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नौले और धारे से पानी ढोने को मजबूर 

Sun, 09 Jun 2019 11:20 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन अमर उजाला ब्यूरो  चंपावत।
अमर उजाला ब्यूरो  चंपावत। Published by: बृजमोहन बृजमोहन Updated Sun, 09 Jun 2019 11:20 PM IST
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water crises in champawat, women are children are bringing water
चंपावत में पानी ढोते बच्चे। - फोटो : अमर उजाला

गर्मी और तपिश के चलते पानी की किल्लत जारी है। चंपावत, लोहाघाट के शहरी क्षेत्रों के अलावा दूरदराज के गांवों में भी पेयजल संकट ने लोगों की दिनचर्या को बिगाड़ दिया है। अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोग नौले और धारे से पानी ढोने को मजबूर हैं। 

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लधौन से लेकर धौन गांव तक में ग्रामीण पानी के लिए लंबा इंतजार कर रहे हैं। लधौन में महिलाओं और बच्चों का हर दिन दो घंटे से अधिक का समय नौलों से पानी ढोने में बर्बाद हो रहा है। लधौन के नौले में पानी तो भरपूर है लेकिन लंबी दूरी के चलते काफी वक्त लग रहा है। प्रशांत कुमार, सुरेश, अनूप कुमार, चंचल, रमेश आदि ने सार्वजनिक पेयजल व्यवस्था को सुचारू करने की मांग की है।
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वहीं चंपावत शहर को टैंकरों के जरिए पानी देने वाले धौन गांव की हालत भी खराब है। यहां लोगों को धारे से पानी ढोने को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। बता दें कि चंपावत में जल संस्थान के टैंकर और पिकअप जीप धौन के गधेरे और धारे से पानी भरते हैं। संजय जोशी सहित तमाम ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में जल संस्थान की पेयजल लाइन तो बनाई गई है लेकिन टैंक लीक होने से दिक्कत आ रही है। जल संस्थान के अपर सहायक अभियंता किशोर पंत का कहना है कि लीकेज को ठीक करा व्यवस्था को सुचारू किया जाएगा। 
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चंपावत में एक दिन और लोहाघाट में दो दिन छोड़कर मिल रहा पानी 
चंपावत/लोहाघाट। जिले के शहरी क्षेत्रों में पानी की किल्लत थम नहीं रही है। चंपावत में एक दिन छोड़कर नलों में पेयजल आपूर्ति की जा रही है। ज्यादातर जगह बमुश्किल एक घंटे पानी मिल पा रहा है जो लोगों की जरूरत के मद्देनजर नाकाफी है। इसी तरह लोहाघाट में अभी भी दो दिन छोड़कर ज्यादातर शहरी क्षेत्र में पानी वितरित हो रहा है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता विलाल युनूस का कहना है कि जल स्रोतों में आई करीब 40 प्रतिशत की गिरावट से नियमित रूप से पेयजल आपूर्ति नहीं हो पा रही है। वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में टैंकर और पिकअप जीप से पानी का वितरण किया जा रहा है।

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