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भैरव के प्रयासों से रायनगर चौड़ी में बह रही पानी की गंगा

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 07 May 2022 11:57 PM IST
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Water Supply in Rainagar Chaurhi
लोहाघाट के रायनगर चौड़ी में भैरव द्वारा निजी संशाधनों से पहुंचाई पाइप लाइन से पानी भरते ग्रामीण? - फोटो : LOHAGHAT
लोहाघाट (चंपावत)। लगातार बढ़ रही गर्मी से जहां चारों ओर पेयजल के लिए मारामारी मची है, वहीं नगर से लगे रायनगर चौड़ी गांव में भरपूर पानी उपलब्ध है। पूर्व बीडीसी सदस्य भैरव राय के भगीरथ प्रयास से गांव में पानी की पर्याप्त उपलब्धता है। भैरव की ओर से अपने निजी खर्च पर गांव के लिए पांच पाइप लाइनें लगाकर ग्रामीणों को काफी राहत दी है।
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जल संस्थान की ओर से गांव के लिए बनगांव और बलांई से दो पेयजल योजना बनाई गई हैं। पेयजल योजनाओं का जल स्तर कम होने या उसमें टूट-फूट होने से लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता था, जिससे परेशान लोग पेयजल के लिए नौलों, धारों के सहारे थे। भैरव बताते हैं उन्होंने अपने पिता स्व. प्रेमबल्लभ राय और माता राजेश्वरी देवी की प्रेरणा से ग्रामीणों की प्यास बुझाने का बीड़ा उठाया। इसके तहत उन्होंने निजी संसाधनों से करीब पांच हजार मीटर लंबे प्लास्टिक के पाइप जुटाए। इससे गांव के नगरा तोक, कांल्ली तोक, मल्लीचौड़ी तोक, गाडे़कुड़ी तोक, डांग तोक समेत ग्राम सभा खूनाबोरा के देवराड़ी तोक, नर्सरी गधेरे से बस्ती तक पानी पहुंचाया। पाइप लाइनों को बस्ती तक पहुंचाने में ग्रामीणों ने भी श्रमदान किया।
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किसी भी आयोजन के सताने लगती है पानी की चिंता
लोहाघाट (चंपावत)। नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल किल्लत के चलते लोगों को सार्वजनिक आयोजनों के लिए पानी जुटाने की चिंता रहती है। लोगों को पानी के लिए हजारों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। तो रायनगर चौड़ी गांव में लोग पानी की चिंता को दूर रख तनावमुक्त होकर अपने कार्यों में लगे रहते हैं। बाजार और अन्य क्षेत्रों में लोग एक रुपये लीटर के हिसाब से वाहनों के जरिये पानी मंगाने के लिए मजबूर हैं। पानी के लिए दो-तीन दिन पहले मांग देनी पड़ रही है तब जाकर लोगों को समय से पानी मिल पा रहा हैै। डीजल-पेट्रोल के दामों में हुई वृद्धि के कारण वाहनों का ढुलान भाड़ा भी बढ़ चुका है।
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पर्यावरण संरक्षण पर भी कार्य कर रहे हैं ग्रामीण
लोहाघाट (चंपावत)। पानी के महत्व को समझते हुए ग्रामीणों ने पर्यावरण संरक्षण का भी कार्य किया है। इसके तहत ग्रामीणों ने जुकानी पानी तोक, डिग्री कॉलेज से आगे खाली भूमि में चौड़ी पत्ती वाले पौधों का रोपण किया है। इन स्थानों पर बरसाती पानी को एकत्र करने के लिए चाल-खाल बनाए हैं। इससे गधेरों में पानी बढ़ने लगा है।
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