{"_id":"588b772e4f1c1b476fcf59e9","slug":"voting-will-open-on-the-day-of-the-primary-school-just-khunadhi","type":"story","status":"publish","title_hn":"बस वोटिंग के दिन खुलेगा खुनाड़ी का प्राइमरी स्कूल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बस वोटिंग के दिन खुलेगा खुनाड़ी का प्राइमरी स्कूल
चंद्रशेखर जोशी/अमर उजाला, चंपावत
Updated Fri, 27 Jan 2017 10:07 PM IST
विज्ञापन
बस वोटिंग के दिन खुलेगा खुनाड़ी का प्राइमरी स्कूल
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खुनाड़ी के राजकीय प्राथमिक स्कूल में मतेदय स्थल हैं। यहां 15 फरवरी को 384 (199 पुरुष और 185 महिलाएं) वोटर विधानसभा चुनाव के लिए मतदान देंगे, लेकिन मतदेय स्थल बना ये स्कूल पढ़ाई के लिए कभी नहीं खुलता। छात्र संख्या नहीं होने से इस स्कूल में सितंबर 2013 से ताला लटका है। स्कूल परिसर में ही आंगनबाड़ी केंद्र चलता है। ग्रामीण बताते हैं कि स्कूल भवन के ताले 2014 में हुए लोकसभा और पंचायत चुनाव में खुले थे और अब फिर इस स्कूल के कमरे विधानसभा चुनाव के दिन खुलेंगे।
जिला मुख्यालय से करीब 17 किमी दूर डिंगडई ग्राम पंचायत के खुनाड़ी गांव के लोग चुनाव से बदलाव की उम्मीद नहीं करते। ग्रामीण बताते हैं कि विधानसभा चुनाव के लिए अभी कोई भी प्रत्याशी यहां नहीं पहुंचे हैं। ज्यादातर राजनीतिक दलों को उनके मुद्दों से सरोकार नहीं है। पिछले चुनावों में भी राजनीतिक दल और उम्मीदवार वोट मांगने के लिए आए, लेकिन पांच साल में भागेश्वर मंदिर तक 1.15 किमी रोड की कटिंग के अलावा कोई बड़ा काम नहीं हुआ।
गांव के लोगों का कहना है कि खेती का संकट उनके लिए सबसे बड़ा मुद्दा है। सिंचाई के साधन नहीं हैं। कई दशक पहले बनी गूल स्रोत में पानी कम होने से बंद हो चुकी है। रही-सही कसर जंगली सुअरों ने खेती चौपट कर पूरी कर दी है। कई गरीब परिवारों को आवास योजना का भी लाभ नहीं मिल पाया है। ग्रामीण कहते हैं कि रोजगार न होने से यहां से शहरों की ओर जाना मजबूरी हैं। इसी के चलते करीब 55 परिवार वाले इस गांव में अब मुश्किल से 26 परिवार रह गए हैं। कई पुराने मकान अब खंडहर में तब्दील हो गए हैं।
विज्ञापन
खुनाड़ी गांव में 6 से 11 वर्ष का कोई बच्चा स्कूल जाने से छूटा न हो, इसे सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसके लिए स्कूलों के आसपास के क्षेत्र का स्थायी रूप से परीक्षण करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही यहां स्कूल को दोबारा संचालित करने के लिए घर-घर जाकर छोटे बच्चों को दाखिले के लिए प्रेरित किया जाएगा। -सत्यनारायण, जिला शिक्षाधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा), चंपावत।
विज्ञापन
जिला मुख्यालय से करीब 17 किमी दूर डिंगडई ग्राम पंचायत के खुनाड़ी गांव के लोग चुनाव से बदलाव की उम्मीद नहीं करते। ग्रामीण बताते हैं कि विधानसभा चुनाव के लिए अभी कोई भी प्रत्याशी यहां नहीं पहुंचे हैं। ज्यादातर राजनीतिक दलों को उनके मुद्दों से सरोकार नहीं है। पिछले चुनावों में भी राजनीतिक दल और उम्मीदवार वोट मांगने के लिए आए, लेकिन पांच साल में भागेश्वर मंदिर तक 1.15 किमी रोड की कटिंग के अलावा कोई बड़ा काम नहीं हुआ।
विज्ञापन
गांव के लोगों का कहना है कि खेती का संकट उनके लिए सबसे बड़ा मुद्दा है। सिंचाई के साधन नहीं हैं। कई दशक पहले बनी गूल स्रोत में पानी कम होने से बंद हो चुकी है। रही-सही कसर जंगली सुअरों ने खेती चौपट कर पूरी कर दी है। कई गरीब परिवारों को आवास योजना का भी लाभ नहीं मिल पाया है। ग्रामीण कहते हैं कि रोजगार न होने से यहां से शहरों की ओर जाना मजबूरी हैं। इसी के चलते करीब 55 परिवार वाले इस गांव में अब मुश्किल से 26 परिवार रह गए हैं। कई पुराने मकान अब खंडहर में तब्दील हो गए हैं।
विज्ञापन
खुनाड़ी गांव में 6 से 11 वर्ष का कोई बच्चा स्कूल जाने से छूटा न हो, इसे सुनिश्चित करने को कहा गया है। इसके लिए स्कूलों के आसपास के क्षेत्र का स्थायी रूप से परीक्षण करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही यहां स्कूल को दोबारा संचालित करने के लिए घर-घर जाकर छोटे बच्चों को दाखिले के लिए प्रेरित किया जाएगा। -सत्यनारायण, जिला शिक्षाधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा), चंपावत।