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ग्रामीणों ने किया बैठक का बहिष्कार
अमर उजाला ब्यूरो, लोहाघाट (चंपावत)।
Updated Thu, 05 Oct 2017 10:41 PM IST
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बाराकोट के बौतड़ी गांव में प्रदर्शन करते ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला
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पंचेश्वर बांध निर्माण को लेकर बौतड़ी में आयोजित बैठक का ग्रामीणों ने बहिष्कार किया। उन्होंने बैठक में मौजूद अधिकारियों को बांध निर्माण के संबंध में पूरी जानकारी न होने आक्रोश जताया। अधिकारियों पर बांध निर्माण को लेकर तैयार किए गए ड्राफ्ट में ग्रामीणों के सुझावों को शामिल न करने का आरोप लगाया। उन्होंने इसके खिलाफ नारेबाजी करते हुए पंचेश्वर बांध निर्माण का विरोध जारी रखने का निर्णय लिया।
बौतड़ी ग्राम पंचायत के पंचायतघर में बृहस्पतिवार को ग्राम प्रधान सीता देवी की अध्यक्षता, बीडीसी सदस्य मनोज सामंत के संचालन में हुई बैठक में पूर्व प्रधान सुभाष रावल समेत ग्रामीणों ने बैठक का बहिष्कार किया। उन्होंने भूमि अधिनियम 2013 के तहत मुआवजा तथा पारदर्शिता के अधिकार के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए ड्राफ्ट में उनकी मांगों को शामिल करने की मांग की। पूर्व प्रधान रावल ने कहा कि जब तक नीति स्पष्ट नहीं होगी वह बैठक का बहिष्कार करते रहेंगे। बीडीसी सदस्य मनोज सामंत ने कहा कि बीते अगस्त माह में ग्राम पंचायत की बैठक में भी उनसे सुझाव लेने के नाम पर हस्ताक्षर करवा लिए और गांव वालों से वन भूमि पर निरापत्ति ले ली।
इस मौके पर ग्राम प्रधान सीता देवी के साथ महिलाओं ने भी जोरदार नारेबाजी करते हुए आक्रोश जताया। कहा कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो पंचेश्वर बांध निर्माण का विरोध जारी रहेगा। ग्रामीणों ने कहा कि सरकार की ओर से विस्थापन के लिए जगह नहीं बताई गई है। उन्होंने चंपावत बाजार की भूमि के बराबर सर्किल रेट देने, प्रत्येक बांध प्रभावित परिवारों को कम से कम पांच एकड़ उपजाऊ भूमि देने, प्रत्येक परिवार को भवन के लिए 30 लाख, गोशाला के लिए अलग से ढाई लाख रुपये देने, डूब क्षेत्र के बाद दो किमी दूर के गांव को भी भूस्खलन की दृष्टि से देखते हुए डूब क्षेत्र में रखने , बंजर भूमि का भी सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजा देने समेत कई मांगे उठाईं। ग्रामीणों ने कहा कि विस्थापितों को वहां पर जगह दी जाए जहां रोजगार की गारंटी के अलावा स्कूल, अस्पताल, बैंक, सड़क, पानी आदि की सुविधा हो, सभी डूब क्षेत्र के प्रभावितों को एक साथ बसाया जाय। बिजली, पानी के बिल माफ करने के साथ एक मुश्त में मुआवजे की रकम का भुगतान किया जाय। इस मौके पर पंचायत मंत्री अनिरुद्ध पुनेठा, ग्राम विकास अधिकारी दीपक टम्टा, राजस्व उपनिरीक्षक दीपक साही के अलावा गांव के धन सिंह, श्याम राम, दीपक सिंह, बसंती देवी, कमला, कुंती देवी, भागीरथी देवी, मुन्नी देवी, कलावती देवी, लक्ष्मण सिंह, शेर सिंह, रुद्र सिंह, श्याम सिंह, हेमा देवी, पुष्पा देवी आदि मौजूद रहे।
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सिमलखेत में भी हुई ग्रामीणों की खुली बैठक
लोहाघाट (चंपावत)। प्रस्तावित पंचेश्वर बांध निर्माण को लेकर डूब क्षेत्र में आने वाले विकासखंड पाटी के ग्राम सभा चिल्नियां सिमलखेत में ग्रामीणों की खुली बैठक आयोजित की गई। राजेंद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई खुली बैठक में विस्थापन और पुनर्विस्थापन के संबंध में लोगों ने कहा कि चार किश्तों में दी जाने वाली मुआवजे की धनराशि को दो किश्त में दी जाय। बैठक में लोगों ने जिनकी जमीन डूब क्षेत्र के अलावा अन्य जगह पर है उसका मुआवजा दिया जाएगा या नहीं, भवन निर्माण दरों पर निष्पक्ष नीति बनाने समेत कई मांगे उठाईं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने उनकी मांग पूरी नहीं की तो वह बांध निर्माण का विरोध तो नहीं करेंगे, लेकिन स्पष्ट नीति बनाने के लिए मांग जारी रहेगी। इस मौके पर तहसीलदार ललित मोहन तिवारी, ग्राम पंचायत अधिकारी प्रेम प्रकाश, ग्राम विकास अधिकारी किशोर कुमार, श्याम सिंह, पूरन सिंह आदि मौजूद रहे। रैघांव में ग्राम विकास अधिकारी प्रवीण भटट और रविंद्र गोस्वामी की मौजूदगी हुई बैठक में भी ग्रामीणों ने अपनी मांगों को प्रमुखता से रखा। उनका कहना था कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो वे बांध का पुरजोर विरोध करेंगे।
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बौतड़ी ग्राम पंचायत के पंचायतघर में बृहस्पतिवार को ग्राम प्रधान सीता देवी की अध्यक्षता, बीडीसी सदस्य मनोज सामंत के संचालन में हुई बैठक में पूर्व प्रधान सुभाष रावल समेत ग्रामीणों ने बैठक का बहिष्कार किया। उन्होंने भूमि अधिनियम 2013 के तहत मुआवजा तथा पारदर्शिता के अधिकार के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए ड्राफ्ट में उनकी मांगों को शामिल करने की मांग की। पूर्व प्रधान रावल ने कहा कि जब तक नीति स्पष्ट नहीं होगी वह बैठक का बहिष्कार करते रहेंगे। बीडीसी सदस्य मनोज सामंत ने कहा कि बीते अगस्त माह में ग्राम पंचायत की बैठक में भी उनसे सुझाव लेने के नाम पर हस्ताक्षर करवा लिए और गांव वालों से वन भूमि पर निरापत्ति ले ली।
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इस मौके पर ग्राम प्रधान सीता देवी के साथ महिलाओं ने भी जोरदार नारेबाजी करते हुए आक्रोश जताया। कहा कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो पंचेश्वर बांध निर्माण का विरोध जारी रहेगा। ग्रामीणों ने कहा कि सरकार की ओर से विस्थापन के लिए जगह नहीं बताई गई है। उन्होंने चंपावत बाजार की भूमि के बराबर सर्किल रेट देने, प्रत्येक बांध प्रभावित परिवारों को कम से कम पांच एकड़ उपजाऊ भूमि देने, प्रत्येक परिवार को भवन के लिए 30 लाख, गोशाला के लिए अलग से ढाई लाख रुपये देने, डूब क्षेत्र के बाद दो किमी दूर के गांव को भी भूस्खलन की दृष्टि से देखते हुए डूब क्षेत्र में रखने , बंजर भूमि का भी सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजा देने समेत कई मांगे उठाईं। ग्रामीणों ने कहा कि विस्थापितों को वहां पर जगह दी जाए जहां रोजगार की गारंटी के अलावा स्कूल, अस्पताल, बैंक, सड़क, पानी आदि की सुविधा हो, सभी डूब क्षेत्र के प्रभावितों को एक साथ बसाया जाय। बिजली, पानी के बिल माफ करने के साथ एक मुश्त में मुआवजे की रकम का भुगतान किया जाय। इस मौके पर पंचायत मंत्री अनिरुद्ध पुनेठा, ग्राम विकास अधिकारी दीपक टम्टा, राजस्व उपनिरीक्षक दीपक साही के अलावा गांव के धन सिंह, श्याम राम, दीपक सिंह, बसंती देवी, कमला, कुंती देवी, भागीरथी देवी, मुन्नी देवी, कलावती देवी, लक्ष्मण सिंह, शेर सिंह, रुद्र सिंह, श्याम सिंह, हेमा देवी, पुष्पा देवी आदि मौजूद रहे।
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सिमलखेत में भी हुई ग्रामीणों की खुली बैठक
लोहाघाट (चंपावत)। प्रस्तावित पंचेश्वर बांध निर्माण को लेकर डूब क्षेत्र में आने वाले विकासखंड पाटी के ग्राम सभा चिल्नियां सिमलखेत में ग्रामीणों की खुली बैठक आयोजित की गई। राजेंद्र सिंह की अध्यक्षता में हुई खुली बैठक में विस्थापन और पुनर्विस्थापन के संबंध में लोगों ने कहा कि चार किश्तों में दी जाने वाली मुआवजे की धनराशि को दो किश्त में दी जाय। बैठक में लोगों ने जिनकी जमीन डूब क्षेत्र के अलावा अन्य जगह पर है उसका मुआवजा दिया जाएगा या नहीं, भवन निर्माण दरों पर निष्पक्ष नीति बनाने समेत कई मांगे उठाईं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने उनकी मांग पूरी नहीं की तो वह बांध निर्माण का विरोध तो नहीं करेंगे, लेकिन स्पष्ट नीति बनाने के लिए मांग जारी रहेगी। इस मौके पर तहसीलदार ललित मोहन तिवारी, ग्राम पंचायत अधिकारी प्रेम प्रकाश, ग्राम विकास अधिकारी किशोर कुमार, श्याम सिंह, पूरन सिंह आदि मौजूद रहे। रैघांव में ग्राम विकास अधिकारी प्रवीण भटट और रविंद्र गोस्वामी की मौजूदगी हुई बैठक में भी ग्रामीणों ने अपनी मांगों को प्रमुखता से रखा। उनका कहना था कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई तो वे बांध का पुरजोर विरोध करेंगे।