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खुली बॉडी, घिसे टायर...मौत बनकर दौड़ रहे शक्तिमान ट्रक
अमर उजाला ब्यूराे टनकपुर (चंपावत)।
Updated Sat, 10 Mar 2018 10:56 PM IST
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शारदा से खनिज निकासी कर सड़क पर दौड़ता खटारा शक्तिमान ट्रक।
- फोटो : अमर उजाला
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शारदा से खनिज निकासी में लगे शक्तिमान ट्रक मौत का सबब बन रहे हैं। बीते दिनों हाइवे पर शक्तिमान ट्रक द्वारा छात्र को मौत की नींद सुलाने के बाद अब लोग सड़क पर दौड़ते इन शक्तिमान ट्रकों से खौफजदा हैं। यह वाहन एमबी एक्ट का खुला उल्लंघन कर सड़कों पर अनियंत्रित गति से दौड़ रहे हैं। वहीं, इन ट्रकों की ओर मानकों पर निगरानी रखने वाले विभाग भी मुंह फेरे हैं।
सीमांत क्षेत्र में शारदा नदी से खनिज की निकासी सिर्फ शक्तिमान ट्रकों से ही होती है। हालांकि, इस वर्ष से प्रशासन ने नौ ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को भी खनिज निकासी में उतरा है, लेकिन मौजूदा समय में करीब साढ़े तीन सौ शक्तिमान ट्रकों से खनिज निकासी हो रही है, जबकि करीब पांच सौ से अधिक वाहन यहां से अन्य क्षेत्रों में खनिज सामग्री ढो रहे हैं। इन वाहनों की फिटनेस सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है। इस मामले में एआरटीओ वीके सिंह ने बताया कि शक्तिमान ट्रक सेना के बेकार हो चुके वाहनों से बने हैं। सेना में 15 साल की आयु पूरी करने के बाद इनका एआरटीओ कार्यालय से दोबारा पंजीकरण किया गया है, जिन्हें आरटीओ के स्तर से परमिट जारी किया जाता है।
नियमानुसार शक्तिमान ट्रकों की फिजिकल फिटनेस ठीक होने के साथ ही दांयी बॉडी पूरी तरह और पीछे का डाला बंद होना चाहिए, वहीं टायर भी घिसे हुए न हो, लेकिन यहां तो ज्यादातर शक्तिमान ट्रक नियमों का उल्लंघन कर धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं। ज्यादातर वाहनों में बॉडी के दांयी एवं बाई ओर खुले डाले बनाए गए हैं। टायरों की दशा भी ऐसी है कि खनिज लादकर सड़क पर दौड़ रहे इन ट्रकों के टायर कब फट कर हादसे का कारण बन जाए, कहा नहीं जा सकता। नदी से ये तो यह ट्रक मानक के अनुसार ही लोड होते हैं, लेकिन स्टाक से खनिज सामग्री खुलेआम ओवरलोड ढोई जारी है। इधर, इस मामले में एआरटीओ ने बताया कि खनन शुरू होने के बाद अब तक फिटनेस की जांच की जा रही है। बहरहाल नियमों का उल्लंघन कर रहे इन ट्रकों की ओर प्रशासन के मुंह फेरने से फिर किसी हादसे का अंदेशा बना हुआ है।
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सीमांत क्षेत्र में शारदा नदी से खनिज की निकासी सिर्फ शक्तिमान ट्रकों से ही होती है। हालांकि, इस वर्ष से प्रशासन ने नौ ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को भी खनिज निकासी में उतरा है, लेकिन मौजूदा समय में करीब साढ़े तीन सौ शक्तिमान ट्रकों से खनिज निकासी हो रही है, जबकि करीब पांच सौ से अधिक वाहन यहां से अन्य क्षेत्रों में खनिज सामग्री ढो रहे हैं। इन वाहनों की फिटनेस सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है। इस मामले में एआरटीओ वीके सिंह ने बताया कि शक्तिमान ट्रक सेना के बेकार हो चुके वाहनों से बने हैं। सेना में 15 साल की आयु पूरी करने के बाद इनका एआरटीओ कार्यालय से दोबारा पंजीकरण किया गया है, जिन्हें आरटीओ के स्तर से परमिट जारी किया जाता है।
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नियमानुसार शक्तिमान ट्रकों की फिजिकल फिटनेस ठीक होने के साथ ही दांयी बॉडी पूरी तरह और पीछे का डाला बंद होना चाहिए, वहीं टायर भी घिसे हुए न हो, लेकिन यहां तो ज्यादातर शक्तिमान ट्रक नियमों का उल्लंघन कर धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं। ज्यादातर वाहनों में बॉडी के दांयी एवं बाई ओर खुले डाले बनाए गए हैं। टायरों की दशा भी ऐसी है कि खनिज लादकर सड़क पर दौड़ रहे इन ट्रकों के टायर कब फट कर हादसे का कारण बन जाए, कहा नहीं जा सकता। नदी से ये तो यह ट्रक मानक के अनुसार ही लोड होते हैं, लेकिन स्टाक से खनिज सामग्री खुलेआम ओवरलोड ढोई जारी है। इधर, इस मामले में एआरटीओ ने बताया कि खनन शुरू होने के बाद अब तक फिटनेस की जांच की जा रही है। बहरहाल नियमों का उल्लंघन कर रहे इन ट्रकों की ओर प्रशासन के मुंह फेरने से फिर किसी हादसे का अंदेशा बना हुआ है।
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