{"_id":"58711c944f1c1ba37815c466","slug":"this-time-the-fair-the-day-before-byandhura","type":"story","status":"publish","title_hn":"इस बार ब्यानधूरा का मेला एक दिन पहले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इस बार ब्यानधूरा का मेला एक दिन पहले
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट (चंपावत)
Updated Sat, 07 Jan 2017 10:21 PM IST
विज्ञापन
इस बार ब्यानधूरा का मेला एक दिन पहले
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कुमाऊं क्षेत्र के प्रसिद्ध ऐड़ी ब्यानधूरा का मेला इस बार 14 जनवरी के बजाय 13 जनवरी को होगा। इसके लिए बाबा ब्यानधूरा सेवा समिति ने तैयारियां पूरी कर ली हैं।
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित मोहन चंद्र जोशी ने हिंदू पंचांग का अवलोकन करने के बाद बताया कि इस वर्ष पौष मास में 30 गते होने से बाबा ब्यानधूरा मेले का श्रीगणेश 13 जनवरी से होगा। आम तौर पर पौष माह में 31 गते होते हैं। पूजा-अर्चना के बाद 14 जनवरी को मेले का समापन होगा।
बताया गया कि आमतौर पर वर्षों से ये मेला 14 जनवरी से शुरू होता था। मकर संक्रांति पर्व में होने वाले इस मेले में पर्वतीय इलाकों के अलावा तराई-भाबर क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मेले की तैयारियों को लेकर हुई बैठक में वक्ताओं ने मेले के सफल आयोजन में सहयोग करने का संकल्प लिया। इस दौरान संजय जोशी, जगदीश सिंह चौहान, दया किशन जोशी, शंकर जोशी, गुमान सिंह आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
ब्यानधूरा मंदिर में चढ़ाए जाते हैं धनुष-बाण
चंपावत जिले के मैदानी क्षेत्र बनबसा से लगे सेनापानी के बियावान जंगल में स्थित ब्यानधूरा बाबा का मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि यहां पूजा करने से मन्नतें पूरी होती है। यहां तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब दस किलोमीटर की दूरी पैदल तय करनी होती है। महाभारत कालीन इस मंदिर में भगवान शिव के ब्यानधूरा स्वरूप की पूजा होती है। मंदिर की सबसे बड़ी खासियत ये है कि यहां अक्षत-पुष्प के साथ ही धनुष-बाण भी चढ़ाए जाते हैं। मंदिर के पास ही श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाए गए धनुष-बाणों का चट्टा लगा है। यहां मंदिर कमेटी की ओर से बेसहारा गायों की सहायता के लिए गौ सदन की स्थापना भी की है।
विज्ञापन
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित मोहन चंद्र जोशी ने हिंदू पंचांग का अवलोकन करने के बाद बताया कि इस वर्ष पौष मास में 30 गते होने से बाबा ब्यानधूरा मेले का श्रीगणेश 13 जनवरी से होगा। आम तौर पर पौष माह में 31 गते होते हैं। पूजा-अर्चना के बाद 14 जनवरी को मेले का समापन होगा।
विज्ञापन
बताया गया कि आमतौर पर वर्षों से ये मेला 14 जनवरी से शुरू होता था। मकर संक्रांति पर्व में होने वाले इस मेले में पर्वतीय इलाकों के अलावा तराई-भाबर क्षेत्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मेले की तैयारियों को लेकर हुई बैठक में वक्ताओं ने मेले के सफल आयोजन में सहयोग करने का संकल्प लिया। इस दौरान संजय जोशी, जगदीश सिंह चौहान, दया किशन जोशी, शंकर जोशी, गुमान सिंह आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
ब्यानधूरा मंदिर में चढ़ाए जाते हैं धनुष-बाण
चंपावत जिले के मैदानी क्षेत्र बनबसा से लगे सेनापानी के बियावान जंगल में स्थित ब्यानधूरा बाबा का मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि यहां पूजा करने से मन्नतें पूरी होती है। यहां तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब दस किलोमीटर की दूरी पैदल तय करनी होती है। महाभारत कालीन इस मंदिर में भगवान शिव के ब्यानधूरा स्वरूप की पूजा होती है। मंदिर की सबसे बड़ी खासियत ये है कि यहां अक्षत-पुष्प के साथ ही धनुष-बाण भी चढ़ाए जाते हैं। मंदिर के पास ही श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाए गए धनुष-बाणों का चट्टा लगा है। यहां मंदिर कमेटी की ओर से बेसहारा गायों की सहायता के लिए गौ सदन की स्थापना भी की है।