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यहां पानी की कमी से नहीं हो रहा है शौचालय का उपयोग

Thu, 18 Apr 2019 11:15 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन अमर उजाला ब्यूरो चंपावत।
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत। Published by: बृजमोहन बृजमोहन Updated Thu, 18 Apr 2019 11:15 PM IST
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Toilets are useless
दूर गधेरे से पानी ढोते निगाली गांव के लोग। - फोटो : अमर उजाला

जिले के खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) होने के दावों के बावजूद नेपाल सीमा से लगे निगाली गांव के लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। शौचालय होने के बावजूद ये हाल हैं। इसकी मुख्य वजह निगाही में पेयजल संकट का होना है।

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जिला मुख्यालय से 53 किलोमीटर दूर पोथ ग्राम पंचायत के निगाली गांव में 20 परिवारों के 105 लोग रहते हैं। 11 अप्रैल को हुए लोकसभा चुनाव में निगाली में पहली बार मतदान केंद्र भी बना। 52 वोटरों में से 25 ने मतदान में हिस्सा लिया। गांव में दो वर्ष पूर्व सभी परिवारों के लिए शौचालय तो बन गए लेकिन इन शौचालयों का उपयोग नहीं हो पा रहा है।
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गांव के लोग अब भी खुले में शौच को जाने के लिए मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे पानी की कमी के चलते शौचालय को प्रयोग में नहीं ला पा रहे हैं। शौच के लिए वह सौ मीटर से तीन सौ मीटर दूर जाने को मजबूर हैं।
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18 साल में 19 परिवारों ने किया पलायन
ग्रामीणों का कहना है कि शौचालय का उपयोग न हो पाने, पेयजल किल्लत के अलावा शिक्षा की व्यवस्था नहीं होने से यहां के लोग पलायन करने को मजबूर हैं। लालू साही, बालू, बसंती देवी, तेज सिंह, रणवीर आदि का कहना है कि बुनियादी सुविधाओं की कमी से गांव में बीते 18 साल में 19 परिवार यहां से पलायन कर चुके हैं। ब्यूरो


कम राशि से शुरू नहीं हो सकी पेयजल योजना
सीमावर्ती निगाली गांव के लिए बनने वाली निगाली सोलर पंपिंग पेयजल योजना पर्याप्त धन नहीं मिलने से लटक गई है। ग्राम प्रधान लक्ष्मी देवी का कहना है कि निगाली पेयजल योजना के लिए सात लाख रुपये मिले थे लेकिन इसके निर्माण में 15 लाख रुपये से अधिक की जरूरत होने के चलते जल निगम ने इस रकम को वापस कर दिया। गांव में पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं होने से लोग 250 मीटर से अधिक दूरी तय कर पानी ढोने को मजबूर हैं। डीएम रणवीर सिंह चौहान का कहना है कि सीमावर्ती निगाली की पेयजल जरूरत के मुताबिक योजना बनाने पर विचार किया जाएगा। ब्यूरो 

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