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गेहूं की ग्रोथ तक नहीं हुई है
ब्यूराे/अमर उजाला, चंपावत
Updated Fri, 06 May 2016 10:18 PM IST
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गेहूं की ग्रोथ तक नहीं हुई है।
- फोटो : अमर उजाला
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पहाड़ में गेहूं के खेत देख काश्तकार खून के आंसू रो रहे हैं। इन खेतों से मुनाफा तो संभव नहीं है। जितनी रकम बीज, खाद आदि में खर्च हुई है, उतना पैसा भी वापस आने की कोई उम्मीद काश्तकारों को नहीं है। अमर उजाला की टीम ने शुक्रवार को शहर से लगे गांव मुड़ियानी, चैकुनीबोरा, राकड़ी फुलारा, फुलारगांव में जाकर गेहूं की फसल को देखा। गेहूं की अब तक ग्रोथ तक नहीं हुई है।
जिले में सूखे की वजह से गेहूं की फसल को काफी नुकसान हुआ है। लेकिन सरकारी आंकड़ों के अनुसार 45 प्रतिशत ही गेहूं को नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है कि यहां 700 नाली से अधिक एरिया में गेहूं बोया गया। लेकिन अभी तक गेहूं की ग्रोथ नहीं हो रही है। जबकि आमतौर पर मई के तीसरे हफ्ते से गेहूं की कटाई शुरू हो जाती थी। पर इस बार गेहूं काटने की नौबत आएगी, किसानों को इतना भी एतबार नहीं हैं।
गेहूं के एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच ही करीब एक फिट का फासला है। जबकि इतनी दूरी पर तीन से चार गेहूं की पौध होनी चाहिए थी। गेहूं की ऊंचाई भी एकदम कम है। गेहूं के दाने के आकार को देखकर काश्तकार महेश सिंह का दर्द समझा जा सकता है। महेश कहते है कि फसल देखकर नहीं लगता है कि यह जीरे की फसल है। किसानों का कहना है कि जरूरत से 70 फीसदी कम बारिश ने गेहूं की फसल पर ग्रहण लगा दिया है। करीब 80 प्रतिशत तक गेहूं की फसल का नुकसान नजर आ रहा है।
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आलू छोड़ इस बार बोए अधिक गेहूं
पिछले साल गेहूं की फसल ठीक हुई थी। जबकि आलू की फसल पर अधिक बारिश से नुकसान हुआ था। किसानों ने आलू की फसल में हुए नुकसान को देखते हुए इस बार गेहूं की फसल को तरजीह दी। उनका कहना है इन इलाकों में पिछले साल के अनुभव को देखते हुए इस बार आलू की खेती के बजाय गेहूं पर ज्यादा ध्यान दिया गया। सोचा था कि इस बार गेहूं की फसल ठीक हुई, तो सालभर खाने का इंतजाम हो जाएगा। लेकिन इस बार बारिश इतनी कम हुई कि गेहूं की ग्रोथ के ही लाले पड़ गए हैं। किसान आशा देवी कहती हैं साल भर खाने की बात तो छोड़ो, इस बार बीज के लिए गेहूं पर्याप्त हो जाए वही बहुत है।
चारे की कमी से मवेशियों पर होगा अधिक खर्च
किसानों को गेहूं की फसल ने तगड़ा झटका दिया है। मगर काश्तकारों की परेशानी इतनी भर नहीं है। उनका कहना है कि गेहूं की फसल बर्बाद होने का असर मवेशियों पर होने वाले खर्च पर भी पड़ेगा। गेहूं के पौधे की ग्रोथ नहीं होने से पर्याप्त चारा भी नहीं मिलने का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में मवेशियों के लिए चारा भी बाजार से खरीदने को वे मजबूर होंगे।
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जिले में सूखे की वजह से गेहूं की फसल को काफी नुकसान हुआ है। लेकिन सरकारी आंकड़ों के अनुसार 45 प्रतिशत ही गेहूं को नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है कि यहां 700 नाली से अधिक एरिया में गेहूं बोया गया। लेकिन अभी तक गेहूं की ग्रोथ नहीं हो रही है। जबकि आमतौर पर मई के तीसरे हफ्ते से गेहूं की कटाई शुरू हो जाती थी। पर इस बार गेहूं काटने की नौबत आएगी, किसानों को इतना भी एतबार नहीं हैं।
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गेहूं के एक पौधे से दूसरे पौधे के बीच ही करीब एक फिट का फासला है। जबकि इतनी दूरी पर तीन से चार गेहूं की पौध होनी चाहिए थी। गेहूं की ऊंचाई भी एकदम कम है। गेहूं के दाने के आकार को देखकर काश्तकार महेश सिंह का दर्द समझा जा सकता है। महेश कहते है कि फसल देखकर नहीं लगता है कि यह जीरे की फसल है। किसानों का कहना है कि जरूरत से 70 फीसदी कम बारिश ने गेहूं की फसल पर ग्रहण लगा दिया है। करीब 80 प्रतिशत तक गेहूं की फसल का नुकसान नजर आ रहा है।
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आलू छोड़ इस बार बोए अधिक गेहूं
पिछले साल गेहूं की फसल ठीक हुई थी। जबकि आलू की फसल पर अधिक बारिश से नुकसान हुआ था। किसानों ने आलू की फसल में हुए नुकसान को देखते हुए इस बार गेहूं की फसल को तरजीह दी। उनका कहना है इन इलाकों में पिछले साल के अनुभव को देखते हुए इस बार आलू की खेती के बजाय गेहूं पर ज्यादा ध्यान दिया गया। सोचा था कि इस बार गेहूं की फसल ठीक हुई, तो सालभर खाने का इंतजाम हो जाएगा। लेकिन इस बार बारिश इतनी कम हुई कि गेहूं की ग्रोथ के ही लाले पड़ गए हैं। किसान आशा देवी कहती हैं साल भर खाने की बात तो छोड़ो, इस बार बीज के लिए गेहूं पर्याप्त हो जाए वही बहुत है।
चारे की कमी से मवेशियों पर होगा अधिक खर्च
किसानों को गेहूं की फसल ने तगड़ा झटका दिया है। मगर काश्तकारों की परेशानी इतनी भर नहीं है। उनका कहना है कि गेहूं की फसल बर्बाद होने का असर मवेशियों पर होने वाले खर्च पर भी पड़ेगा। गेहूं के पौधे की ग्रोथ नहीं होने से पर्याप्त चारा भी नहीं मिलने का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में मवेशियों के लिए चारा भी बाजार से खरीदने को वे मजबूर होंगे।