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काम पूरा फिर भी खत्म नहीं हुआ इंतजार
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मां बाराही धाम देवीधुरा का योद्घा भवन।
- फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। बगवालनगरी मां बाराही धाम देवीधुरा को धार्मिक पर्यटन की सुविधा का इंतजार है। करीब 17.33 करोड़ रुपये की केंद्र पोषित स्वदेश दर्शन विरासत परिपथ (हेरिटेज सर्किट) योजना के तहत देवीधुरा में योद्धा भवन और दर्शक दीर्घा का काम पूरा होने के बावजूद अभी यह संपत्ति मंदिर समिति के सुपुर्द नहीं हो सकी है। इसकी वजह बना है तीसरे पक्ष के निरीक्षण का न हो पाना।
विरासत परिपथ योजना के तहत देवीधुरा मंदिर परिसर और उसके आसपास बगवाल खेलने वाले चारों खाम (चम्याल, गहरवाल, लमगड़िया और वालिग) के लिए एक-एक बहुमंजिले योद्धा भवन के अलावा बगवाल के गवाह बनने के लिए दर्शक दीर्घा का निर्माण किया गया है। हर योद्धा भवन में रणबांकुरों और वीरांगनाओं के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं होनी हैं। योद्धा भवनों का उपयोग फर्रे रखने, पोशाक रखने सहित कई कार्यों के लिए होना है। बगवाल के बाद बगवाली वीर फर्रों (ढाल), पोशाक, अन्य सामग्रियों को रखने के अलावा लोगों की जरूरतों के हिसाब से इन भवनों का उपयोग किया जाना है। चम्याल खाम का भवन मुख्य मंदिर के सामने, लमगड़िया खाम का भवन मुख्य मंदिर की उत्तरी दिशा में, वालिक खाम का भवन रंगमंच और गहरवाल खाम के योद्धा भवन का निर्माण मचवाल को जाने वाले रास्ते में किया गया है, लेकिन करोड़ों रुपये से बनी इस योजना का काम पूरा होने पर भी अभी इसका उपयोग शुरू नहीं हो सका है। संवाद
कोट
विरासत परिपथ योजना से तीर्थाटन और धार्मिक पर्यटन को विस्तार मिलेगा। योद्धा भवन का बगवाल के दिन बगवाली योद्धाओं के लिए, तो शेष दिनों में श्रद्धालु और यहां आने वाले अन्य अतिथि इसका उपयोग कर सकेंगे। इससे भंडारा कराने वालों को भी सुविधा मिलेगी। - खीम सिंह लमगड़िया, अध्यक्ष, मां बाराही धाम मंदिर समिति।
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देवीधुरा में स्वदेश दर्शन हेरिटेज सर्किट योजना का काम पूरा करा लिया गया है। थर्ड पार्टी निरीक्षण के लिए पर्यटन निदेशालय पत्र भेजा गया है। इस मुआयने के बाद इसका हस्तांतरण मंदिर समिति को कर दिया जाएगा। - लता बिष्ट, जिला पर्यटन अधिकारी, चंपावत।
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विरासत परिपथ योजना के तहत देवीधुरा मंदिर परिसर और उसके आसपास बगवाल खेलने वाले चारों खाम (चम्याल, गहरवाल, लमगड़िया और वालिग) के लिए एक-एक बहुमंजिले योद्धा भवन के अलावा बगवाल के गवाह बनने के लिए दर्शक दीर्घा का निर्माण किया गया है। हर योद्धा भवन में रणबांकुरों और वीरांगनाओं के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं होनी हैं। योद्धा भवनों का उपयोग फर्रे रखने, पोशाक रखने सहित कई कार्यों के लिए होना है। बगवाल के बाद बगवाली वीर फर्रों (ढाल), पोशाक, अन्य सामग्रियों को रखने के अलावा लोगों की जरूरतों के हिसाब से इन भवनों का उपयोग किया जाना है। चम्याल खाम का भवन मुख्य मंदिर के सामने, लमगड़िया खाम का भवन मुख्य मंदिर की उत्तरी दिशा में, वालिक खाम का भवन रंगमंच और गहरवाल खाम के योद्धा भवन का निर्माण मचवाल को जाने वाले रास्ते में किया गया है, लेकिन करोड़ों रुपये से बनी इस योजना का काम पूरा होने पर भी अभी इसका उपयोग शुरू नहीं हो सका है। संवाद
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विरासत परिपथ योजना से तीर्थाटन और धार्मिक पर्यटन को विस्तार मिलेगा। योद्धा भवन का बगवाल के दिन बगवाली योद्धाओं के लिए, तो शेष दिनों में श्रद्धालु और यहां आने वाले अन्य अतिथि इसका उपयोग कर सकेंगे। इससे भंडारा कराने वालों को भी सुविधा मिलेगी। - खीम सिंह लमगड़िया, अध्यक्ष, मां बाराही धाम मंदिर समिति।
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देवीधुरा में स्वदेश दर्शन हेरिटेज सर्किट योजना का काम पूरा करा लिया गया है। थर्ड पार्टी निरीक्षण के लिए पर्यटन निदेशालय पत्र भेजा गया है। इस मुआयने के बाद इसका हस्तांतरण मंदिर समिति को कर दिया जाएगा। - लता बिष्ट, जिला पर्यटन अधिकारी, चंपावत।