, प्रकाश मेहरा, जीत मेहरा, दिनेश मेहरा, पान सिंह, रोहित मेहरा, महेंद्र सिंह, चंदन मेहरा, चम्याल खाम के गंगा सिंह चम्याल, लमगड़िया खाम के मोहन सिंह लमगड़िया, जीवन लमगड़िया आदि शामिल थे। पाटी ब्लॉक में रोजाना औसतन 17,90,000 लीटर पानी की जरूरत है लेकिन अभी महज 9,87,000 लाख लीटर ही पानी मिल रहा है। नवंबर 2022 से चार माह में 21 मिमी से भी कम बारिश होने से जल स्रोतों में 25 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। जल संस्थान के ईई विलाल यूनुस का कहना है कि टैंकर भेजकर पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी।
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घटकू मंदिर से जुड़ी है बारिश की मान्यता
चंपावत। यहां से चार किमी दूर घटकू (घटोत्कच) मंदिर महाभारतकालीन है। कहा जाता है कि घटकू का मंदिर मौसम की खूबी से जाना जाता है। बारिश कराने और बारिश रोकने के लिए यहां पूजन होता है। मंदिर में बने जल कुंड में सात घड़े जल डालने से बारिश होती है।
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मंदिर के पुजारी नरेंद्र पुजारी, जगन्नाथ पुजारी, चंदन पुजारी बताते हैं कि इस कुंड से बारिश होने या न होने का पता चलता है। तीन दिन तक शुद्धता का पालन करने वाले सात व्यक्ति चौथे दिन सुबह त्यारकूड़ा में स्थित धर्मशिला से सात घड़े पानी इसमें डालते हैं। यदि इन घड़ों से यह कुंड पूरा भर जाता है, तो बारिश हो जाती है। अगर सात घड़ों से कुंड नहीं भरा तो बारिश नहीं होती।