फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   TJ's bridge has not moved one step ahead in three years

एक कदम आगे नहीं बढ़ सका टनकपुर-जौलजीबी पुल

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 11 Nov 2020 10:51 PM IST
विज्ञापन
TJ's bridge has not moved one step ahead in three years
र्मिणाधीन टनकपुर-जौलजीबी मोटर मार्ग में चूका के पास लटका पुल। - फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। नेपाल सीमा से लगे होने से टीजे (टनकपुर-जौलजीबी) मार्ग का सामरिक महत्व है। नेपाल से तल्ख होते संबंधों के बीच इसका महत्व और ज्यादा है, लेकिन इस सड़क का पूरा होना तो दूर, जिस पुल को जून 2019 में पूरा हो जाना था, वह पुल शुरू भी नहीं हो सका है और अब पुल के ठेकेदार के अनुबंध को भी निरस्त कर दिया गया है, लेकिन पुल का काम फिर से शुरू कराने के लिए नई निविदा प्रक्रिया भी शुरू नहीं की गई है।
विज्ञापन

टीजे रोड पर चूका और रुपालीगाड़ के बीच लधिया नदी पर 690 मीटर लंबे पुल का काम 2018 से शुरू किया गया। ब्रिज, रोपवे, टनल एंड अदर इन्फ्रांस्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (ब्रिडकुल) को 33 करोड़ रुपये की लागत वाले इस पुल को बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी। छिटपुट सर्वे के अलावा पुल को लेकर कोई काम नहीं हुआ, जबकि इस पुल को जून 2019 में पूरा हो जाना था। काम में लापरवाही और अनुबंध की शर्त के उल्लंघन पर ठेकेदार का अनुबंध निरस्त कर दिया गया।
विज्ञापन

कोट
काम में लापरवाही के चलते ठेकेदार का अनुबंध समाप्त कर दिया गया। पूरे मामले में आगे के निर्देश के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। जैसे निर्देश आएंगे, उसके अनुरूप काम किया जाएगा। - गंभीर सिंह, सहायक महाप्रबंधक, ब्रिडकुल, हल्द्वानी।
विज्ञापन
विज्ञापन

पुल के बगैर सड़क का लाभ नहीं : विधायक
टीजे सड़क का चूका से आगे लाभ तभी मिल सकेगा, जब यह पुल पूरा हो सकेगा। पुल के बगैर टनकपुर से चूका तक ही आवाजाही हो सकेगी। ब्रिडकुल के मुताबिक पुल के निर्माण में न्यूनतम डेढ़ साल लगेंगे। इस रोड को लेकर आवाज उठाते रहे लोहाघाट के विधायक पूरन सिंह फर्त्याल का भी कहना है कि चूका और रुपालीगाड़ को जोड़ने वाले पुल को बनाने में देरी हुई है। पुल के बगैर आगे की रोड का कोई मतलब नहीं है।

तो आसान होती एसएसबी की बीओपी तक पहुंच
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित एसएसबी की बॉर्डर आउटपोस्ट (बीओपी) तक पहुंच को सुगम बनाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 2015 में 135 किमी टीजे मार्ग को मंजूरी दी थी, लेकिन प्रस्तावित पंचेश्वर बांध के डूब क्षेत्र की अंतिम स्थिति साफ न होने से जौलजीबी के बजाय ठुलीगाड़ से रुपालीगाड़ (42.275 किमी) तक ही मंजूर किया गया। चूका से रुपालीगाड़ तक के 24.40 किमी मार्ग पर विवाद के चलते अगस्त 2017 से पूरे 38 माह तक काम भी रुका रहा। अलबत्ता अब यह अड़चन दूर हो गई है। सड़क बनने से बीओपी तक मजबूत आधारभूत ढांचा बनने के साथ नेपाल सीमा पर सुरक्षा चौकसी सुगम होती। चंपावत और पिथौरागढ़ जिले की सीमा पर एसएसबी की 34 बीओपी में से 19 में सड़क सुविधा नहीं है। इस वजह से यहां जरूरी सामग्री पहुंचाने में देरी के साथ लागत भी ज्यादा आती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed